Thursday, August 27, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-34

सलीम को रोजी की कोई भी बात ग़लत नहीं लग रही थी, उलटा वह तो और भी ज्यादा खुश था... उसको इतनी समझदार लड़की के साथ रात बिताने का मौका मिला , इसे सोचकर खुश हो रहा था... उस रात सलीम ने रोजी को भी खूब मजा दिया, वह आक्रामक होने में नहीं बल्कि प्यार से सम्बन्ध बनाने में विश्वाश करता था, रोजी ने महसूस किया की सलीम उसके साथ बेहद अपनत्व भरा व्यवहार कर रहा था... उसने रोजी के फीस भी चुकाई और एक हजार की टिप्स भी दी... रोजी जान गयी की उसकी मुलाक़ात जल्दी ही सलीम से होने वाली है... दोनों जब विदा हुए तो सुबह के ४ बज चुके थे... सलीम ने कालबेल की बैट्री निकाल दी और दरवाजा बंद कर चुपचाप अपने फ्लेट में सो गया... दोपहर ठीक १२ बजे उसकी नींद खुली... उसने दरवाजा खोला तो दूध का पैकेट और अखबार दिखाई दिया... फरहा उसके ठीक सामने यानी की अपने फ्लेट के दरवाजे पर खादी उसे एकटक निहार रही थी... सलीम ने उसकी कोई परवाह नहीं की, लेकिन अपना दरवाजा भी बंद नहीं किया ... दूध और पेपर लेकर वह अन्दर आ गया... फरहा भी उसके पीछे -पीछे आ रही थी, उसने धडाम से दरवाजा बंद कर अपने गुस्से का इजहार किया और बोली-
- क्या मैं जान सकती हूँ की रात भर कहाँ रहे जनाब ?
सलीम- मैं यहीं था, सो रहा था... बेल ख़राब है इसलिए आवाज नहीं आयी होगी....
फरहा- मुझे झूठ पसंद नहीं है... मैं जानती हूँ की गेट पर २ बजे तक लोक लगा था... मैं भी नहीं सोयी थी तब तक... रात में दो बार जाग जागकर भी देखा है... समझे ... सच सच बताओ कहाँ थे ? क्या आज स्कूल नहीं जाना है ?
सलीम- मेरे सर में बहुत दर्द हो रहा है... फ्रेश होने के बाद करें तो कैसा रहेगा ?
फरहा- आराम से फ्रेश हो जाओ... मैं सर दबा दूंगी, दवा लाने जा रही हूँ...नाश्ता भी तैयार करती हूँ मगर ये न समझो की सवाल जवाब से बच जाओगे... जवाब देना ही होगा...
फरहा गुस्से में पाँव पटकती हुयी बाहर निकल गयी और सलीम को सोचों के भंवर में छोड़ गयी... सलीम ने सबसे पहले एक गिलास नींबू पानी पानी पिया, एक हाजमे की गोली खाई और नित्यकर्म से फारिग हो गया... फरहा गर्मागर्म नाश्ता तैयार करके ले आई ... अब तक उसके सर का दर्द काफी हद तक कम हो चुका था... फ़िर भी फरहा ने एक पत्नी की तरह अधिकार दिखाते हुए उसका सर दबाना शुरू कर दिया... सलीम अब तक कहानी गढ़ने में ही लगा था... उसके मन में कई कहानिया उभरीं फ़िर एक सुनाने लगा-
- क्या बताऊँ यार .... बस ऐसा ही मामला है... एक दोस्त मिल गया... काफी दिनों के बाद मिला था, उसीने पार्टी दी, खुशी -खुशी में मैं इतनी पी गया की उसीके घर सो गया.... सुबह आँख खुली ततो भागा...
फरहा- मगर सूचना तो देनी थी, फोन तो उठाना था , मैं यहाँ परेशान हो रही थी...
सलीम- मेरे खयाल से साइलेंस पर रखा था मोबाईल...
फरहा ने एक आह भरते हुए यह जताने की कोशिश की की वह उसकी बात से संतुष्ट है... फ़िर उसने सलीम को अपनी बांहों में भरते हुए कहा-
- तुम क्या जानो मेरे दिल की हालत ... मर्द हो ना इसीलिए इतने बेदर्द हो... मेरे दिल में कितनी कसक हो रही थी... अब तो मैं तुमसे एक पल के लिए भी अलग नहीं हो सकती... यह इश्क बिल्कुल आसान नहीं होता... लोग पहले कहते थे अब जाकर समझ पाई हूँ मैं... सुनो... एक बात बताओगे ?
सलीम- अरे जान, बेवजह घबरा रही हो... ऐसा कुछ नहीं है... मैं तुमसे बहुत मोहब्बत करता हूँ...
फरहा- तुम्हारे बिना इस दुनिया में अब मेरा कौन है... आइन्दा अगर ऐसा कभी किया तो मुझसे बुरा नहीं होगा... कहीं ऐसा तो नहीं की आज की रात मेरी किसी सौतन के साथ बिताकर आए हो... देखो, छिपाना मत... बता देना... मुझे कोई ऐतराज नहीं होगा... तुम्हारी खुशी में ही मेरी खुशी है... मुझसे खूबसूरत कोई दूसरी लड़की तो नहीं मिल गयी... तुम्हें पता है फिट रहने के लिए मैंने एक जिम में पूछ ताछ की है...मैं तुम्हें लुभाने के लिए अब और भी ज्यादा स्मार्ट बन्ना चाहती हूँ... कहो तो बन जाऊं मेंबर ?
सलीम- ये भी कोई पूछने की बात है ? बेफिक्र होकर बनो मेंबर... कितना क्या है मुझे बता देना ...
फरहा ने सलीम के होठों का एक जोरदार चुम्बन लिया, सलीम की भावनाएं भड़कने लगीं... मन में उत्साह पैदा हो गया... उसने फरहा को अपनी तरफ़ खींचकर उसकी गोलाइयों को रगड़ना शुरू कर दिया... फरहा खुश थी... सलीम का मूड भी फ्रेश हो रहा था... वह रात को बीती हुई घटनाओं को याद करने की कोशिश कर रहा था...

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