Monday, August 10, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-18

फरहा- ये आप क्या कह रहे हैं ? दिखने में तो वे पंडित जी बड़े सीधे और सरल लगते हैं... मगर तुम बता रहे हो की नौकरानी से लगे पड़े थे और जब तुमने उनको रेंज हाथों पकडा तो तुम्हें भी ऑफर करने लगे ?
सलीम- अरे मैं तो हैरान रह गया था... उस नौकरानी ने अचानक मुझे अपनी तरफ़ खीच लिया था , मैं बेड पर गिर पडा... वह नौकरानी थोडी उम्र दराज थी लेकिन जिस्म बड़ा कंटीला था , एक बार तो इच्छा हुई की बहती गंगा में मैं भी हाथ धोलूँ , मगर फ़िर कुछ सोचकर मैंने साफ़ इनकार कर दिया... वह कहने लगी-
- अगर आप मुझे स्वीकार नहीं करोगे तो किसीसे कह दोगे... एक बार मजा लेकर देखो , फ़िर अपनी मास्टरनी को भी भूल जाओगे... मैंने अभी तक शादी नहीं की... अभी तक ये पंडित जी ही आनंद भोगते हैं... अगर तुम भी अपनी प्यास बुझाने लगो तो मुझे कोई ऐतराज नही होगा...
पंडित जी- हाँ भी मास्टर जी... सच कह रही है... मैं भी इससे पूरी तरहसे सहमत हूँ... अब बूढा हो चुका हूँ यार... इसको मनमाफिक मजा नहीं दे पाटा हूँ... तुम जैसा नौजवान हो तो अपना भी दिल बहल जाए और इसको भी आनंद मिल जाए... यह बेचारी थोड़े ही इसके बदले कुछ लेती हैयह तो बस मिजाज की रंगीली है... मौज मस्ती लेना पसंद है... भरोसेमंद भी है... अब इसका फैसला करना तुम्हारे हाथ में है... ऐसे अवसर जीवन में बार-बार नहीं मिलते ... घर बैठे हुस्न की मलिका तुम्हें पुकार रही है... इसीको अपने यहाँ काम पर रखलो... जब जी में आए तभी किवाड़ बंद करके सुख लेलेना ... जब जी करे तो रात में रोक लेना...
फरहा- फ़िर भी तुमने ऐसे समय को हाथ से जाने दिया... शायद एकाध बार तो मस्ती ली ही होगी...
सलीम- क्या कह रही हो... मैं तुम्हें ऐसा दीखता हूँ क्या ? तुम्हारे ऊपर दिल आ गया है , इसका मतलब यह नहीं की मैं बाद चलन हूँ या फ्व्फिर रंगीन मिजाज हूँ...
फरहा- तुम तो इतनी जल्दी नाराज हो गए... मैं तो बस यूँ ही कह रही थी, अब की बात थोड़े ही कर रही हूँ ... अब तो तुम्हारा सारा समय मुझे चाहिए... जब टाइम पास करने का कोई रास्ता नहीं था, उस वक्त अगर तुम इस तरह का कोई रास्ता ढूंढ लेते तो मुझे कोई परेशानी नही होती....
सलीम- तुम मिल गयी हो , और मुझे क्या चाहिए... मेरे लिए तुम्हीं सब कुछ हो...
फरहा- अच्छा ठीक है... कोई बात नहीं , इस टोपिक को बंद करके अब हम लोग चलते हैं फ़िल्म देखने...
सलीम- थियेटर में अब मजा नहीं आता... यहीं पर जानदार फ़िल्म दिखाता हूँ... कल जो देखिये वह इतनी मजेदार नहीं थी... आज तुम्हें दिखाता हूँ की सेक्सी महिलायें किस कदर अपनी जवानी के जोश से मजबूर हो जाती हैं और फ़िर वे कौन सा रास्ता अपनाने के लिए तैयार हो जाती हैं... यहाँ तक की वे जानवरों से भी जिस्मानी ताल्लुकात बनाने से नहीं चूकती... ऐसी कहानी सिर्फ़ फिल्मों में नहीं हकीकत में भी होती हैं...
फरहा- मैं नहीं मानती... भला लड़कियों के लिए लड़कों की क्या कमी है जो वे ऐसा रास्ता चुनेंगी... अब मुझे ही देखो, अगर मैं किसी बी ही लड़के को अपना बदन सौंपने की पेशकश करुँ तो बताओ कौन सा लड़का मना करेगा ?
सलीम- मैंने ख़ुद उस नौकरानी को इनकार कर दिया था... और किसकी कहूं...
फरहा- आपकी बात इसलिए अलग है क्योनी उस समय नौकरानी के अलावा तीसरा व्यक्ति भी मौजूद था और यह पेशकश अचानक की गयी थी... अगर वही नौकरानी अकेले में तुमसे कहती तो मना नहीं कर पाते तुम भी...
सलीम- अच्छा जी... बात वैसे तुम सच कह रही हो... अगर वह नौकरानी उस वक्त गैर व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक अवस्था में नही पकडी जाती तो हो सकता है की मेरे मन में भी उसके प्रति हमदर्दी जाग्रत हो जाती, प्यार उमड़ सकता था ...क्योंकि भले ही वह नौकरानी थी , लेकिन जवानी में भन्ना रही थी... बहुत गज़ब दिखती थी... तभी तो उसकी हर जगह डिमांड रहती थी...
फरहा - अब वह यहाँ नहीं आती क्या ?
सलीम- नहीं उस दिन के बाद एकाध बार आई थी, फ़िर शायद झिझक और शर्म की वजह से उसने काम छोड़ दिया, सुना है अब वह पंडित से अलग जगह पर मिलती है...
फरहा- अब दुनिया को जाने दीजिये... अपने प्यार की बात करते हैं...

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