Sunday, August 30, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-37

राजू- तू इतना टेंशन मत ले सलीम, मैं भी तेरे साथ रह रहकर होशियार हो गया हूँ... सब कुछ संभाल लूंगा यार... मैं इस हिसाब से काम करूँगा की फरहा को ज़रा भी भनक नहीं लग पाएगी, लेकिन तुम्हें पूरा भरोसा है की वह फरहा ही है ? कहीं तुम्हें इस तरह न पछताना पड़े जैसे कुत्ता मारकर बंजारा पछताया था...
सलीम - पक्की जांच पड़ताल के लिए ही तो यह सब किया जा रहा है, अगर पता चल जाता तो मैं इतनी मेहनत क्यों करता ? जिस तरह से मैंने अपनी आंखों से देखा , उससे तो यही लग रहा है की बात सच्ची है...
राजू- अच्छा ये बताओ , उस समय तुमने कितनी पी थी ? नशे की हालत में किसी और का फोटो तो नहीं देख लिया ? मैंने सुना है ये बार वाले भी उस्ताद होते हैं, किसी भी मोडल का फोटो दिखाकर ग्राहक के सामने अपना भरोसा बनाते हैं, बाद कोई दूसरी लड़की भेज देते हैं, बहाने बहुत होते हैं... वो लड़की बाहर है... बीमार है... शूटिंग में बिजी है...और भी ऐसे बहुत से कारण.... ग्राहक सोचता है ये नहीं तो दूसरी सही, फ़िर वह किसी और से काम निकाल लेता है... तो हो सकता है यह मामला भी ऐसा हो...
सलीम- फ़िर फोटो ? वो कैसे आए उसके पास ?
राजू- यह सब तो आजकल बहुत आसान है... इंटरनेट से कितनी ही मोडल के फोटो लिए जा सकते हैं...
सलीम - चल ठीक है ... यह बात होगी तो भी सामने आ जायेगी, लेकिन ये बता की कुटी को मारकर बंजारा कैसे रोया था? मुझे ध्यान आ रहा है की मैंने इस कहानी को कहीं न कहीं सुना है... शायद बचपन में किसीसे सुनी थी...थोड़ा सा ध्यान दिला यार ... कैसे है ये कहानी ?
राजू- एक बंजारे के पास एक वफादार कुत्ता था, गरीबी आने पर उसने उसे बेच दिया... कुत्ते को बहुत दुःख हुआ लेकिन वह भारी मन से अपने नए मालिक के पास चला गया... नए मालिक ने उसे एक महत्वपूर्ण पत्र लेकर बंजारेके पास भेजा , अपने कुत्ते को अपने पास देखकर बंजारे ने फौरी तौर पर समझा की कुत्ता नए मालिक के घर से भाग आया है, इसको अपनी तौहीन समझकर उसने गुस्से में आकर कुत्ते की ह्त्या कर दी... बाद में जब उसने कुत्ते के गले में चिट्ठी देखि और पढी तब सारा मामला समझ में आया... मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी... कुत्ता उस दुनिया में पहुच चुका था, जहाँ से कभी लौटकर नहीं आया जा सकता... इसलिए कहता हूँ सलीम,,, जान और भरोसा दोनों एक जैसे होते हैं... अगर एक बार इन दोनों का कत्ल हो गया तो फ़िर ये कभी वापस नहीं आते... इसलिए इस बारे में बहुत सोच विचारकर फ़ैसला करना चाहिए...
सलीम- हाँ यार... बात तो ठीक कह रहा है... लेकिन उसके भरोसे का कत्ल तो जब हुआ ना जब की मेरा संदेह ग़लत साबित हो और उसे भी पता चल जाए की मैं उस पर इस तरह का संदेह कर उसकी जासूसी करा रहा था...यह बात सिर्फ़ तुम्हारे और मी बीच में है... इसके अलावा और किसीको कुछ ख़बर नहीं है... इसलिए बिंदास होकर वैसा करो जैसा मैं कहता हूँ....
राजू- ठीक है... मैं भी इस बात को कभी किसे नहीं कहूंगा,,, साथ ही मालिक से प्रार्थना करूँगा की तेरा संदेह बिल्कुल झूठा साबित हो... बड़ी मुश्किल से तो तुझे तेरा प्यार मिला है, कभी तूने किसी लड़की से इतने करीबी सम्बन्ध नहीं बनाए जितने इससे बन गए हैं... मेरी यही दुआ है की तेरा प्यार सलामत रहे... मेरा दिल जोरों से धड़क रहा है... अब तू तयारी कर ... मैं तुझे जैसे ही एस एम् एस करूँगा तू होटल से नीचे उतरना... तेरे पास पहले से ही कोई निजी कार रहेगी ... जब हम दोनों नीचे उतरें तो तू मुझे मत पहचानना , मैं भी तुझे नहीं पह्चानुगा... फ़िर तू उसे लेकर चले जाना...
सलीम- ठीक है राजू.... मैं तेरा यह एहसान कभी नहीं भूल पाऊंगा,,,
राजू- बस क्या सलीम , पहले इज्जत देता है और फ़िर गाली से बात करता है ... मुझे अपना काम करने दे....
सलीम की निगाहों में चंचल, शोख हसीना फरहा का चेहरा घ्प्प्मने लगा ... उसने कितनी क़समें खाईं थीं, कितने वायदे किए थे... वह उन सबको भूल गयी... जिसे उसने देवी समझा था, वह इतनी गिरी हुई निकली... काश , वह अगर पहले ही उस बार में गया होता तो यह नौबत नहीं आती... उसने लाखों खर्च करके फरहा को सुख सुविधाएं मुहैया कराई थीं.... अगर इसका एक हिस्सा भी वह अपने बीवी बच्चों के लिए करता तो वे बहुत खुश होते....









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