Wednesday, December 17, 2008

रंगीला रतन, भाग-५१

अब तो दिल बेचैन है... धड़कनें बढती जा रही हैं... मिलने की जो तमना है, उसको जब्त नहीं कर पा रहा ? वैसे आपकी उम्र क्या होगी? मैं ऐसे ही अपनी जानकारी के लिए पूछ रहा हूँ... नाराज मत होना...
रंजना- नहीं शारिक , इसमें नाराजगी की क्या बात है ? मैं तो खुश हूँ इस बात से ... तुम इतनी दिलचस्पी ले रहे हो , क्या यह कम है ? अच्छा अपने बारे में कुछ बताओ... क्या पढाई के अलावा भी कुछ करते हो ? मेरा मतलब ,प्यार मोहब्बत से है... कोई लड़की -विद्की है क्या ?
शारिक -आज के जमाने में अच्छी लडकियां मिलती कहाँ हैं? सब तो सिर्फ़ मतलबी ही होती हैं...
रंजना- इसका मतलब चोट खाए हुए लगते हो ... दिल लगाकर पछतावा तो नहीं हो रहा ?
शारिक- ज्यादा तो नहीं, बस थोड़ा बहुत ...
रंजना- फ़िर तुम्हारी -हमारी खूब जोड़ी जमेगी...जरूर हमारा मिलन रंग लाएगा... तुम मालिश भी करते रहना और बातचीत भी करते रहना... मुझे तुम जैसे ladke बहुत पसंद हैं... इसी कारण तो मैंने अखबार का सहारा लिया है... बस इतनी सी प्रार्थना है की मेरे सिवाय किसी और टोपिक पर कभी बात मत करना... जानकारी करने की कोशिश भी मत करना...
शारिक- क्या प्यार - मोहब्बत की तरफ़ इशारा है ?
रंजना- उसकी कोई परेशानी नही... उस प्रकार की बातों से नहीं,परहेज इस बात से है की ये न पूछना की मैं कहाँ रहती हूँ, क्या करती हूँ , कौन हूँ... सिर्फ़ इतना ही काफी होना चाहिए की मुलाक़ात के बाद अगर हमने तुम्हें मालिश के लिए चुन लिया तो मेरे जिस्म से ही ताल्लुक रखना पड़ेगा... बात जितनी कम और मोहब्बत जितनी ज्यादा होगी, उतना ही ठीक रहेगा...
शारिक- वादा रहा ... मैं अपनी तरफ़ से कभी कोई ऐसी बात नहीं करूँगा जो तुम्हें बुरी लगे... मुझे पेमेंट की भी जरूरत नहीं है... मैं मुफ्त में सेवा करने का इच्छुक हूँ....
रंजना- ओह, ऐसी बात है... मगर ये कैसे हो सकता है ? तुम्हारा मेहनताना तो तुम्हें स्वीकार करना ही पडेगा...
शारिक - दुनिया में दौलत ही सब कुछ नहीं होती ... मोहब्बत भी मायने रखती है... अगर प्यार मिल गया तो और फ़िर क्या बचता है ? मैं तो प्यार को देखते ही सर झुका देता हूँ...
रंजना- बहुत दिलचस्प बातें करते हो .... लगता है मुलाक़ात का समय बदलना पड़ेगा...
शारिक - खूब आनंद आएगा... चलो, चलते हैं... आज ही मिलते हैं....
रंजना - इतनी बेचैनी भी ठीक नहीं है ... मैं अभी -अभी सोकर जगी हूँ...
शारिक- अब तो तड़प सी महसूस हो रही है....
रंजना- इतना तड़पना भी ठीक नहीं है.... अभी से ही इतने उतावले हो तो आगे क्या होगा ?
शारिक- तुम्हारी बातों ने दिल में खलबली सी मचा दी है... अब जुदाई सहन नहीं होती.... आह,
रंजना-- शरारती लड़के, मुझे उत्तेजित कर रहे हो ?
शारिक- शाम की बजाय मिलने का समय दोपहर में रखो न ? प्लीज।


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