Wednesday, August 26, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-33

सलीम- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, मैं तो कुछ अलग ही सोच रहा था... मैं ये जानना चाहता था की महीने भर में तुम्हारे पढाई का कुल खर्च कितना आता है ?
रोजी- आता तो ज्यादा है , मगर किसी भी हालत में कम से दस हजार की जरूरत होती है...
सलीम- यानी की अगर तुम्हारे पास महीने में दस हजार रुपये आ जाएँ तो तुम ये काम छोड़ सकती हो ?
रोजी- छोड़ सकती हूँ , मतलब ? अरे मैं कोई पेशेवर वैश्या थोड़े ही हूँ... जब तक जरूरत है तभी तक ये सब करना है , उसके बाद तो किसीकी तरफ़ नजर उठाकर भी नहीं देखना... मैं एक डॉक्टर की बेटी हूँ ... काश वे आज हमारे साथ होते ... या फ़िर उन्होंने दूसरीshaadee नहीं की होती.... काश......... लेकिन अब क्या हो सकता है ?
सलीम विचारों में गम हो गया... वह अपने बच्चों के बारे में सोचने लगा... अगर वह फरहा से दूसरी शादी कर लेता है तो उसकी बेटी की हालत भी रोजी जैसी हो सकती है... वह दुखी हो गया... उसका सर चकराने लगा...उसे अपने एक सीनियर मित्र की बातें याद आने लगीं... उसका मित्र तो अपनी एक शादी से भी परेशान था... वह हमेशा कहता था की होशियार आदमी को कभी भी भी शादी नहीं करनी चाहिए, इसके बदले मनपसंद लड़की के साथ सिर्फ़ समझौता करना चाहिए, खाओ-पीओ अपनी फीस लो और अपने घर जाओ... मगर शादी के बाद अच्छा भला आदमी भी औरत का गुलाम बन जाता है... लेकिन सलीम इन विचारों से सहमत नहीं था... वह जिम्मेदारी को भुई महत्वपूर्ण समझता था... आज उसकी समझ में आया की उसका दोस्त कितना सवः बोलता था... अब उसने फरहा के साथ शादी करने का विचार त्याग दिया और रोजी के साथ एक समझौते की उम्मीद करने लगा...

उसने बाकायदा रोजी से पूछ भी लिया-

- क्या मेरे साथ जुड़ना चाहोगी ? ऐसे रोजाना रात-रात भर जागने से तुम्हारी सेहत पर भी असर पड़ता होगा और पढाई पर भी... मेरे एक दोस्त कहते थे की शादी से अच्छा समझौता होता है... समझौते से तुम आराम से सो सकोगी... तुम्हें हर महीने दस हजार रुपये मैं दूंगा... बोलो मंजूर है ?

रोजी- मुझे सोचने का वक्त दीजिये ... अपनी शर्तें भी बता दीजिये ... यानी की मुझे आप दस हजार रुपये महीने क्यों देना चाहते हैं ? जबकि अआप तो एक टीचर हैं और मैं जानती हूँ की टीचर की पेमेंट इतनी ज्यादा नहीं होती...

सलीम- मैं भी तुम्हारे साथ हमबिस्तर होने की कीमत ही दे रहा हूँ... फर्क इतना है की मैं तुम्हारी मर्जी के मुताबिक ही सम्बन्ध बनाऊंगा, जब तुम्हारे पास टाइम नहीं होगा तो जिद नहीं करूंगा... एक तरह से तुम मेरी पत्नी ही रहोगी मगर शर्तों के साथ... जब भी तुम चाहो अपनी पसंद की शादी कर सकती हो मुझे कोई ऐतराज नहीं होगा...

रोजी - ठीक है , मैं इन शर्तों पर विचार करती हूँ... मगर ये मैं जान चुकी हूँ की तुम बहुत दयालु हो... तुम जैसे नेकदिल इंसान से दोस्ती करके मुझे खुशी और गर्व का अनुभव होगा॥

सलीम- बाकी महिलायें तो मर्दों की सताई हुई होती हैं मगर ,मैं मेरी महिलाओं का सताया हुआ हूँ...मैं जब उसके साथ हमबिस्तर होता हूँ तो मेरी पत्नी का मूड बदलता रहता है, वह मुझे खुश नहीं कर पाती...

roji - सेक्स के मामले में अगर आप अपनी पार्टनर के बदलते मूड से कंफ्यूज हैं, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके पीछे क
ई कारण हो सकते है... . जानते हैं, क्या हैं ,पुरुषों का मानना है कि महिलाएं बेहद राजदार होती हैंउनकी सेक्स ड्राइव को लेकर भी वे कुछ ऐसा ही सोचतेहैं...कई बार वे उन्हें सिडक्टिव लगती हैं, तो ऐसे मौके भी आते हैं जब वे क्लोज आने में दिलचस्पी नहीं दिखातीं। दरअसल, इसके पीछे कई कारण होते हैं और अपनी परेशानी दूर करने के लिए आपको उन कारणों को दूर करना ही होगा। मूड न होना हायपोएक्टिव सेक्सुअल डिजायर डिसऑर्डर के केसेज महिलाओं में बहुत ज्यादा देखने में आते हैं। यह बात यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में 18 से 59 साल की महिलाओं पर की गई एक स्टडी से साबित हुई। इस डिसऑर्डर से ग्रस्त व्यक्ति को सेक्स में ज्यादा दिलचस्पी नहीं होती। इस डिसऑर्डर की प्राइमरी स्टेज में महिला को सेक्स की इच्छा ही नहीं होती, जबकि सेकंडरी स्टेज में उसकी पहली वाली दिलचस्पी खत्म हो जाती है। कंडिशन के बिगड़ने पर वह सेक्स से दूर भागने लगती है। इस डिसऑर्डर की वजहें कम्यूनिकेशन प्रॉब्लम, लड़ाई, प्यार का न मिलना, अकेलापन वगैरह हो सकती है...अब इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है की मैं तुम पर आरोप लगा रही हूँ... यह सामने वाली महिला की समझ पर भी निर्भर करता है...

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