शारिक का मन सान् हो गया... रंजना के होठों का रसास्वादन करते ही वह दीवाना हो गया ... तूफ़ान के भंवर में फंसा शारिक अब रंजना से कह रहा था-
-यह मुझे क्या हो गया है ?अब मालिश नहीं कर सकता , अब तो मन में कुछ अलग ही तरंगें उठ रही हैं... ये कैसा दीवानापन है, ये कैसा सुख है , क्या इसी को लूटने के लिए सब बेताब रहते है,मैं अकेले में हमेशा यही सोचता था की आखिरकार लोग लड़कियों पर इतने पागल क्यों होते हैं ? उन्हें देखते ही हमारे दिल में घंटियाँ क्यों बजने लगती हैं , दिल बेताब क्यों होने लगता है , अब जाकर इस राज का पता चला है... ओह, मुझमे समा जाओ ....
रंजना- तुम खुश तो मैं भी खुश... मुझे ये एहसास होने लगा था की जरूर कुछ गड़बड़ है, तुम्हारे चेहरे पर अजीब से भाव सब कुछ बयान कर रहे थे... तब मैंने निर्णय लिया की तुम्हें खुश किया जायेगा... तुम्हारे दिल को दुखी होते हुए मैं नहीं देख सकती... शायद इसीको प्यार कहते हैं... मैं भी तुमसे प्रेम करने लगी हूँ...
शारिक- तुमने तो मेरे मन की बात छीन ली... बस मैं भी यही कहने वाला था... मैं तुम्हारे इश्क में ऐसा गिरफ्तार हुआ हूँ की कह नहीं सकता... मेरे पास शब्द तो शब्द कहने की क्षमता भी नहीं है ...सोचता हूँ की किस तरह करुँ मोहब्बत का इजहार ... तभी तुमने कह डाला मेरा काम हो गया...
रंजना- दिल से दिल की राह होती है... मैं सब कुछ समझ गयी हूँ... यूं समझो की मेरे दिल से तुम्हारे दिल का कनेक्शन जुड़ चुका है... अब हम सिर्फ़ कहने भर के लिए ही अलग -अलग हैं...
शारिक- सच ? सच कह रही हो तुम ? मुझे यकीन नहीं आता ....ऐसा कैसे हो सकता है... या तो मैं सपना देख रहा हूँ... या फ़िर मुझ पर पागलपन सवार हो गया है... इन दोनों बातों के अलावा और कुछ हो ही नहीं सकता ... अचानक मैं तुमसे मिलता हूँ, कुछ पल साथ में बिताते हैं और प्यार हो जाता है... सब कुछ फिल्मी इस्टाइल में, वो भी उस स्थिति में, जबकि मैंने तुम्हारा चेहरा तक नहीं देखा... पहले तो तुमने में नकाब में चेहरा छूपा रखा था , अब हलकी रोशनी में कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा है...
रंजना- जो कुछ होता है , इस दिल से होता है, चेहरे की ज्यादा अहमियत नहीं होती... तुम्हें मालूम है, लैला का रंग काला था जिस पर मजनू जी जान न्यौछावर करता था... भगवान् श्री कृष्ण का कलर भी तो काला था, जिनकी दुनिया दीवानी है... तो मेरे कहने का अर्थ है की रंग से कुछ नही होता ... अच्छा ये बताओ की मेरा भी रंग अगर काला हुआ तो तुम क्या करोगे ? क्या तुम्हारी मोहब्बत में कुछ कमी आ जायेगी ?
शारीक - सवाल ही नही उठता, बल्कि प्यार और बढ़ जायेगा...
रंजना- फ़िर चेहरा देखने के लिए क्यों बेताब हो ?
शारीक- कमाल है, लोग चाँद पर जाकर करीब से देख रहे हैं और मैं अपनी चाँद सी महबूबा को भी नहीं देख सकता... यह तो सरासर जुल्म है हम पर...
Sunday, December 28, 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment