Friday, August 28, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-35

सलीम को बार की महिला ने जिस काल गर्ल का फोटो दिखाया था, वह किसी और का नहीं बल्कि फरहा का ही था... उसका पेशा भी मोडलिंग बताया गया था...तभी से उसके मन में जबरदस्त खटका लग गया... लेकिन रात में वह बहुत ज्यादा शराब पी गया था , इस कारण उसने रात में जो भी बातें सुनी थीं , वे दिमाग में गडमड हो रही थीं... वह समझ ही नहीं पा रहा था की उसने क्या कहा और क्या सुना ? सब कुछ सपने जैसी बातें लग रही थीं...... फरहा का मूड रोमांटिक था, वह अपने हुस्न के जलवे दिखाने लगी... सलीम का नाजुक अंग भी सख्त होने लगा... बदन सुलगने के लिए तैयार होने लगा... फरहा बहक रही थी, कह रही थी-
- तुमसे दूर रहकर पता चलता है की अब दिल में कितना प्यार उमड़ आया है... मैं तुमसे बहुत मोहब्बत करने लगी हूँ... अब मुझसे कभी दूर मत जाना ... मैं जी नहीं पाउंगी.... तुम नाराज हो मुझसे ?
सलीम- कमाल है, नाराज होकर ख़ुद चली गयीं थीं और पूछ मुझसे रही हो...
फरहा- चली गयी थी तो क्या ? तुमने तो नहीं मनाया ना... लेकिन मैं रात भर पछताती रही, मुझे माफ़ करदो सलीम, मैं तुम्हारे बिना जिन्दा नहीं रह सकती... मुझे अपने दिल में कैद कर लो और फ़िर इस फरहा को कभी मत भूलना... मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारी हूँ... तुम्हारे लिए ही कुदरत ने मुझे इस धरती पर उतरा है...
सलीम- ओह फरहा ... कितनी अच्छी हो तुम... मिंज तुमसे कभी नाराज नहीं हो सकता... नदी अपने पानी से कभी नाराज हो सकती है ? सुगंध कभी अपनी खुशबू से नाराज हो सकती है? सवाल ही नहीं उठता ...
फरहा- तो फ़िर नाश्ता कर लो... मैं भी चलती हूँ , कम्प्यूटर पर कुछ कम करना है, कुछ जगह पर फोटोग्राफ भेजने हैं, एक बड़ी फ़िल्म शुरू होने जा रही है... मैंइसीमें काम पाने की कोशिश कर रही हूँ...
सलीम - ठीक है फरहा... तुम काम देखलो ,मैं नाश्ता कर लेता हूँ ... मुझे भी एक जगह जाना है... खाना बाहर ही खाऊंगा... बोरीवली में ट्यूशन पढ़ना चाहता है एक छात्र ... कई दिनों से पीछे पडा है... आज जाकर बात कर लेता हूँ... मेरे ख़ास दोस्त ने उसकी शिफारिश की है... वह भी किसी बड़े गायक का बेटा है...
फरहा- ठीक है... मगर खाना खाकर जीएते तो अच्छा होता ... आज मैंने मटन बिरियानी बानाने की तैयारी की है... चाहो तो थोड़ा सा खाकर जाओ...
सलीम- बिल्कुल भी भूख नहीं है... रात को पार्टी में कुछ ज्यादा ही खा लिया था... देखो न अभी से ही कितना बुरा हाल हो रहा है... मैं अगर नीबू नमक का पानी नहीं पीता तो यह नाश्ता भी नहीं कर पाता....
फरहा- ठीक है , जैसी तुम्हारी इच्छा ... मगर रात के खाने की पसंद तो बतादो... शाम को क्या बनाऊं....?
सलीम- शाम की शाम को देखेंगे... अगर आ गया तो तुम लोगों की इच्छा का खाना ही खा लूंगा... अगर नहीं आया तो कोई बात ही नहीं है... तुम तो जानती ही हो की हम लोग कितनी उलझन में रहते हैं... मेरा साइड बिजनिस भी है... उसीके सिलसिले में रात -दिन घूमना पड़ता है...
फरहा- हाँ , वो तो है... काम भी जरूरी है....फोन जरूर करना , जैसे भी हो बता देना...
सलीम- जी , बिल्कुल... अब हमेशा थोड़े ही मोबाइल में गड़बड़ रहेगी....
इसके बाद फरहा चली गयी... सलीम ने राहत की साँस ली, उसकी उपस्थिति में वह घुटन सी महसूस कर रहा था... उसकी समझ में यह बात नहीं आ रही थी की आख़िर वह फरहा से ऐसा व्यवहार करे... फरहा की बातचीत संदेह स्पस्द जरूर थीं लेकिन कहीं से भी ऐसा नहीं लगता था की फरहा पेशेवर वैश्या है... वह इस बात की पूरी तसल्ली कर लेना चाहता था... इसीलिए उसने अपने मन ही मन एक योजना तियार की... उसी योजना को अमली जामा पहनाने के लिए वह घर से बाहर जा रहा था... उसके लिए यह एक नया अनुभव था, हांलाकि उसने सुन रखा था की कालेज की लड़कियां तथा बड़े घर की लड़कियां भी मौजमस्ती करने और जेब खर्च के लिए ग़लत रास्ता अख्तियार कर लेती हैं... मगर इतने बड़े पैमाने पर यह होता होगा इसकी कल्पना भी उसने नहीं की थी... सलीम यह भी जानता था की अगर फरहा को उसने रेंज हाथ पकड़ लिया तो वह उसके जिस्म का उपभोग भी नहीं कर पायेगा और उसने अब तक उस पर जितना भी खर्च किया , वह सब बेकार जाएगा...

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