Monday, December 1, 2008

रंगीला रतन , भाग-35

क्या वहाँ पर मजदूर लोग नहीं रहते ? मैंने तो यहाँ तक सुन रखा है की मुंबई में सब लोगों को कुछ न कुछ रोजगार जरूर मिल जाता है... मैं तो दूकान चलाने के बारे में भी जानता हूँ... किसी की दूकान पर काम मिल गया तो वहाँ रात को सोने का जुगाड़ भी बन जायेगा... वरना सड़क तो है ही... दिल्ली में भी मैं काफी दिन फुटपाथ पर सोया हूँ... मुंबई में भी सोना पडा तो क्या फर्क पड़ता है, तुम्हारे लिए ये भी कर लिया जायेगा...
रंजना - रवि, तुम्हारी बातें मेरे सर से ऊपर होकर निकल रही हैं... ये क्या कह रहे हो ?मेरे शहर में मेरे रहते हुए तुम फुटपाथ पर रहने की बात करते हो... ये क्या गज़ब कर रहे हो... मैं तुम्हारे स्वाभिमान को समझ सकती हूँ... मैं जानती हूँ तुम ये बातें क्यों कह रहे हो ?
रवि- हम जैसे गरीबों के पास और होता भी क्या है ? समान और स्वाभिमान ही तो होता है... अगर ये भी नहीं रहा तो हम जियेंगे कैसे ? मैं ये नहीं चाहता की लोग तुम पर उंगलियाँ उठाएं और मुझे स्वार्थी समझकर यह ताना मारें की मैंने हराम की रोटियाँ तोड़ने या फ़िर अवसर पाने के लिए ही तुमसे प्यार का नाटक किया है.... ये ताने जिस्म के साथ-साथ आत्मा को भी छलनी कर डालेंगे... मुझेकोई कोई कुछ कहे तो एक बार को सहन भी कर लूँगा मगर तुम्हें कोई कुछ बी ही कहदे , यह मुझे मंजूर नहीं.... चाहे जो हो जाए...
रंजना उसकी बातों से खुश हो गयी... वह रवि के बिस्तर कौशल से तो खुश थी ही अब उसके विचारों से भी प्रभावित हो गयी... रवि की हर अदा पर मर मिटने का दावा करने वाली रंजना -पेशे से डॉक्टर थी , समाज में उसकी एक ख़ास इज्जत थी... यही एक वजह थी की वह रवि का नाम अपने साथ नहीं जोड़ना चाहती थी... उसका सोचना था की जब भी रवि के साथ बिस्तर पर मजा लेने की बात आएगी, वह प्लेन पकड़कर सीधी दिल्ली आ जाया करेगी... यहाँ मौज मस्ती करके वह सुरक्षित मुंबई पंहुच सकती थी... किसी को पता भी नहीं चलेगा और उसका काम भी चलता रहेगा... रवि ख़ुद भी कम समझदार नहीं था , इसीलिए वह फूक-फूक कर कदम रख रहा था... रंजना जो समझ रही थी , रवि के मन में वही भावनाएं काम कर रही थीं... वह चाहता था की रंजना से मिलकर उसकी गरीबी दूर हो जाए... रंजना उसको कितना महत्व देती है, इस बात की फ़िक्र करने वालों में से वह नहीं था... उसका सिर्फ़ और सिर्फ़ एक सूत्रीय विचार यही था की रंजना उसको स्थाई काम पर रख्वादे और कभी-कभी उसको मस्ती करने का समय भी उपलब्ध हो जाए .... मगर इन बातों को जुबान पर कैसे ला सकता था... रवि और रंजना इस वक्त दोनों ही नग्न अवस्था में थे... रवि उसकी मालिश कर रहा था... दोनों पहले ही शारीरिक सुख भोग चुके थे... दोनों ही एक दूसरे से संतुष्ट थे... रवि कुंवारा था, इसलिए नारी देह पाकर वह गूला नही समा रहा था ... रंजना जैसी उच्च शिक्षित हसीना की जवानी का रस लूटकर वह अपने आपको भी ख़ास समझने लगा था...


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