वह अजीब पशोपेश में
था... उसको लगता था की अब उसके पास सिर्फ़ तन ही बचा है... आत्मा निकल चुकी है... रंजना की उपस्थिति में वह उसके जादू को इतना महसूस नहीं कर पाया था... प्रभावित तो वह बहुत था मगर इतना ज्ञान नहीं था की रंजना के जाने के बाद वह मरने जैसा हो जायेगा... उसकी जैसे जान ही निकल गयी थी... एअरपोर्ट से लेकर दूकान तक आने में ही उसकी हालत ख़राब हो गयी... लगा जैसे अब जिया नहीं जायेगा... होठ सूख गए, बदन एंठने लगा... बड़ी अजीब अवस्था थी.... जब वह दूकान पर आया तो चक्कर खाकर नीचे गिर पडा... दुकान का मालिक वहाँ आ चुका था... उसे रवि पर बहुत गुस्सा आ रहा था... लेकिन जब उसकी ऐसी बदतर हालत देखि तो गुस्सा पल भर में ही काफूर हो गया... अब उसे रवि पर दया आ रही थी...लोगों ने उसके मुह पर पानी के छींटे मारे और जब उसको होश आ गया तो कमरे में लिटा दिया गे... धीरे-धीरे यह बात दूर -दूर तक फ़ैल गयी... लोगों को चकल्लस करने के लिए एक नया बहाना मिल गया था... फ़िर रंजना के आने की बात भी खुलने लगी... वे लोग भी सामने आए, जिन्होंने रात में एक खूबसूरत महिला को रवि के साथ कमरे में आते हुए देखा था... कुछ लोगों ने उसे अकेली कमरे में आते-जाते या फ़िर रवि के साथ बाहर निकलते हुए देखा था... बात का बतंगड़ बन चुका था... कुछ लोग इस मामले को नमक मिर्च लगाकर पेश कर रहे थे... कुछ लोग रंजना को वैश्या मानकर चल रहे थे तो कुछ का माना था की वह विदेश की रहने वाली होगी, रवि उसको बहकाकर यहाँ ले आया होगा... जितने मुह , बातें... रवि इस सबसे बेखबर होकर अपने सपनों की दुनिया में खोया हुआ था.... अब भी वह अपने साथ रंजना को ही महसूस कर रहा था...उसको लगने लगा, रंजना उसके हाथ को चूम रही है... वह रंजना की आकर्षक गोलाइयों के साथ खिलवाड़ कर रहा है... वह आह भरने लगी है... उसकी आहों में गज़ब की कसक है... रवि उसके होठों पर अपने होठ रख चुका है... उन दोनों के होठों की रगड़ काम वासना की आग पैदा कर रही है... रवि कामुक होकर उसकी गोलाइयों पर अपने हाथों का दबाव बढ़ाने लगता है...रंजना सेक्सी आहें भरने लगती है...रवि उसको देखकर बेचैनी महसूस करता है... वह रंजना के साथ प्रणय क्रीडा करना चाहता है मगर उसके हाथ पाँव अचानक काम करना बंद कर देते हैं...वह उम्मीद करता है की रंजना ही अपनी तरफ़ से अतिरिक्त प्रयास करके उस अनमोल सुख को प्राप्त करले, जिसके लिए उन दोनों के तन-मन मचल रहे हैं... मगर अफ़सोस , रंजना अपनी तरफ़ से पहल ही नहीं कर रही है... इसके विपरीत वह उसकी बेबसी देख-देखकर खूब मुस्करा रही है.... रवि उसकी मुस्कान का रहस्य जान नहीं पाता , वह अपने हाथ आगे बढ़ाने की कोशिश करता है , जो बेकार और नाकाफी साबित होती है... वह जोर से चिल्लाकर कहता है-
- ये मेरे साथ क्या हो रहा है रंजना ? तुमने मेरे ऊपर ये क्या जादू कर दिया ? क्या तुम सचमुच जादूगरनी हो ?
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