Monday, December 22, 2008

रंगीला रतन , भाग -56

क्या गरीबों को खुशहाल रहने का हक़ नहीं है ?
शारिक- आप तो मेरा ही डायलोग मेरे ही ऊपर मार रही हैं... मैं तो पहले से ही गरीबों के अधिकारों की बात करता हूँ... क्या गरीबों के पास लेपटोप होता है , इंटर नेट का कनेक्शन भी होता है , और इसके बावजूद भी बह गरीब ही रह जाता है क्या ? फ़िर तो गरीबी की परिभाषा ही बदलनी पड़ेगी ....
रंजना- हो सकता है जिस लेपटोप पर मैं काम कर रही हूँ, वह तुम जैसे अमीर का हो.... ये भी हो सकता है की ....?
शारिक - की तुम झूठ बोल राजी हों, हैं न ? हांलाकि मुझे भरोसा हो गया तुम पर...झूठ नहीं बोल पाओगी तुम ...
रंजना- मस्का लगा रहे हो ? पटाने का यह तरीका अच्छा है...
शारिक- अब नहीं , मस्का तो पहले लगा रहा था... जब बिना देखे ही तुम्हारे हुस्न की तारीफ़ कर था ... अब जो कह रहा हूँ वह तो मेरे दिल की आवाज है... और इस बारे में फ़िर कभी कुछ नहीं कहूँगा...
रंजना- जानती हूँ... तुम सब लड़के लोग ऐसे ही होते हैं... नई-नई बातें तो ऐसे ईज़ाद कर लेते हैं की हम सोच भी नहीं सकते... चलो , ठीक है ... और कुछ कहो.... अपनी पसंद या नापसंद के विषय में बताओ...
शारिक-इस वक्त तो पहली पसंद तुम ही तुम हो... भले ही तुम्हें देख नहीं पाया मगर तुम्हारी सूरत मैं अपने दिल में बसा चुका हूँ... तुम्हारा जिस्म भी मालिका शेरावत की तरह ही होगा... ये मेरा दावा है... फर्क ये है की चेहरा गोल होगा... मेरे अनुमान के मुताबिक तुम बेहद सेक्सी हो...
रंजना- अंधेरे में तीर मारकर अपने आपको तीसमारखां समझ रहे हो ?
शारिक - चाहे जो हो , मगर बात सच है... इनकार करके देखो... कर ही नही पाओगी, मेरा दावा है... तुम्हें रोजाना एक नए मर्द की जरूरत पड़ती होगी... भले ही वह उपलब्ध न हो, या तुम उसे न बुलाओ मगर जरूरत जरूर पड़ती होगी... मेरा चैलेन्ज है , जो मेरी बात को झूठा साबित करेगा ,उसको ५० रुपये का नकद इनाम दूंगा...
रंजना- तो मैं कहूँगी की तुम शर्त हार गए... निकालो ५० रुपये...
शारिक- मैं आज तक कभी किसी से नहीं हारा...तुम अपने आपको इस तरह धोखा नहीं दे सकतीं....
रंजना- आज दोपहर तीन बजे हम होटल ग्रेट में मुलाक़ात करेंगे... अब खुश हो?
शारिक- इस खुशी को मैं कैसे सहन कर पाऊंगा... जी तो चाहता है की तुमसे बात करता रहूँ । मगर अब तैयार हो जाता हूँ... ओके बाय ....
फोन डिस्कनेक्ट हो गया... रब्न्जना उस लड़के के बारे में सोचती रह गयी... वह उससे आधी उम्र का लड़का था... जनरेशन गेप का मतलब वह अच्छी तरह से समझती थी... नहा धोकर उसने खाना खाया और हल्का मेकप करने के बाद बताये गए होटल की तरफ़ रवाना हो गयी ... उसने रास्ते में शारिक को बताया की योजना बदल चुकी है... ग्रेट की की बजाय उसने शारिक को दूसरे होटल में बुलाया... यह कदम उसने सुरक्षा की द्रष्टि से उठाया था...





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