Thursday, May 19, 2011

भाग-१६
वासना का तूफ़ान अब जोर-जोर से चलने लगी थी. वे दोनों मुक्ति पाना चाहते थे. जिस्म में जो आग लगी थी, उसे इश्ज्क की फुहारों से बुझाना चाहते थे. दो जिस्म अब एक जान बनने की दिशा में बढ़ रहे थे. वे दोनों ही युवा थे और पहली बार जिस्म का खेल खेलने वाले थे. उन दोनों को इस काम का कोई इल्म नहीं था .इससे पहले अगर काम क्रीडा का खेल खेला होता तो इस सम्बन्ध में अनुभव हो गया होता. लेकिन कहावत है कि ऐसे कामों के स्कूल नहीं होते . और वही हुआ भी था. बिना स्कूल में सीखे भी उन दोनों ने अपना सुख का मार्ग तलाश लिया था. अपने-अपने तरीके से वे दोनों युवा जिस्मानी सुख वसूलने के लिए तैयार थे. जुनैब सलमा के उन्नत वक्षों को चूम रहा था, जब उसकी जीभ सलमा की चोटियों पर स्पर्श करती तो सलमा चिहुंक उठती थी. जब वह ठंडी आह भर्ती तो जुनैब को और भी मजा आने लगता था. वह औए ज्यादा मस्ती के साथ उन पर्वत चोटियों को चूमने लगता . ऐसा करते समय वह बिलकुल दीवाना हो रहा था. उसके एक हाथ में गिलास था, जो कभी -कभी छलक भी जाता था. उसकी हालात्त देखकर सलमा ने कहा-
- पहले यह गिलास तो खाली करदो. फिर आराम से प्यार कर लेना. इससे कपडे खराब हो जायेंगे .
जुनैब- अब तो शराब में भी वो नशा नहीं रहा, जो तुम्हारी इस चढती जवानी में है. अब तो इस यौवन का रस चूमकर ही दम लूंगा. उससे पहले रुकने का मतलब है कि अपने हाथों अपनी जीते हुई बाजी हार जाना. बड़ी मुश्किल से यह मौक़ा मिला है, आज इसे छोड़ने वाला नहीं हूँ. यह मेरा पहला अवसर है जब मैं तुम्हारे साथ बिस्तर पर प्यार का खेल खेल रहा हूँ. मेरे साथ के ज्यादातर लड़के इस खेल को बहुत पहले ही खेल चुके हैं, बस मैं ही सेक्स के स्वाद से वंचित थी. जब वे लोग अपनी महिला दोस्त के साथ बिस्तर की कहानियाँ सुनाते तो मन ही मन मैं कहता कि काश , मुझे भी कोई हसीं लड़की मिल जाए , जिसके साथ मैं सब कुछ शेयर कर सकूं, और देखो ऊपरवाले ने मेरी बात सुन ली. अब मैं बड़े आराम से तुम्हारे साथ प्रेम का आनंद ले रहा हूँ. अगर हमको तरक्की करनी है तो पेट के साथ-साथ पेट के नीचे की भूख को भी शांत करना होगा , और उसका इंतजाम बनही अब हो गया. हम दोनों को खूब मन लगाकर पढाई करनी होगी और छुट्टी वाले दिन हम किसी होटल में आकार ऐश किया करेंगे . इससे हम खुश रह सकते हैं.
सलमा- तुम्हारा कहने का मतलब है कि हफ्ते में एक बार प्यार का सुख लूटा करेंगे , मगर मैं डरने लगी हूँ. मुझे लगता है शायद मैं एक दिन , और एक घंटा भी तुम्हारे बिना नहीं जी पाउंगी . इसका कारण ये है कि मैं भी अब तुमसे प्यार करने लगी हूँ. और तुम्हारे साथ नगन अवस्था में आकार यह महसूस किया है कि तुम सचमुच के जादूगर हो. तुम्हारी उपस्थिति से तन और मन दोनों खुश जाते हैं. अब इस महक की आदत लग जायेगी , जब तु७म बिन नहीं जी पाउंगी , तब क्या होगा ?
जुनैब- कोशिश करने से सब कुछ मिल जाता है. हमको सार्थक प्रयास करने होंगे . यह जानना होगा कि इसीमे हमारी भलाई है कि हम लोग हफ्ते भर तो जी भर्जे पढाई करते रहें और वीकेंड के समय जी भरके प्यार करें, रोप्मांस करें और दिल में जितने भी अरमान हैं, उन सबको पूरे करलें. इससे किसीको पता भी नहीं चलेगा. पता चल भी गया तो किसीको बुरा भी नहीं लगेगा . क्योंकि सब जानते हैं कि इस उम्र में सेक्स एक बहुत बड़ी जरूरत है. इधर -उधर भटकने के बजाय अगर किसी एक साथी के साथ ही सुइरक्षित सम्बन्ध बनाने का मौक़ा मिल जाए तो इससे बड़ी बात और कोई नहीं होगी .
आजकल एड्स नामक बीमारी ने सबका हाल खराब कर दिया है. अगर असुरक्षित सम्बन्ध बना लिए तो एड्स का होना लाजिमी है और जिस किसी को यह रोग लग जाता है, समजह ,लो कि उसका वंश ही मिट जाता है.
सलमा- हाँ, सूना तो है यह खतरनाक रोग है. साइंस इतना आगे पहुँच गया तब भी अभी इसका कोई इंतजाम नहीं हो पाया है ? सरकार को ऐसे रोगों की रोकथाम के लिए प्रयास करने चाहिए . ताकि इससे छुटकारा मिल सके.
जुनैब- एड्स का इलाज तो इसके बचाव में ही छिपा है. जो कोई बचाव करके बच जाएगा वही होशियार है. अक्सर लोग नशे की हालत में या अत्यधिक उत्तेजना की हालत में बिना कंदों में सेक्स कर लेते हैं. इसके परिणाम जिंदगी भर भुगतने पड़ सकते हैं. सिर्फ उस व्यक्ति की नहीं बल्कि उन दोनों से जुड़े लोगों का जीवन खत्म हो जाता है

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