Monday, August 24, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-31

सावली - अरे इतनी भी जल्दी क्या है ? थोड़ा सब्र भी करना चाहिए...
सलीम- थोड़ा सब्र तो चलेगा मगर तुम तो मुझे कबसे बहका रही हो...
सावली - अरे यार उसको लाना पड़ेगा ढूंढकर... किसी कस्टमर के साथ होगी....
इसके बाद जब सावली ने उसे एक कालगर्ल मोडल का फोटो सलीम को दिखाया तो उसके होश उड़ गए, उसका सारा नशा हिरन हो चुका था... सलीम ने उसको रिजेक्ट कर दिया... किसी दूसरी को लाने को कहा... सावली ने उसे कई तस्बीर दिखाईं, जिनमें से उसने एक पसंद भी करली... अब वह एक लोज में आ गया, यह बार वालों का ही लोज था जिसको काफी अन्दर बनाया गया था , जिससे की किसीको कुछ पता ना चले, और अगर पुलिस आती भी है तो उसे आने से पहले ही वहां के लोगों को भगाया जा सके... सावली ने जैसा बताया कालगर्ल भी उसी तरह की थी... उसने सलीम को खूब सुख दिया ... एक बार शारीरिक सुख उठाने के बाद रोजी नाम की कार्लगर्ल ने पुछा -
- घर में पत्नी होने के बावजूद तुम मर्द लोग हमारा सहारा क्यों लेते हो ?
सलीम- दरअसल जब बीवी को बच्चे हो जाते हैं वह बेहद ढीली हो जाती है , कुछ वक्त बाद तक तो सभी कपल्स की सेक्स लाइफ जबर्दस्त रहती है, लेकिन ऐसे जोड़ियां कम ही होती हैं, जिनके रिलेशन में बेबी होने के

बाद भी उतनी ही गर्मी बरकरार रहती है... जाहिर सी बात है कि बच्चा होने के बाद पैरंट्स को अपना काफी वक्त उसकी देखभाल में खर्च करना पड़ता है.... बच्चा रात को देर से सोता है और सुबह को जल्दी उठ जाता है.... मम्मी उसे ब्रेस्ट फीडिंग कराने, नैपी चेंज करने, नहलाने-धुलाने और मालिश में बिजी रहती है.... ऐसे में थकान के साथ-साथ हसबेंड-वाइफ को एक-दूसरे के लिए वक्त मिलना वाकई कम हो जाता है.... कई बार प्रेग्नंसी के बाद कुछ वक्त के लिए महिलाओं की सेक्स में रुचि कम हो जाती है...
रोजी - लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप बच्चे की वजह से अपनी सेक्स लाइफ पर रोक लगा दे.... थोड़ी सावधानी बरत कर आप बच्चे के जन्म की वजह से पटरी से उतर गई अपनी सेक्स लाइफ को दोबारा ट्रैक पर ला सकते हैं.....
सलीम- हाँ यूँ तो मेरे एक दोस्त भी कहते हैं, क्या नाम हैं उनका ? हाँ,

सेक्सोलॉजिस्ट और रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ. राजन भोंसले कहते हैं, 'किसी भी महिला के लिए प्रेग्नंट होना बिल्कुल अलग अहसास होता है। बच्चा उसके अपने ही शरीर का एक हिस्सा होता है, इसलिए मां और बच्चे में काफी इमोशनल जुड़ाव होता है। ऐसे में कई बार बच्चे की वजह से सेक्सुअल रिलेशन लो प्रायारिटी पर आ जाते हैं... मां बनने के बाद बच्चे की सेहत का ख्याल रखना किसी भी मां की पहली प्रायारिटी होती है... रिलेशनवाइज भी देखा जाए, तो मां बनने के बाद महिला की जिम्मेदारियों में बढ़ोतरी हो जाती है... इसलिए ज्यादातर मांएं अपनी एनर्जी को पूरी तरह बच्चे का ध्यान रखने में लगाती है। यही वजह है कि वे सेक्स लाइफ पर इतना ध्यान नहीं दे पाती....

