उसके माथे पर पसीना उभर आया... वैसी हालत हो गयी जैसे किसी ने उसको रेंज हाथों चोरी करते हुए पकड़ लिया हो... रंजना खुश थी... वह बाहर कुछ खरीदने गयी थी... रवि से पहले जागकर उसने नित्यकर्म किए और फ़िर रवि को सोता हुआ छोड़कर घूमने चली गयी... वह जब बाहर गयी तो रवि ने उसके बारे में न जाने क्या-क्या सोच लिया था... वह उसको ठगनी समझ रहा था... जिस रंजना के एक इशारे पर भी वह जान देने की क़समें खा रहा था, वही रवि अब उस हसीन के विषय में इतनी घटिया बातें सोचने लगा था... इंसानी स्वभाव ऐसा ही होता है... जिस पर भरोसा करता है तो उसको खुदा मान लेता है और नफरत करता है तो देवताओंपर भी इल्जाम लगाने लगता है... रंजना ने उसको परेशान देखा तो पूछ बैठी-
- क्या हुआ रवि, सब कुछ ठीक तो है ? तुम्हारे चेहरे की हवाइयां क्यों उड़ रही है ?
रवि- ऑफ़, कुछ मत पूछो यार,मुझे न जाने क्या हो गया है ... तुमने शायद जादू कर दिया है... मैं ख़ुद नहीं समझ पा रहा हूँ की मैं क्या कर रहा हूँ... जैसे ही मेरी नींद खुली मैंने तुम्हें देखा, तुमको यहाँ न पाकर मेरी साँस ऊपर-नीचे चलनी लगी... मुझ पर पागलपन सवार हो गया... मुझे लगा जैसे की मैं सपना देख रहा था... कभी -कभी भांग के नशे में भी ऐसा महसूस होने लगता है... मैंने समझा की किसी तरह से कल भंगकी गोली तो नहीं खाली... अभी यह सब सोच ही रहा था की इतने में तुम आ गईं... अब मैं प्रसन्न हूँ...
रंजन- शुक्र है , मैं जल्दी आ गयी, वरना तुम पता नही क्या कर बैठते ...
रवि- कहाँ चली गईं थीं सुबह-सुबह ?
रंजना- मैं होटल बुक कराने गयी थी... बाहर देखा तो सब दुकानें बंद हैं... मैं सोच रही थी की अगर तुमने जल्दी दूकान नहीं खोली और यह बात तुम्हारे सेठ को पता चली तो वह नाराज हो जायेगा...
रवि- हाँ, यह बात तो है... मैं ख़ुद भी इसी बात को लेकर परेशान हूँ... मगर ये बंद कैसे ? कोई नेता- वेता मर गया होगा ? यहाँ तो आए दिन यही होता रहता है... अगर किसीने मुह खोला तो गया काम से... नेता लोग भी कमाल करने लगे हैं... ये खुशी में भी पैसे लेकर जाते हैं औए गम में भी ... इनका कोई दीं ईमान नहीं होता ... जो भी ड्रामा करते हैं,दौलत के लिए करते हैं...
रंजना- एक बोर्ड पर लिखा था की किसी नेता को गिरफ्तार कर लिया है , उसीके विरोध में दुकानें बंद की गयी हैं...
रवि- अच्छा, ध्यान आया... विधूडी को पकडा गया होगा... कई दिनों से ऐसी चर्चा चल रही थीं... भ्रष्टाचार का एक माला चल रहा था शायाद उसी में गिरफ्तारी हुई होगी....
रंजना- छोडो भी, क्या रखा है इन बातों में अब काम की बातें करते हैं... मैं होटल गयी थी... अपने लिए कमरा बुक करा आयी हूँ... मेरे खयाल से यह जगह हम दोनों को मोहब्बत के लिहाज से सुरक्षित नहीं थी... यहाँ कोई भी और कभी आ - जा सकता है... कोई हमको यहाँ पर इस हालत में देख लेता तो तुम्हारी बदनामी हो जाती... इसी कारण मैंने पर्सनल कमरा बुक करा लिया है... अब आराम से दोनों प्यार का आनंद उठाएंगे...
Saturday, December 6, 2008
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