Wednesday, December 31, 2008

रंगीला रतन,भाग-63

शारीक- अब थोड़ा तो करना ही पड़ता है... सुना तो यहाँ तक है की जब तक लड़कियों की तारीफ़ न करो तब तक उसका खाना भी हजम नहीं होता... इसीलिए ज़रा सा मस्का लगा रहा था... वैसे इसमे कोई झूठ भी नहीं है.... मैंने कभी नहीं सुना की किसी लड़की ने अपने पूर्व के अन्तरंग संबंधों को कभी स्वीकारा हो... तुम पहली और मेरे ख़याल से आखिरी हो... इसके लिए भी तो कलेजा होना चाहिए, मैं तुम्हारे हौंसले की दाद देता हूँ...
रंजना- यह सुनकर तुम्हें बुरा नहीं लग रहा है ?
शारीक- जी नहीं, बिल्कुल नहीं... मैं तो यह सोचकर खुश हूँ की मुझे ऐसी प्रेमिका मिली है जो हर बात को खुले दिल से मानती है... मैं ऐसे लोगों से ज्यादा ताल्लुकात नहीं रख सकता मन में कुछ और होता है, कहते कुछ अलग ही हैं... मैं ऐसे लोगों से ज्यादा नहीं घुल -मिल सकता... सच तो ये है की चाह कर भी मैं ऐसे लोगों को अपना मित्र नहीं बना सकता जिनकी कथनी और करनी में अन्तर होता है...
रंजना- सुनकर अच्छा लगा, अब समझी की एक विचारधारा के लोग किस तरह मिल जाते हैं,... दुनिया में करोड़ों लड़कियां हैं, लड़के हैं मगर तुम्हारा और हमारा मिलन ये बताता है की हम दोनों के विचार भी काफी मिलते-जुलते हैं... तन और मन तो मिल ही चुके हैं , मगर इसके पीछे हमारी आत्माओं का पूर्व मिलन है...
शारीक- अब रमेश से कभी मुलाक़ात होती है की नहीं ?
रंजना- नहीं, अब वह किसी से मुलाक़ात के लायक ही नहीं रहा... उसको एड्स की बीमारी लग चुकी है...
शारीक -ओह, तो ? क्या मर गया ? या अभी तक साँसें चल रही हैं... ?
रंजना- जिसको यह बीमारी एक बार लग गयी फ़िर वह मरने से भी बदतर स्थिति में हो जाता है... यह सबसे खतरनाक बीमारी है... लोग जिस नर्क का जिक्र करते हैं ,यह उसी का दूसरा नाम है...
रंजना अपनी हियो धुन में कहती जा रही थी और शारीक का मारे डर के बुरा हाल था... ऐ सी की ठंडी
हवा में भी उसको पसीने आ रहे थे... उसने नहीं सोचा था की उसके साथ एसा हादसाभी हो सकता है... शारीक यह सोच-सोच हलकान हो रहा था की जिस रमेश के साथ रंजना ने अवैध सम्बन्ध बनाये थे, उसीको एड्स हो गया है, उसके दिमाग में तेजी से यह सवाल कौंधा- तो क्या रानाजना भी इस बीमारी की चपेट में आ गयी होगी ? कहीं ऐसा तो नहीं की अब वह भी... ? नहीं--नहीं... ऐसा कैसे हो सकता है ? वह उस पल को कोस रहा था जब उसने बिना कंडोम के ही रंजना के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बाए थे... उसको परेशान देख रंजना ने पुछा-
- क्या सोच रहे हो ? इतना अच्छा रोमांटिक मूड हो रहा था तुमने व्यर्थ ही क्या सोचना शुरू कर दिया ?
शारीक - मैं सोच रहा हूँ की हमको बचाव का इस्तेमाल करना चाहिए था... यह बीमारी संसर्ग से ही होती है न ?
रंजना- अच्छा, अब समझ गयी तुम्हारी चिंता का कारण ... मैं बिल्कुल फिट हूँ, तुम टेंशन मत लो... जब तक रमेश मेरे संपर्क में था तब उसको कोई बीमारी नहीं थी... मुझसे संपर्क तोड़ने के बाद वह बुरी तरह बिगड़ गया... वह ग़लत महिलाओं के संपर्क में आया और एड्स का शिकार हो गया... मैंने सुना है की शायद वह मर भी चुका है... उसने मुझे धोखा दिया, मेरा दिल तोडा , पहले प्यार किया फ़िर बेवफाई की... उसीने मुझे पीने के की आदत दी ... उसीने रात-रात को इस तरह भटकना सिखा दिया...

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