कई बार बच्चे के जन्म को आसान बनाने के लिए डिलिवरी के वक्त एप्सिटॉमी नाम की छोटी सी सर्जरी की जाती है... यह एक छोटा सा ऑपरेशन है, जिसके तहत बच्चे को आसानी से बाहर निकालने के लिए वैजाइना को थोड़ा बड़ा किया जाता है.... कई बार इस ऑपरेशन की वजह से इंटरकोर्स करते वक्त परेशानी या दर्द होता है... हालांकि अगर आप सावधानी बरतें, तो 6 से 8 हफ्ते में इस सर्जरी का असर खत्म हो जाता है और वैजाइना अपनी पुरानी शेप में लौट आती है,
सलीम- सच , अरे यार तुम तो डॉक्टर लगती हो... क्या तुम्हें ये ज्ञान ऐसे ही हो गया या फ़िर पढने -लिखने से ?
रोजी- मेरे पिता डॉक्टर थे... उनकी मौत हो गयी... मेरी सौतेली माँ ने सब संपत्ति अपने नाम करली... इसी कारण मुझे इस लाइन में आना पडा... अब मैं पढ़ती हूँ, और अपना खर्च निकालने के लिए कभी कभार किसीके साथ रात गुजार लेती हूँ... और तुमने सही पहचाना , मैं डॉक्टरी की पढाई कर रही हूँ...
सलीम- ओह , मैं तुम्हारी नोलेज पहचान गया था, जीवन जीने के लिए हम लोगों को कितने समझौते करने पड़ते हैं... मैं तुमसे बार- बार मिलना चाहूँगा...
रोजी- ठीक है मगर मेरा कांट्रेक्ट इसी बार के साथ है, इसलिए मैं इसी माध्यम से मिल सकती हूँ... पूरा सुख देने की गारंटी मेरी है और इस बात को गुप्त रखने की जिम्मेदारी आपकी भी है...
सलीम- मैं जबान का सच्चा हूँ और इस बात में यकीन करता हूँ की की हाथ का सच्चा और लंगोटी का पक्का आदमी कभी मार नहीं खा सकता... पहले मैं भी लंगोटी का खूब पक्का था , मेरे साथी मेरा उदाहरण दिया करते थे मगर सब गुड गोबर हो गया... अब तो यही है की जहाँ पर भी तुम जैसी कमसिन हसीना देखता हूँ वहीं पर फिसल जाता हूँ, मेरी बड़ी अजीब हालत हो गयी है... बेवजह इस बार में चला आया...
रोजी- ऐसी हरकतें अचानक से नहीं आ सकतीं... जरूर इसके पीछे कोई बड़ा कारण रहा होगा ...
सलीम- क्या बताऊँ यार... है भी और नहीं भी... क्या बताऊँ , क्या छिपाऊँ .... कुछ समझ में नहीं आता...
रोजी- जब कभी ऐसी स्थिति से गुजरो तो थोडी देर के लिए खामोश हो जाना चाहिए... वरना... नुक्सान अपने को ही होता है...
सलीम- तुम तो अन्तर्यामी लगती हो... एक पैग पीते हैं, ज़रा मैं ठीक से समझने लगूंगा...
रोजी- क्षमा चाहती हूँ , मैं शराब नहीं पीती... मुझे तो रोटी का ही बहुत नशा हो जाता है... आज तक मैंने कभी नहीं पी... हाँ, अगर तुम पीना चाहो तो मुझे कोई ऐतराज भी नहीं है... मैं खूब प्यार से सर्व करुँगी...
सलीम- तुम बहुत अच्छी हो, होशियार भी... तुम्हारी मुस्कान बड़ी कातिल है... अंग -प्रत्यंग हसीं है...
रोजी- तुम शायद बहक रहे हो, इसलिए इस जिस्म और हुस्न की तारीफ़ कर रहे हो, हमारे पास तुम्हें कभी असली सुख नहीं मिलेगा... सुकून तो पत्नी के पास ही मिलता है, वहाँ पर अगर इससे आधा प्यार भी न्यौछावर करोगे तो कई हजार गुना सुख पाओगे... खूब संतुष्टि मिलेगी...
रोजी की बातें उसे बहुत अच्छी लग रही थीं... हकीकत तो वह भी जानता था, उसने भी सुन रखा था की वैश्या के घर जाने से कभी किसीकी मुश्किल आसान नहीं हो सकतीं... इससे तो उलटा नाश होता है... उसने बहुत लोगों से सुन रखा था की शबाब और शराब ने अच्छों अच्छों की आसमान से समुन्दर में लाकर पटक दिया ,, मगर जिसको इश्क नचाये यार , फ़िर वो नाचे बीच बाजार ... वह रोजी को हैरत भरी नजरों से देख रहा था, उसको अपनी पडोसन और प्रेमिका फरहा से नफरत हो रही थी... रोजी ने उसको टोका-
- मेरी बात अच्छी नहीं लग रहीं ? मैं जानती थी... मेरे साथ यही होता है... जब मैं अपने ग्राहक को अच्छी सलाह देती हूँ तो उसे बहुत बुरा लगता है... कितनी बार तो मुझे टिप्स से भी हाथ धोना पडा है, अगली बार वह ग्राहक फ़िर मेरे पास नहीं आता... तुम भी आने वाले नहीं हो...
Tuesday, August 25, 2009
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