Monday, December 29, 2008

रंगीला रतन, भाग-62

अब अगर तुम्हीं हम पर शक करने लगेंगी तो गुजर कैसे होगी ? सबको उत्सुकता होती है की जिससे वह प्यार करता है, उसका चेहरा कैसा है ? कहीं मिलोगी तो पहचानेंगे कैसे ? पहचान भी तो जरूरी है... अरे सुहागरात के समय तो दुल्हन भी घूंघट उठा देती है , एक तुम हो की ऐसे समय भी सवाल कर रही हो...
रंजना- अच्छा , अगर ऐसी बात है तो लिघत जला दो ... आज मैं तुम्हारी हर इच्छा पूरी करना चाहती हूँ... अपनी हर हसरत पूरी कर लेना... मैं कुछ कहने वाली नहीं हूँ...
रंजना की इजाजत मिलते ही शारीक ने लाईट जलादी... रंजना का खूबसूरत चेहरा देखते ही वह बेहोश होते-होते बच्चा... उसने कल्पना भी नहीं की थी की उसका वास्ता इतनी सुंदर हसीना से होगा... उसका मुह खुला का खुला रह गया... उसको बाद हवास देख रंजना बोली-
- पागलों की तरह ये क्या देख रहे हो, यह भी कोई नई चीज देखली की अभी तक तुम्हारा मुह फटा हुआ है...
शारीक- आज जाना की सुन्दरता क्या होती है, इससे पहले मैंने तुम जैसी हूर नहीं देखी... वाह... जितनी तारीफ करूं, उतनी कम है... मैं तो होश में ही नहीं आ रहा हूँ....
रंजना- तुम सब लड़के एक जैसे होते हैं... लड़की की झूठी तारीफ़ करके उसके दिल में जगह बनाना चाहते हो...
शारीक - मैं सबसे अलग हूँ, झूठी तारीफ करना मेरी फितरत नहीं... जो सच बात है ,वही बता रहा हूँ... तुम ख़ुद भी मेरी हालत देखकर यह अनुमान लगा सकती हो...
रंजना- ठीक है, तुम जीते , मैं हारी ... अब टाइम बरबाद करना ठीक नहीं है... प्यार की गाडी पर सवार होने के बाद तब तक नहीं रुकना चाहिए जब तक की मंजिल तक न पहुच्ज जाएँ... समझे ?
शारीक सब समझ रहा था... वह ख़ुद भी तो उतना ही बेचैन था, बल्कि उससे ज्यादा परेशान था... रंजना ने उसके सभी कपड़े उतारकर फेन दिए, शारीक की बॉडी जबरदस्त थी, लेकिन दिल्ली वाले रवि जैसी नहीं... अचानक उसे रवि याद आ गया... वह सीधा था, गरीब था मगर ईमानदार था... कम पढ़ा लिखा था लेकिन वाकी जवान मर्द था...
उसने रंजना को बिस्तर पर खूब सुख दिया था, इतना आनंद पाकर वह भाव विभोर हो गयी थी... अब मामला शारीक का था... शारीक भी अनाडी था... रवि भी सेक्स से बिल्कुल अपिरिचित था... रंजना को अब जो भी मिल रहा था, वह नया लड़का ही मिल रहा था... उनको कामक्रीड़ा का पाठ सिखाना भी रंजना का ही काम था... उसने शारीक का हाथ अपने सीने पर रख दिया... वह शुरू हो गया... रंजना को मजा आने लगा ... इसी प्रकार आहिस्ता-आहिस्ता वह शारीक को हर तरीके सिखाने लगी... जब वे दोनों मंजिल पर पहुचे तो शारीक ने उसे अपनी बांहों में जकड लिया, रंजना के होठों को चूमता हुआ बोला-
- अब हम दो जिस्म एक जान बन चुके हैं , मुझे कभी भूल मत जाना... तुम मेरा पहला प्यार हो , और तुम्हीं आखिरी भी... मैंने इससे पहले किसी लड़की का नग्न बदन भी नहीं देखा... किसी के जिस्म को टच भी नहीं किया...
रंजना- क्या कहते हो, तुम्हें भुलाना अब आसान नहीं होगा... अपने आपको एक बार के लिए भुला सकती हूँ मगर तुम्हें नहीं

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