हालांकि जब बच्चा कुछ महीने का हो जाता है, जो महिलाएं







दोबारा से प्रेग्नंसी से पहले वाली कंडिशन में आ हैं... उन्हें दोबारा से मासिक धर्म होने लगता है और उनके भीतर सेक्स करने की इच्छा दोबारा से जोर मारने लगती है... यह अपनी सेक्स लाइफ को दोबारा से एक्टिव करने का बिल्कुल सही समय है... डॉ. भोंसले बताते हैं, 'कई बार महिलाओं को लगने लगता है कि सेक्स का परपज सिर्फ पेग्नंट होना है, वे भूल जाती हैं कि इसका मेन परपज शादीशुदा कपल के संबंधों में ताजगी बनाए रखना है.... कई बार हसबेंड भी बच्चे के जन्म के तुरंत बाद अपनी वाइफ पर सेक्स करने के लिए प्रेशर डालने लगते हैं.... उन्हें भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इससे न सिर्फ महिला को परेशानी हो सकती है, बल्कि उसे सेक्स के प्रति अरुचि भी हो सकती है....
सावली- मगर मेरा मानना है की

सिर्फ फिजिकल होने की बजाय इमोशनल, स्प्रिचुअल, साइकॉलजिकल भी होना चाहिए.... इससे कपल्स को प्रेग्नंसी जैसे वक्त में अपने रिश्तों की गर्मी बरकरार रखने में मदद मिलती है... रचना कहती हैं, 'माना कि बच्चा होने के बाद पैरंट्स की जिम्मेदारी बढ़ जाती है, लेकिन बावजूद इसके उन्हें साथ में कुछ क्वॉलिटी टाइम बिताने की कोशिश करनी चाहिए.... बच्चे की बर्थ के तुरंत बाद आप बिना रिलेशन बनाए सिर्फ फोरप्ले से ही अपने सेक्स रिलेशन जवां बनाए रख सकते हैं.... चाहें तो बैडरूम में म्यूजिक चलाकर और फ्लावर लगाकर रोमांटिक माहौल बना सकते हैं.... इस तरह थोड़े वक्त बाद जब आपकी वाइफ के हॉर्मोन में चेंज आएगा, तो आपकी सेक्स लाइफ आसानी से पटरी पर लौट आयेगी...' बच्चे के जन्म के बाद कई महिलाओं को वैजाइना में ढीलेपन की शिकायत हो जाती है... ऐसे में एक्सरसाइज या योगा की मदद से आप अपनी मसल्स को दोबारा से चुस्त कर सकती हैं... कुछ हफ्तों की एक्सरसाइज या योगा प्रैक्टिस के बाद आपकी सेक्स लाइफ में दोबारा से बहार लौट आयेगी.....

कई बार बच्चे के जन्म को आसान बनाने के लिए डिलिवरी के वक्त एप्सिटॉमी नाम की छोटी सी सर्जरी की जाती है... यह एक छोटा सा ऑपरेशन है, जिसके तहत बच्चे को आसानी से बाहर निकालने के लिए वैजाइना को थोड़ा बड़ा किया जाता है.... कई बार इस ऑपरेशन की वजह से इंटरकोर्स करते वक्त परेशानी या दर्द होता है... हालांकि अगर आप सावधानी बरतें, तो 6 से 8 हफ्ते में इस सर्जरी का असर खत्म हो जाता है और वैजाइना अपनी पुरानी शेप में लौट आती है,

सलीम- सच , अरे यार तुम तो डॉक्टर लगती हो... क्या तुम्हें ये ज्ञान ऐसे ही हो गया या फ़िर पढने -लिखने से ?
रोजी- मेरे पिता डॉक्टर थे... उनकी मौत हो गयी... मेरी सौतेली माँ ने सब संपत्ति अपने नाम करली... इसी कारण मुझे इस लाइन में आना पडा... अब मैं पढ़ती हूँ, और अपना खर्च निकालने के लिए कभी कभार किसीके साथ रात गुजार लेती हूँ... और तुमने सही पहचाना , मैं डॉक्टरी की पढाई कर रही हूँ...
सलीम- ओह , मैं तुम्हारी नोलेज पहचान गया था, जीवन जीने के लिए हम लोगों को कितने समझौते करने पड़ते हैं... मैं तुमसे बार- बार मिलना चाहूँगा...
रोजी- ठीक है मगर मेरा कोंत्रेक्त इसी बार के साथ है, इसलिए मैं इसी माध्यम से मिल सकती हूँ... पूरा सुख देने की गारंटी मेरी है और इस बात को गुप्त रखने की जिम्मेदारी आपकी भी है...

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