Saturday, August 22, 2009

दिलफेंक पडोसन, भाग-30

आख़िर बुराई भी क्या थी, इससे फरहा की समझ में भी यह बात आ जायेगी की वह सिर्फ़ उसीका गुलाम नहीं है... फरहा शायद इस गलतफहमी की शिकार है की उसके बिना वह सचमुच एक पल भी नहीं रह पायेगा... इसी बहाने वह अपने सब्र और फरहा के प्रेम की परिक्षा भी ले लेगा... वह सावली के आने का इन्तजार करने लगा... मगर जब वह काफी देर तक भी नहीं आयी तो आखिरकार उसने पीने का और ऑर्डर दे दिया ... एक तो वह पहले भी पिया हुआ था , इसके बाद पीने से उसको चक्कर से आने लगे... वह सोचने लगा की सावली को अगर देर हो रही है तो वह किसी और भी हसीना को किराए पर ले सकता है, वहां तो हुस्न का बाजार सजा हुआ था, वहां किस बात की कमी थी... और फ़िर अवही हुआ जिसकी उसे आशा थी, सावले कमर मटकाती हुयी, कातिल अदाएं दिखाती हुई सामने से चली आ रही थी...उसे खुशी हुई, सावली जब उसके करीब आकर बैठी तो उसने कहा-
-अचानक कहाँ चली गयी थीं, गयीं क्या तुम तो गायब ही हो गयीं... मेरा मन नहीं लग रहा था...
सावली- अच्छा , अगर ये बात थीं तो पहले बताया होता मैं कहीं भी नहीं जाती... तुम्हारे पास ही बैठी रहती...
सलीम- लेकिन कहाँ चली गयीं थीं इतनी देर क ऐ लिए ? सब कुछ सूना -सूना लग रहा था...
सावली- कस्टमर को अटेंड करने गयी थी, पुराना कस्टमर है... जिस दिन ज्यादा पी लेता है, उस दिन बहुत धमाल करता है... यहाँ स्टाफ को भी गाली -गलौच करता है, यहाँ तक की सब सामान को उलट-पुलट करने लगता है तब मुझे जाना पड़ता है , उसे संभालने के लिए... मेरी बात मान लेता है...लेकिन मैं यहाँ से सबको लेकर थोड़े ही गयी थी, बाकी सब लोग तो यहाँ पर मौजूद थे ही, देखो कितनी नयी -नयी और खूबसूरत लड़कियां हैं... किसीको भी बुला सकते थे... वो देखो लाल कपडों वाली तुम्हें देखकर कैसी मुस्करा रही है...
सलीम- सारे जहाँ को मुस्कराने दो , क्या फर्क पड़ता है... जब तक तुम नहीं मुस्कराओगी, इस दिल का सूनापन दूर नहीं होगा, सच तो ये है की मैं आज तुमसे जी भरके बात करना चाहता हूँ...रात भर देखते रहना चाहता हूँ इस चाँद से सुंदर चेहरे को... बोलो, मंजूर है ?
सावली- अगर चाँद इतना ही सुंदर है तो आराम से छत पर बैठकर देखते रहो चाँद... इसका कोई खर्च भी नहीं आएगा और तुम्हारा दिल भी बहल जाएगा, मुझे ऐसा लगता है जैसे की हसीना की तिरछी निगाहों के मारे हुए हो, वह नाराज हो गयी है या उसने किसी और से शादी करली है ?
सलीम- इन दोनों बातों में से कुछ भी सच नहीं है, सच बस इतना है की हमें आपसे मोहब्बत हो गयी है और हम एक रात आपके साथ बिताना चाहते हैं, अगर मंजूर है तो दाम बताओ और नहीं तो हम कुछ और सोचें...
सावली- मैं आज तुम्हारा साथ नहीं दे पाउंगी, किसी और से बात करा सकती हूँ... इनमे से जो भी खूबसूरत लड़की दिख रही है , उसीको भेज दूंगी तुम्हारे साथ, लेकिन मैं आज मजबूर हूँ... चार दिन के बाद आना तब मैं इस लायक हो जाउंगी, समझ गए की नहीं ... निरे बुद्धू नजर आते हो...
सलीम- कोई अच्छी सी लड़की यहाँ नजर ही नहीं आती, यहाँ तो सब फालतू दिख रही हैं...
सावली- क्या बजट है तुम्हारा ?फ़िर मैं तुम्हें इसी तरह की लड़की दिखाउंगी... अरे ऐसा माल दिखाउंगी की तुम्हारी तबियत खुश हो जायेगी... एकदम कोरा मॉल चाहिए तो वो भी मिलेगा...
सलीम- एकदम कोरे की क्या गारंटी है ? कितना माल चाहिए उसके लिए ?
सावली- माल की गारंटी मैं लेती हूँ... दाम की तुम लो, मैं नहीं जानती की तुम्हारा बजट क्या है ? मुझे बस इतना पता है की तुम एक अदद हसीना के साथ रात रंगीन करना चाहते हो...
सलीम- दो हजार तक खर्च कर सकता हूँ ... माल दिखाइये...
सावली- इतने रुपये तो उसे देखने में ही लग जायेंगे ... अरे मस्त मोडल से मुलाक़ात कराउंगी.... फ़िल्म की हीरों इन उसके सामने चिंदी लगेगी समझे... एक रात के बीस हजार लेगी... एक बार करना हो तो पाँच हजार , सिर्फ़ आधे घंटे के लिए... थ्री स्टार होटल से नीचे बुक मत कराना , वैसे तो वह फाइव स्टार होटल में ही जाती है, मेरे कहने से थ्री में जा सकती है....
सलीम- कहाँ है वो ? क्या मैं अभी उससे मिल सकता हूँ ?

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