भाग-२७
सलमा- कुछ लगने के लिए ज़िंदा रहूंगी तब न बता पाउंगी . मेरी जान निकल जायेगी. कभी मजाक में भी दूर जाने की बात न करना और अगर मेरी मौत प्यारी हो तो जो चाहो कहना, कोई दिक्कत नहीं है.
जुनैब- कितने कम समय में ही तुम मुझसे कितनी मोहब्बत करने लगी हो. जब पहली बार मिलीं तो मुंह फूला हुआ था और अब देखिये की अब तो जान देने के लिए भी तैयार हैं. सही कहते हैं की समय बड़ा बलवान होता है. अगर समय सही हो तो कुछ भी किया जा सकता है.
सलमा- मोहब्बत सबसे बड़ी चीज है . अगर मोहब्बत में जादू नहीं होता तो आज मैं तुम्हारी बांहों में इस तरह नगन नहीं झूल रही होती. मैं जानती हूँ की तुम मेरी इज्जत करते हो, मेरा ख़याल रखते हो . इसलिए मुझे कभी भी दुखी नहीं देखना चाहोगे. इसिलए तो यह सम्पूर्ण समर्पण है. अब तुम्हारे ऊपर सब कुछ छोड़ दिया है, जैसा चाहे करना, मैं कोई ऐतराज नहीं उठाऊँगी . मुझे कुछ भी नहीं चाहिए , सिवाय तुम्हारे प्यार के. मुझे तुम्हारा प्यार मिल जाए , वही मेरे लिए सब कुछ है. मैंने तो आज तक अपने मन में किसी लड़के की छवि भी नहीं बसाई थी, कभी किसीके बारे में सोचा भी नहीं था, तुम अकेले वो लड़के हो, जिसने पल भर में मेरे ऊपर जादू कर दिया. मुझ जैसी पत्थर को भी मोम बना दिया. मैं तो अपने आपको पत्थर से भी कठोर समझती थी. अक्सर लोग कहते थे थे की ये लड़की पता नहीं कहाँ रहेगी , इंसानों की दुनिया से तो ये बिलकुल अलग है. कोई इसे अच्छा ही नहीं लगता है. अब मैं उन लोगों को दिखाउंगी की देखो , मैं भी अब इंसानों की दुनिया में रहने के लायक हो गयी हूँ. अब मैं भी किसी लड़के के साथ निबाह सकती हूँ, उसका ख्याल रख सकती हूँ, उससे प्यार कर सकती हूँ, उसके प्रति अपने आपको समर्पित कर सकती हूँ और यहाँ तक की अपनी जान भी न्यौछावर कर सकती हूँ.
जुनैब- और मैं भी बड़े फख्र के साथ कह सकता हूँ की मुझ पर मर मिटने वाली भी इस दुनिया में मौजूद है. हम दोनों मिलकर कुछ अच्छा काम करने की कोशिश करेंगे. हम लोग राजनीति में आयी गिरावट को कम करने की दिशा में प्रयास करेंगे . ऐसा काम हम दोनों बड़े आराम से कर सकते हैं. पिताजी तो राजनीति में हैं ही, जब हम अभी से लोगों के बीच में जायेंगे , उनके दुःख-सुख सुनेंगे तो सहज रूप से वे हमसे जुड जायेंगे . हम अपने क्षेत्र और प्रदेश तथा देश के बारे में अभी से स्टडी करेंगे , पहले उसे छोटे स्तर पर सुधारेंगे और फिर बड़े लेबल पर सेवा करेंगे . हम लोगों में ये भरोसा दिलाने का प्रयास करेंगे की राजनीति में भी अच्छे और सच्चे लोग काम कर सकते हैं.
सलमा- ये बड़ा कठिन काम है. सुनते हैं यह काजल की कोठरी है, जो इसमें एक बार गया तो दाग लगना लाजिमी है. ना चाहते हुए भी किसी न किसी तरह से दाग लग ही जाता है. अगर कोई नेता सच्चा होता भी है तो उसकी पार्टी उसे नेक नहीं रहने देती. पार्टी उसे बिगाड़ देती है. पार्टी को चन्दा चाहिए वरना वह आपको टिकट नहीं देगी. और अगर बड़ी पार्टी का टिकट चाहिए तो बड़ा चन्दा चाहिए अजुर बड़े चन्दा देने के लिए बड़ा भ्रस्टाचार करना होगा. या फिर छोटे-छोटे , गरीब लोगों का गला काटना =होगा.
जुनैब- हाँ, ये तो है, मगर हमको इसीमे से कोई बीच का रास्ता निकालना होगा. और कोशिश करने पर ये हो भी सकता है. जब हम दोनों मिलकर इस कार्य को हाथ में लेंगे तो असंभव कुछ भी नहीं है. हाँ, मुश्किलें बहुत आयेंगी मगर सही नीयत है तो काम हो ही जाएगा .
सलमा- मैं तो परछाई बनकर चलूंगी. जो चाहोगे वैसा करूंगी . हर काम सहयोग करूंगी. मुझे न तो दौलत की हवस है और ना ही शौहरत का लालच है. मुझे तो अपना जुनैब चाहिए, जुनैब की मोहब्बत चाहिए. मेरे लिए तो तुम ही सब कुछ हो. तुम्हारी एक मुस्कान पर ही मैं अपनी जान दे सकती हूँ.
जुनैब- यह मोहब्बत का पर्व है, इतनी सुहानी मुलाक़ात में मरने -गिरने की अशुभ बातें क्यों करती हो. आज इस मिलन को इतना यादगार बनादो की आने वाली पीढ़ी के लोग भी हमारा उदाहरण दे सकें. यह कह सकें की जुनैब और सलमा जैसा सच्चा और सार्थक प्यार होना चाहिए .
सलमा- इतना भी जान लो तो यह काम सिर्फ हम ही कर सकते हैं की सुहागरात के पावन अवसर पर भी समाज और देश की सेवा करने का व्रत ले रहे हैं, वरना हमारी जगह पर कोई और होता तो उसे वासना के अलावा कुछ याद ही नहीं रहता .
जुनैब- हाँ, कोई और होता तो अब तक दो बार सेक्स कर चुका होता और मुंह मोड़कर अब तक बिस्तर पर भी सो भी चुका होता. और हो सकता है वही कल किसी दूसरी हसीना की बांहों में रात गुजार रहा होता .
सलमा- मैं तो पहले ही कह चुकी हूँ की लड़के बहुत बेवफा होते हैं.
जुनैब- हा हा हा... अच्छा ... मेरा हथियार मुझ पर ही चला रही हो. कोई बात नहीं, तुम्हें सात खून माफ हैं.
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