अब क्या किया जाए, जो हो गया सो गया , जीवन में इंसान से कुछ भूल ऐसी हो जाती हैं, फ़िर उनका प्रायश्चित करना भी मुश्किल हो जाता है... सचमुच गद्दार रमेश ने मेरे दिलो दिमाग को बहुत चोट पंहुचाई है... तुम्हें भी यह जानने की उत्सुकता होगी की मुझे पीने की आदत कब लगी, कैसे लगी ? यह भी की इस तरह मालिश कराने का शौक मुझे कैसे लगा ? तुम अब मेरे दोस्त बन चुके हो,
जाहिर सी बात है की इस बारे में जरूर दिलचस्पी रखते होंगे ?
शारीक- हाँ, दिलचस्पी तो बहुत है मगर डर के मारे कह नहीं रहा था... बताइये न ?
रंजना -मैं रमेश की किसी बात का इनकार नहीं कर सकती थी... वह मेरे जिस्म को चखना चाहता था, मैंने हाँ करदी... इसके बाद मेरी भी आदत बिगड़ गयी... सेक्स मेरी रोजाना की जरूरत बन गयी... बिना रमेश से मिले मुझे आनंद ही नहीं आता था, मैं हर समय रमेश के ख्यालों में ही खोई रहती थी...
इस बात का उसने जमकर फायदा उठाया ... एक दिन मैंने महसूस किया की वह अपने दोस्तों के सामने मुझे परोसना चाहता है... तब जाकर मेरी आँखें खुलीं...
शारिक- तुमने कैसे महसूस किया की रमेश तुम्हें अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर बनाना चाहता है...
रंजना- एक दिन हम दोनों इसी तरह आनंद उठा रहे थे जैसे अब तुम और हम उठा रहे हैं... हम दोनों ही शराब पिए हुए थे... ज्यादा तो नहीं लेकिन मैं नशे की शिकार थी... मेरे होठों में सिगरेट फंसी हुयी थी... रमेश और मैं दोनों ही नग्न थे , वह मेरे संवेदन शील अंग के साथ खिलवाड़ कर रहा था... वासना की आग मेरे बदन को बुरी तरह झुलसा रही थी... मैं बेचें थी... तभी रमेश का मोबाइल बज उठा... फोन रिसीव करने के बाद वह बोला-
- मेरे दोस्त जीशान का फोन है , उसकी गर्ल फ्रेंड भी उसके साथ है... काफी कोशिश कर रहा है , मगर इस वक्त जगह का जुगाड़ नहीं हो पा रहा है... वह इन्ज्योय करने के मूड में है...
मैंने उसको कुछ बोलने के बजाय घूरकर देखा , उसके चेहरे पर गौर से देखकर पूछा -
-तो ? परेशानी क्या है ? अगर वे लोग मस्ती करना चाहते हैं तो ज्कारें, हमको इससे क्या लेना देना है...
रमेश- अगर परेशानी नहीं होती तो अब फोन क्योंकरता? vअह चाहता है की ?
रंजना- क्या चाहता है वह ? चुप क्यों हो गए , बोलो न ... क्या बात है आख़िर ?
रमेश - जीशान चाहता है की वह भी इसी कमरे में अपनी गर्ल फ्रेंड को संतुष्ट करना चाहता है... तो , मैं... ,,,,
रंजना - ये क्या तो- तो मैं-मैं लगा राखी है ?साफ़ -साफ़ क्यों नहीं कहते की आख़िर क्या बात है ?
शारीक- मैं पूछता हूँ की दिक्कत भी क्या है ? आजकल ये सब फैशन हो गया है... अब देखो न अश्लील फ़िल्म में भी तो यही सब दिखाया जा रहा है... जब आनंद ही लेना है तो जमकर लिया जाए...
रंजना- तुम्हें या तो शराब चढ़ गयी है या फ़िर बहक गए हो, अगर आज मूड नहीं है तो मैं जाऊं क्या ? कल मिल लेंगे ... अजीब सी म्बह्की-बहकी बातें करने लगे हो , साफ़ कुछ नहीं कहते ...
रमेश - मैं कह रहा हूँ की जीशान को यहीं पर बुला लेते हैं , वह अपनी फ्रेंड के साथ एक तरफ़ सुख भोग लेगा और हम लोग यहाँ पर मौज मस्ती कर ही रहे हैं...
रंजना- यह कैसे हो सकता है ? हम एक ही कमरे में दो लोग कैसे मस्ती लूटेंगे ? क्या तुम्हें शर्म नहीं आएगी... यहाँ पर कोई परदा भी नहीं है... वह मुझे नग्न अवस्था में देखकर न जाने क्या सोचेगा
रमेश- आख़िर वह क्या सोचेगा , उसकी प्रेमिका भी तो आ रही है...
रंजना- मैं एक इज्जतदार परिवार से ताल्लुक रखती हूँ रमेश ... तुमको यह बात भी ध्यान रखनी चाहिए
Thursday, January 1, 2009
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