शारीक- सच ? मुझे ये सब बातें अविश्वश्नीय लग रही हैं... एक साथ इतनी खुशियाँ कैसे मिल सकती हैं ? ये सब कुछ सपनों में ही सम्भव है... कभी-कभी तो सपने भी इतने हसीं नहीं होते ... मैं तो सोचकर ही प्रफुल्लित हूँ, लगता है जैसे मैं स्वर्ग में आ गया हूँ... ये कैसे हो रहा है ?
रंजना- आज तुमने बहुत आनंद दिया है... मन खुश है , तन खुश है...यहाँ तक की आत्मा तक खुश हो गयी है ... मैंने भी कहाँ सोचा था की तुम जैसा हैन्दस्म लड़का मेरा दोस्त बनकर मेरे साथ प्रणय क्रीडा को अंजाम देगा॥
शारीक- तुम्हारे सहयोग के बिना यह सम्भव नही था ... क्योंकि मैं तो इस खेल का बिल्कुल नया खिलाड़ी हूँ... मैंने कभी किसी लड़की के साथ इससे पहले जिस्मानी सुख नहीं उठाया था... आह, शुक्रिया...
रंजना- दोस्ती में शुक्रिया का नही, प्यार का आदान -प्रदान किया जाता है... जितना चाहो प्रेम करो , मोहब्बत पर कोई पाबंदी नहीं है ...
शारीक- एक बात पूछूं? हांलाकि आपने सब पर पाबंदी लगा राखी है, फ़िर भी कोशिश करता हूँ, मैं यह जानने का इच्छुक हूँ की तुमने कभी किसी से प्यार किया है की नहीं ?
रंजना- हाँ, झूठ नहीं कहूँगी... मैंने रमेश नाम के एक लड़के से प्यार किया था , मगर मेरे अनुभव अच्छा नहीं रहा ...उसने मेरे तन-मन और धन लूटकर भी मेरे साथ वफ़ा नहीं की... मेरा दिल तोड़ दिया... उस बेवफा को भुलाने की कोशिश कर रही हूँ... तुम भी मिल गए हो, हो सकता है, तुमसे मिलकर उस दर्द के जख्म कुछ कम हो जाएँ;; घावों पर मरहम लगाने के लिए ही तो तुमको यहाँ बुलाया है... तुम तो जानते ही हो, एक बार जब किसी का दिल टूट जायर तो वह हर कदम सोच समझकर ही रखता है... और तुम हो की उसी को बार-बार पाबंदी का नाम दे रहे हो... मुझे चिढा रहे हो न ?
शारीक- मैं मजाक करता रहता हूँ, बोझिल माहोल मुझे बिल्कुल पसंद नहीं...अब तुम्हीं बत्तो, अगर तुमसे मजाक नहीं करुगा तो किस्से करूँगा... अब तो मेरा सब कुछ तुम ही हो...
रंजना- इतना भावुक होने की जरूरत नहीं है... तुम हँसते मुस्कराते ही अच्छे लगते हो... जितना चाहो मजाक करो, कभी बुरा नहीं मानूंगी... अब तो खुश हो , चलो अब मुस्क्रादों... तुमने फ़िल्म देखि है -एक बार मुस्करादों ...
शारीक- नहीं, अब देख लूँगा... घर जाते ही पहला काम यही करूँगा... तुम्हारी हर बात मानूंगा... जो कुछ पहले नहीं जानता था तुमने वह सब सिखा दिया है... जो बचा है, वह भी सीख लूँगा...
रंजना- तुम कुछ जानने के लिए बेताब थे, कहो न , मैं तुम्हारे हर सवाल का जवाब दूंगी... मैं बहुत खुश हूँ...
शारीक - रमेश के साथ तुमने शारीरिक सम्बन्ध भी स्थापित किए थे?
रंजना- हां , बहुत आनंद आया... उसके साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाने का अलग ही मजा था... धीरी-धीरे तुम भी सीख जाओगे... हर काम सीखते- सीखते ही सीखा जाता है... अगर वह सेक्स में माहिर नहीं होता तो मैं उस पर इस हद तक फ़िदा नहीं होती... मैं सच्चाई में यकीन करती हूँ...
शारिक- मैंने कभी नहीं सूना की किसी लड़की ने इस तरह कभी स्वीकार किया है...
रंजना- ओह, अब मस्का लगा रहे हो ?
Tuesday, December 30, 2008
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