Tuesday, December 16, 2008

रंगीला रतन, भाग-50

फोटो देखकर भी सामने वाले के बारे में काफी कुछ जानकारी समझ में आ जाती है... फ़िर उसने सबसे पहला काम ये किया की अपनी एक फर्जी ई मेल आई डी तैयार की ... इसके बाद उसने न्यूज़ पेपर में लिखी एड एजेंसी के प्रतिनिधि को फ़ोन लगा दिया...

वहाँ से उसको मायूसी हाथ लगी... उसको बताया गया की अखबार कापेज छूट चुका है... कल कोई विज्ञापन नहीं प्रकाशित नहीं किया जा सकता... रंजना ने इन्तजार करना ही बेहतर समझा... उसने एक महीने का विज्ञापन अग्रिम बुक करा दिया और साथ ही क्रेडिट कार्ड से पेमेंट भी कर दिया ... वे दो दिन रंजना ने बड़ी बेचैनी के साथ गुजारे... आखिरकार वो दिन भी आया जब उसका विज्ञापन प्रकाशित हुआ... बड़ा अखबार था, रिस्पोंस आना स्वाभाविक था... सुबह से ही फ़ोन आने शुरू हो गए... पहला फ़ोन बांद्रा से था-

-हेलो, मैं

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