Wednesday, December 3, 2008

रंगीला रतन-भाग-37

रंजना - मन के अन्दर इतना डर बैठ गया है की अपनी खुशियाँ छिनने का गम अक्सर सताता रहता है... दुःख की कोई एक परछाई भी जीवन भर परेशान करने के लिए लिए काफी होती है... इसीलिए तो कहती हूँ, जब भी कोई सुख मिले, उसको हमेशा के लिए आत्मसात कर लेना चाहिए.... रमेश की बेवफाई ने मुझे डरपोक बना डाला है... इतनी बड़ी डरपोक की रस्सी को भी सांप समझ लेती हूँ....
रवि- हर इंसान एक जैसा नहीं होता... तुम्हें अपने मन में बसी दहशत को हर हाल में निकालना ही होगा... वरना जीवन भर फ़िर किसी पर भरोसा नहीं कर पाओगी... रमेश ने तुम्हारे साथ जो जुल्म किया है , भगवान् उसको कभी माफ़ नहीं कर सकता ... कहावत है की विष दे दो, मगर किसी को विश्वाश नहीं देना चाहिए.... उसके बारे में कुछ और बताओ न... उसने रागिनी और प्रज्ञा के बारे में और क्या कहा ?
रंजना- उसने प्यार में आकर मुझे उन दोनों के बारे में सब कुछ बता दिया था... उसने कहा की प्रज्ञा और रागिनीउससे खूब आनंद उठा रही थीं... वे उसको कुछ रुपये देकर अपनी जिस्मानी प्यास को शांत कर लिया करती थी... यहाँ तक की मेडिकल में उसका एडमिशन भी प्रज्ञा ने ही कराया था...
रवि- अच्छा, तुम्हारी मुलाक़ात वहीं पर रमेश से हुई थी ?
रंजना- हाँ, हम साथ-साथ पढ़ते थे... मैंने देखा था की ज्यादातर डॉक्टर्स की पत्नियाँ भी डाक्टर्स ही होती हैं... इसी कारण मैंने भी यह तय किया की रमेश को अपना जीवन साथी बनाकर आराम से जिन्दगी गुजारुंगी... भविष्य में मेरी ख़ुद का अस्पताल खोलने की योजना थी... सोचा की दोनों मिलकर यह सब बखूबी कर लेंगे ... मगर वह तो बहुत बड़ा छलिया निकला ... उसकी नीयत मेरे पिता की दौलत पर थी... वह मेरा सहारा लेकर तुंरत करोड़ पति बनना चाहता था... वह एक नंबर का झूठा और ड्रामेबाज था... उसको समझने में मुझे बहुत वक्त लगा... मुझे उसीने बताया की एक बार शारीरिक सम्बन्ध बनाने के बाद प्रज्ञा उस पर जी जान से फ़िदा हो गयी थी... एक दिन वह रमेश से बोली-
- ओह, रमेश, तुम तो मेरे दिल पर छा गए हो यार ... मन से हटते ही नहीं... सच कहूं तो आजतक मुझे कभी भी इतना आनंद नहीं मिला ,जितना की तुमने दिया है.... तुम सच्चे मर्द हो... ऐसा जांबाज मर्द जो औरत को सम्पूर्ण सुख-संतुष्टि दे सकता है... ऐसा कूव्वत मेरे ख़याल से किसी और मर्द में नहीं है...
रमेश- ये आप कैसे कह सकती हैं ?
प्रज्ञा- क्योंकि तुम वो अकेले नहीं हो जिसके साथ मेरे शारीरिक सम्बन्ध हैं... अब तक मैं एक से बढ़कर एक लड़कों के साथ मजे लूट चुकी हूँ ... तुम उन सबसे अलग हो यार... तुम्हारी बात सबसे जुदा है... ऐसा पावर कहाँ से लाते हो ? कहीं सांड हा तेल तो इस्तेमाल नहीं करते ?
रमेश - क्या कहती हो? क्या इस तरह के किसी तेल से जिस्म के अन्दर जोश और मर्दानगी आ सकती है ?
प्रज्ञा - अगर तुम्हारा जैसा मर्द उसको इस्तेमाल करले तो क़यामत आ जायेगी... जब अभी तुम्हारा यह हाल है तो आगे क्या होगा ?
रमेश- अब पूरा वक्त तारीफ़ में ही गुजारने का इरादा है क्या ?










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