रमेश- कितना खुशनसीब हूँ मैं... अगर तुम नहीं मिलतीं तो क्या होता ? मैं वास्तब में तुम्हारा आभारी हूँ...न जाने कितने पुण्य के बाद मुझे यह अवसर मिला है...
रंजना जब रवि को अपने बेवफा प्रेमी रमेश की दास्ताँ सुना रही थी तो वह हर बात को तवज्जो दे रहा था, खूब ध्यान से सुन रहा था... रंजना डॉक्टर थी... उसकी ट्रेन मिस हो गयी थी इसलिए वह रवि के पास रुक गयी... रवि गज़ब का खूबसूरत नौजवान था... गाँव का दूध पीकर और शुद्ध हवा खाकर वह हट्टा-कट्टा नौजवान बन चुका था... वह दिखने में बेहद आकर्षक था...
रंजना उस पर पहली ही नजर में रीझ गयी थी... रवि का मालिक कहीं बाहर गया हुआ था इसलिए उसको यह सुखद इत्तेफाक नसीब हुआ ... उसने महसूस किया की रंजना की पलकें झपक रही थीं... वह उसके नग्न बदन की मालिश कर रहा था... रंजना को सुकून महसूस हुआ तो वह नींद के झोटे लेने लगी... रवि ने प्यार से पूछा-
- सो गईं क्या ?
रंजना- हाँ यार , ज़रा आँख लग गयी थी.... मुझे ही पता ही नहीं चला की यह सब कैसे हो गया ...
रवि- वही तो कह रहा हूँ... तुम कह भी रहीं थीं और सो भी रही थीं... मेरे ख़याल से अब तुमको सो जाना चाहिए... कल बात करेंगे... अगर तुम्हारी नींद पूरी नहीं नही हुई तो कल का दिन बी ही ख़राब हो जायेगा...
रंजना- नहीं रवि... कल तो मुझे किसी भी हालत में जाना होगा... मेरा पूरा काम बिगड़ जायेगा... हम दोनों के पास सिर्फ़ यही रात है... इसके बाद पता नहीं अब सुबह हो की नहीं हो... कल किसने देखा है... मैं बहुत डिस्टर्ब हूँ... मैं अपने दिल की हर बात तुमको बताना चाहती हूँ...
रमेश- कभी-कभी तुम दारा सिंह की तरह बहादुर बन जाती हो और कभी-कभी एकदम कायर बन जाती हो... सबसे बुरा हाल मेरा होता हैमैं कुछ समझ ही नहीं पता... खैर फ़िर क्या हुआ ?। तुम उस बेरहम रमेश के बारे में कह रही थीं जिसने प्यार का नाटक तुम्हारे साथ किया और रंगरेलियां किसी और के साथ मनाता रहा ...
रंजना- हां, मैं उसी रमेश के बारे में बात कर रही थी... उसने सिर्फ़ रागिनी या प्रभा ही नहीं बल्कि कई और महिलाओं के साथ भी अन्तरंग सम्बन्ध बना रखे थे... वह रोजाना इन दोनों महिलाओं की शारीरिक जरूरतों को पूरा करता था... इसके बदले में वे वे रमेश को पढाई का खर्च दिया करती थीं... इस कारण रमेश एक नंबर का अय्याश बन चुका था... रोजाना शराब पीना और मौज मस्ती करना ही उसकी दिनचर्या थी... इस कारण उसकी पढाई भी डगमगाने लगी... उसका स्वास्थय भी बिगाड़ने लगा था... वह चेहरे से बेहद मासूम लगता था मगर था बड़ा घाघ... वह जितना जमीन के ऊपर नजर आता था उतना ही जमीन के अन्दर भी था...
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