शारिक ने ये बातें इतने दिल से कही थीं की रंजना मोहित हो गयी... अब तक वह शारिक को इसलिए सता रही थी ताकि वह उसके चरित्र पर शक न करे तथा महिलाओं की मर्यादा भी बची रहे ... वह क्या जानती थी की उसकी इस बात से शारिक इतना व्यथित हो जायेगा... वह तो बेवफा रमेश की सताई हुई थी... रमेश की गडारी के कारण रंजना के कदम ऐसे डगमगाए की अभी तह संभालने का नम नहीं ले रहे थे... रंजना अब नए- नए लड़कों को अपने रूप जाल में या फ़िर दौलत के जाल में फंसाती थी और फ़िर अपना काम निकालने के बाद उसको भूल जाती थी... ऐसा करने में उसको बहुत आनंद आता था... वह समझती थी की लड़कों को मूर्ख बनाकर उसने बहुत बड़ा काम किया है... एक तरह से वह प्रतिशोध ले रही थी... उसके साथ रमेश ने जो किया था, उसका बदला वह तमाम पुरुषों से लेना चाहती थी... जब भी वह किसी लड़के को देखती तो उसमें वह बेवफा रमेश का प्रतिबिम्ब पाती थी... वह हर उस लड़के से बदला लेने की खातिर उसको अपने पास बुलाती, प्यार के झूठे जाल में उलझाती और फ़िर जिस्मानी प्यास बुझाने के बाद उसको झटक दिया करती थी... शारिक के विषय में भी उसने यही धारणा बना राखी थी,। सोचा था की उसको होटल में बुलाएगी और जिस्मानी भूख शांत कराने के बाद उसे छोड़ देगी... मगर शारिक की बातों को सुनकर वह बोली-
-तुम बहुत भोले हो शारिक , मैं कभी किसी से शिकायात नहीं करुँगी... यह शरीर अब तुम्हारा है, इसका जैसे इस्तेमाल करना चाहो कर सकते हो... मैं बिल्कुल नहीं रोकूंगी... बल्कि तुम्हारा साथ दूंगी...तुम्हें भी आनंद दूंगी और ख़ुद भी भोगुंगी, आओ, मेरे करीब आकर मेरे इन रस भरे होठों को चूम लो...आओ न , शर्माना छोड़ दो, घबराना छोड़ दो... मुझमे समा जाओ मेरे यार ...
इसके बाद रंजना ने उसके सांड हा आयल के एक शीशी दे दी... वह कुछ समझ पाटा , इससे पहले ही रंजना ने उस तेल की मालिश शारिक के संवेदन शील अंग पर करनी शुरू करदी, रंजना डॉक्टर तो थी ही, वह जानती थी की कौन सी दावा किस मर्ज में ज्यादा कारगर साबित होती है... सांड हा आयल ने जब अपना कमाल दिखाना शुरू किया तो रंजना बी ही चौंक गयी और वह ख़ुद भी... उसके अंग का आकार तो बढ़ ही गया इसके साथ-साथ वह गज़ब की उत्तेजना का शिकार होने लगा... काम वासना की जोरदार आंधी चलने लगी... उसने रंजना के होठों का रस चूसना शुरू कर दिया...
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