Saturday, August 29, 2009

दिलफेंक पडोसन, भः-36

इसलिए रंगे हाथों पकड़ने का ख्याल मन से निकालना होगा, तो फ़िर उसके पास एक दूसरा रास्ता यह बचता था की मैं अपने किसी ख़ास दोस्त के लिए उसे बार में जाकर बुक कराऊँ और फ़िर अपनी आंखों से उसे देखूं, मगर दोस्त के साथ सम्बन्ध बनाते हुए नहीं, अचानक उसके सामने आकर... बाकी कहानी तो ख़ुद दोस्त बता ही देगा... उसने एक फुल प्रूफ़ योजना तियार की और घर से निकल गया, अपने एक जिगरी यार को उसने तैयार भी कर लिया, उसका दोस्त एक नंबर का शराबी था लेकिन चरित्रहीन नहीं... उसका नाम राजू था, सलीम उससे अपनी हर बात कर लिया करता था... वे दोनों न तो एक जिले प्रदेश के थे और न ही एक जाती- धर्म के, इसके बावजूद उन दोनों की aapas में khoob बनती थी... राजू ने उसको यकीन दिलाया-
- तू फ़िक्र मत कर मेरे यार... मैं सारी बात समझ गया हूँ ... अब मैं फरहा को अपने साथ लेकर तो जरूर जाऊँगा मगर उसका हाथ भी टाच नहीं करूँगा... तेरी मोहब्बत की इज्जत तो करनी ही पड़ेगी ....और सुन , मरते दम तक यह राज सिर्फ़ मेरे सीने में ही रहेगा, और फ़िर मेरे साथ ही दफ़न हो जाएगा... कोई नहीं जान पायेगा की कैसे क्या हुआ ? अब यह बात भी बताने की जरूरत नहीं की मुझ पर भरोसा करो...
सलीम- बस क्या यार , मेरा दोस्त होकर भी ऐसी हलकी बात करता है... अब तू दाढी मुच काटकर बिल्कुल हीरो बनजा , तियार होकर मेरी साथ मयूरी बार चल ... यह सैटिंग वहीं से होगी...
सलीम और राजू मयूरी बार में आ गए... शाम होते ही वहाँ महफ़िल सजा करती थी, जब वे दोनों पहुचे तो महफ़िल अपने पूरे शबाब पर थी... हर तरफ़ रंगीनियाँ थीं... सलीम आकर उसी जगह पर बैठ गया जहाँ पर वह कल बैठा था... वेटर की मदद से उसने कल वाली महिला वेटर को खोज लिया और उसे टिप्स दी, वह फ़ौरन पहचान गयी ... सलीम की तरफ़ शरारत से आँखें तरेरते हुए बोली-
-कहिये जनाब , रात मजा आया की नहीं ?
सलीम - मजे की छोडो ... उसका बाप भी आ गया...खूब मस्ती में बीती रात ... तुम नहीं जातीं क्या कभी बाहर ?
वेटर- मैं नहीं जा पाती... यहीं पर तुम सब को देख लेती हूँ... जो नसीब में होता है, यहीं पर मिल जाता है...
सलीम - कल वाली जिस मोडल का फोटो आपने दिखाया था, वह आज रात के लिए मिल सकती है क्या ?
वेटर- हाँ, हाँ क्यों नहीं.... कहो तो महीने भर की बुकिंग कर्वादूं, सच बता रही हूँ, बहुत गज़ब की चीज है... मिर्ची की तरह तीखी है... पहले उसकी बहुत डिमांड थी मगर अब उसके नखरे हो गए हैं...अगर उसके नखरे झेल सकते हो तो स्वागत है, मगर बाद में ये ना कहना की बताया नहीं था...
सलीम- कोई नहीं यार... तुहें कुछ नहीं कहेंगे...तुम तो अब दोस्त हो गयी हो हमारी ... उस नकचढी को संभालने की जिम्मेदारी हमारी है... तुम बुलाओ उसको...
सलीम ने अपने मोबाइल को स्विच ऑफ़ कर दिया ताकि जब उसको फरहा का फोन आए तो वह उसके बात ही न कर सके... इसके ठीक १० मिनिट के बाद महिला वेटर ने उस मोडल की स्वीकृति की जानकारी दी... उसने फरहा का नाम अनु बताया, सलीम समझ गया की उसने अलग -अलग जगह पर अपने अलग -अलग नाम बता रखे होंगे, वरना वह यहं पर अनु क्यों बताती...रात की कीमत तय कर ली गयी, इसके बाद होटल भी बुक कर लिया गया... सलीम ने साफ़ कर दिया की वह बार के लोगिंग रूम में नहीं रुक सकते... इसके बाद पीने का दौ शुरू हो गया... राजू ने पैग पीते हुए कहा-
- यार मैं कुछ नर्वस हूँ, मैंने कभी ऐसे जासूसी का काम नहीं किया ...
सलीम- तू भी कमाल करता है... दोस्ती के लिए लोग जान की बाजी तक लगा देते हैं और तू इतने से काम के लिए बहक रहा है... जब अभी से तेरा ये हाल है तो आगे क्या होगा ? तू मामले को बिगाड़ मत देना....
राजू- इतना एडा भी नहीं हूँ.... बस थोड़ी सी झिझक हो रही है लेकिन इनकार कब कर रहा हूँ...
सलीम- मेरा कमरा भी तेरे कमरे के बाजू में ही होगा, जब तू उसे अपने कमरे में लेजाये तो खाना बोल देना ... खाना खाने के बाद अचानक तबियत ख़राब होने का बहाना करना और फ़िर वहाँ से चल देना... तुझे उसको पूरी तरह से विश्वाश में लेना होगा... उसे पूरी फीस देनी होगी ...
राजू- फ़िर क्या करुँ उसके बाद ?
सलीम- इसके बाद होटल से बाहर निकलना , उससे ठीक पहले मुझे एक एस एम् एस करना... इस एस एम् एस को अभी से ही टाइप करके सेव कर लो... ताकि तुंरत अपने काम को अंजाम दे सको...

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