-अब मैं और तुम एक हो चुके हैं, इस प्यार को कभी कम मत करना... यही प्यार को डोर के सहारे हमको जीवन का सफर तय करना है... मैं तुम्हें अपनी शरीके हयात बनाने की योजना बना चुका हूँ...तुमने अपने परिवारवालों से इसका जिक्र किया की नही ?
फरहा- जब मैंने हाँ करदी है तो और किसीको बीच में लाने की जरूरत नहीं है... तुम अपनी बीवी से पूछलो... ऐसा ना हो की वह बेवजह अड़ंगा डाले... तब तक मैं भी पक्का निर्णय ले लुंगी... वैसे भी अब क्या बच्चा है ? तुम मेरा सब कुछ तो लूट ही चुके हो... मेरे तन और मन पर अपना अधिकार जमा चुके हो... सबसे बड़ा समर्पण होता है... और मैं अपना कुंवारा बदन तुम्हें सौंप चुकी हूँ....
सलीम- मैं उन लोगों में से नहीं हूँ जो सिर्फ़ लड़की का जिस्म हासिल करने के लिए ही प्यार का दिखावा करते हैं... मैं जन्म जन्म तक साथ देने के इरादे से तुम्हें मिला हूँ... मेरा प्यार सच्चा है...
फरहा- मैं भी तुहें दिल से चाहती हूँ... मैं जीवन में कभी भी तुमको शिकायत का मौका नहीं दूंगी... तुहें दिन रात प्यार कर दूंगी... तुम जब भी मुझे हासिल करना चाहोगे मैं सहर्ष तैयार हो जाउंगी... भले ही अभी तक हमने कानूनन निकाह नहीं किया मगर मैं तन और मन से तुम्हारी पत्नी बन चुकी हूँ... जब भी चाहो आजमाकर देख लेना... मैं भी इस तरह की लड़की नहीं हूँ जो सिर्फ़ मर्दों को मूर्ख बनने के इरादे से ही उन्हें जाल में फंसाती हैं...
सलीम- हम दोनों के विचार आपस में बहुत ज्यादा मिलते हैं तभी तो हम लोग एक दूसरे के इतने करीब आ चुके हैं... और देखो लगता भी ऐसे ही है जैसे की वर्षों एक दूसरे के करीब रहे हों...कितना अपनत्व है... इसे सदा ऐसे ही बनाए रखना ...
सलीम- मैं मर भी गया तो भी यह मोहब्बत कम नहीं होगी... अब मैं तुमको अपने आपसे भी ज्यादा प्यार करने लगाहूं... पता नहीं कहाँ से इतना प्यार उमड़ आया है... मैं तो हैरान हूँ... पहले कभी कभार अकेले में महिला की याद तो सताया करती थी लेकिन इतनी बेताबी कभी नहीं देखी गयी...
फरहा- मैं ? मुझे देखिये न... मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था की किसी लड़के के साथ इस तरह जिस्मानी सम्बन्ध बनूंगी... फिल लाइन में संघर्ष करने के बाद भी मैंने कभी कोई समझौता नहीं किया... तब भी यह हाल है ... ऐसा बुरा हाल तो मेरा कभी नहीं हुआ... इस वक्त मेरा पूरा जिस्म अकड़ रहा है... इच्छा हो रही है की तुम इसे ढंग से मसल डालो... आह.... देखो न अब इसका इलाज तुम्हारे ही हाथ में है...
सलीम - यह ऐसा सुख है की जितना बेसब्री का दुःख उठाओगी उतना ही ज्यादा मजा ले पाओगी...
फरहा- ऐसे तो किसी भी क्षण प्राण निकल जायेंगे... क्यातुहें तभी सुख का एहसास होगा... मैं कामोत्तेजना के आगोश में पहुच चुकी हूँ... मुझे अपनालो... मेरे सब दुःख दर्द दूर कर डालो...
सलीम- फ़िक्र मत करो आज मैं तुहें एक नई फ़िल्म दिखाता हूँ, उसेदेखने के बाद तुम्हारी भावनाएं और भी भड़क उठेंगी... तुम मतवाली होकर मोर की तरह नाचने लगोगी... मुझे पुकारोगी , खूब सहलाओगी और मुझमे समाने का प्रयास करोगी... जानती हो हम कितने खुशकिस्मत हैं ? सबको ऐसा प्यार नसीब नहीं होता...
फरहा- मैं इस आग में जलने लगी हूँ... मुझे अब कुछ दिखाई नही दे रहा...
सलीम को उसकी हालत पर तरस आ गया... उसने जल्दी से एक ब्लू फ़िल्म स्टार्ट करदी... इस फ़िल्म का संगीत बेहद उत्तेजक था... फ़िल्म के द्रश्य उससे भी ज्यादा डेंजर... एक गोरी और मोटी विदेशी महिला बिल्कुल नग्न अवस्था में दिख रही थी... एक कुत्ता उसके पास आया और उसके ख़ास अंग को चाटने लगा, इस बार फरहा के साथ-साथ सलीम भी गर्म हो गया... उसका दिमाग भन्नाने लगा... जब कुछ नही सूझा तो कुत्ते की तरह वह भी फरहा के बदन को चूमने लगा... फरहा ने उसका हाथ अपने हाथ में लिया फ़िर उसे अपने यौवन द्वार पर रख दिया... सलीम इशारा पाकर शुरू हो गया... इससे फरहा को थोडी सी राहत मिली... लेकिन यह आंशिक थी...सलीम पूछने लगा-
- कैसा लग रहा है मेरी जान ? गजब की फ़िल्म है ना ? देखो दूसरे लोग कहाँ से कहाँ पहुच गए हैं ?
फरहा- क्या यह सच में भी हुआ होगा , या कैमरा और कम्प्युटर की मदद से ऐसा हो गया है ?
No comments:
Post a Comment