फरहा- सुनाने में तो वह खूब माहिर है... जमकर सुनती है... और तो और कुछ झूठ का तड़का भी लगाती है, एक बार अगर उसकी जुबान खुली तो फ़िर रुकने का नाम नहीं लेती... अगर तुम उसके साथ सोना भी चाहो तो उसे कोई आपत्ति नहीं , बस मेरी सहमती होनी चाहिए... अगर मैंने इतना भर कह दिया की चलो जाओ , इस्नके साथ हमबिस्तर हो जाओ... बहुत मरता है तुम पर... वरना बेचारे का दिल टूट जाएगा , तो इतनी सी बात पर भावुक हो जायेगी और तुम्हें खूब सुख देगी...
सलीम- मेरे लिए तो तुम ही काफी हो, मुझे शारीरिक सुख की क्या कमी है ? सिर्फ़ जिस्न्मानी सम्बन्ध ही मेरे लिए ज्यादा मायने नहीं रखते , मेरे ख़याल में इसके लिए आपसी मोहब्बत भी जरूरी है... अगर प्यार नहीं तो शारीरिक सम्बन्ध बोझ बन जाते हैं, अभिशाप बन जाते हैं... वह सम्बन्ध बलात्कार की तरह होता है... प्यार एक जूनून है, बीमारी है सेक्स सकी दवा... इस बात को कई विदेशी हस्तियों ने भी साबित किया है...डॉक्टरों ने मान लिया है कि प्यार एक बीमारी
है और इसका इलाज सेक्स है...यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल की डॉ. लेसेल डॉसन ने एक रिसर्च के आधार पर यह नतीजा निकाला है...उनका कहना है कि प्यार नामक यह बीमारी तब ज़्यादा महसूस होती है जब लोगों को अपना प्यार ज़ाहिर करने का मौका नहीं miltaa ... इसकी वजह से गुस्सा, फ्रस्ट्रेशन और यहां तक कि मानसिक रोग भी हो सकते हैं...डॉ. डॉसन के मुताबिक एक अमीर आदमी को एक नौकर से प्यार हो गया, लेकिन उन्हें यह प्यार ज़ाहिर करने की इजाज़त नहीं थी, तो लव सिकनेस साफ नज़र ...डॉ. डॉसन के नतीजे एक किताब में छपे हैं, जिसका नाम है - लव सिकनेस ऐंड जेंडर इन अर्ली मॉडर्न इंग्लिश ....डॉ. डॉसन ने कहा कि सेक्स के ज़रिए प्यार करने वालों के शरीर से नुकसानदायक तत्व बाहर निकल जाते हैं यही नुकसानदायक तत्व बीमारियों की वजह बनते हैं...
फरहा- तुहें ये सब बातें कहाँ से सीखने को मिलती हैं... ये सब तथ्यपरक बातें होती हैं...
सलीम- अखबार और मैगजीन में ये सब बात लिखी हुई होती हैं... मैं गौर करता रहता हूँ... वैसे भी टीचर हूँ तो जानकारी के हिसाब से भी ध्यान रखना पड़ता है... तो कब मिलवा रही हो राजो से ?
फरहा- जब चाहो तब, वह भी यहीं रहती है, मगर सोच लेना उसका पति पहलवान है...
सलीम- पहलवान ? तो क्या हुआ ? मुझे थोड़े ही उससे कुश्ती लड़नी है ? राजो से मिलेंगे और बस , वह अपने घर... हम अपने घर... क्या उसका पति हर आदमी से लड़ता रहता है...
फरहा- हर आदमी से तो नहीं लेकिन अगर उसे पता चला की राजो और तुम कुछ अलग ही गुल खिला रहे हो तो तुम दोनों की ही खैर नहीं... बहुत ताकतवर है... मैंने उसे कुश्ती करते हुए देखा है...
सलीम- ठीक है, फ़िर मुझे डरा समझो... मैंने नहीं मिलना ... पहले जान उसके बाद जहाँ,... ठीक है ?
फरहा- अरे वाह ... डरपोक कहीं के... इतनी जल्दी हवा खुश्क हो गयी... मैं तो ऐसे ही कह रही थी... चलो मिलवा देती हूँ किसी दिन... लेकिन ऐसा ना हो की उससे मिलकर तुम मुझे ही भूल जाओ...
सलीम- नहीं यार... ऐसा कैसे हो सकता है... तुम तो मेरी जान हो, जिन्दगी हो ... जीने का मकसद हो... तुम हो तो सब कुछ है और तुम नहीं तो कुछ भी नहीं... ऐसी ना जाने कितनी फरहा ई और आएँगी मगर तुम्हारा स्थान कोई नहीं ले सकती... तुम स्पेशल हो यार... आओ॥ पहले मैं तुम्हें थोडा सा प्यार देदूं... बहुत देर से तरस रही हो ...
फरहा- सिर्फ़ मैं ही नहीं तड़प तो तुम भी रहे हो... तुम्हारी आंखों में जो लाल -लाल डोरे तैर रहे हैं... वे सारी कहानी बयान कर रहे हैंं... इनको लोग वासना के धागे बोलते हैं ... ये एक तरह से मर्दों की उत्तेजना को मापने वाले मीटर होते हैं... इनसे फ़ौरन पता चल जाता है की आपके मन में क्या -क्या चल रहा है ?
सलीम- अच्छा जी... लगता है तुम्हारी सहेली राजो ने तुम्हें बहुत कुछ ट्रेनिंग दे दी है...कभी मिलेंगे तो हम भी उसे अपना गुरु बनायेंगे, हम भी कुछ टिप्स सीखना चाहेंगे...
फरहा- कुछ क्यों , सब कुछ सीखिए ना... मना किसने किया है ? मैं चिढ़ने वाली या डरने वाली नहीं हूँ... अगर तुम्हारी इच्छा हो रही है तो कल उसे यहाँ बुला लुंगी... फ़िर भले ही रात भर उसके साथ मौज लेना मुझे कोई एतराज नहीं... और हाँ, वह भी मेरा कहना मान जायेगी...
सलीम- अगर इसके बदले वह तुहें भी अपने पति के साथ सुलाने लगी तो ?
फरहा- तो क्या ? सो जाउंगी मैं भी...क्या फर्ज पड़ता है ? वह मेरी ख़ास दोस्त है... जब वह मेरे लिए इतना कर सकती है तो मैं क्यों नहीं कर सकती?
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