Sunday, May 8, 2011

भाग-५
घड़ी पास बैठी भी नहीं की घर जाने का फरमान भी सूना दिया . चलो , अंदर चलकर बैठते हैं
सलमा- नहीं बाबा, मुझे डर लगता है. इसका नाम ही ऐसा अजीब है-लव गार्डन. पता नहीं अंदर किस तरह के लोग होते होंगे .
जुनैब- अनादर चलकर देखोगी तब न पता चलेगा. तभी तो जानोगी की दुनिया कहाँ से कहाँ पहुँच गयी और तुम सौ साल पहले वाली जिंदगी जीना चाह रही हो. वो देखो, उस प्रेमी जोड़े को. दोनों एक दुसरे की बांहों में समाये हैं. इनेहं दीं दुनिया की कोई सुध -बुध नहीं है. इनेहं जो अपार सुख मिलता होगा वह स्वर्ग में भी नहीं मिल सकता . यह मानव जन्म बार-बार नहीं मिलता . जब हम जैसे भाग्यशाली लोगों को मिल गया है तो इसका सदुपयोग करना चाहिए . आइये मेरे साथ मैं तुम्हें कुछ दिखाता हूँ. उधर काउंटर की तरफ न देखिये मैं यहाँ पहले से ही टिकट लिए बैठा हूँ. हाँ, बस थोड़ी दूर और. वो देखिये . उस व्यक्ति की उम्र पचास से कम नहीं है. उसके साथ जो महिला है वो भी ४५-४८ साल के करीब होगी , दोनों के चेहरे किस तरह खुशी से दमक रहे हैं. मर्द के होठ उसके होठों से सटे हैं, देखने पर लघता है जैसे वे अम्रत प्याले का सुख भोग रहे हैं. कितना अद्भुत, कितना अनुपम द्रश्य है. इन्हें दीं दुनिया का कोई होश नहीं है, बस अपने काम में लगे हैं. अगर ये यही सोचते की मेरा साथी मेरे जिस्म को नहीं छूना चाहिए तब ये इतना आनंद प्राप्त नहीं कर पाते.
जुनैब की बात सुनकर सलमा ख्जामोश हो गयी, जुनैब ने उसका हाथ पकड़ रखा था और वह मूर्तिवत उसके साथ चली जा रही थी. उसको हैरत इस बात की थी की वह उसका विरोध क्यों नहीं कर रही थी . उसने देखा की महिला अपने पार्टनर के गुप्तांग से खेल रही थी. उनके जैसे और भी कई जोड़े रासलीला में मस्त थे. यह दुनिया कितनी रसीली थी, कितनी रंगभरी थी , कितनी अलग थी और जिस दुनिया में वह अब तक जीती आ रही थी वह कितनी गुमसुम, कितनी बदरंग और कितनी उबाऊ थी. तभी किसी ने इसका नाम लव गार्डन रखा होगा . उसने देखा की शाम होने को थी इसके बावजूद वहाँ सैकड़ों प्रेमी जोड़ी अपनी मस्त दुनिया में मगन थे. वे लोग झाडियों में छिपकर अपने प्रेम को परवान चढ़ा रहे थे. उसकी नजर एक यंग जोड़े पर गयी जो सेक्स कर रहा था. लड़की उस लड़के के ऊपर थी और लड़का नीचे से धक्का लगा रहा था. उन दोनों ने कपडे से खुद को ऐसे ढंके हुए था की उनका कोई भी अंग किसी को नहीं दिख रहा था , लेकिन वहाँ जो हो रहा था , उसे सब देख सकते थे , समझ सकते थे. सलमा के मन में जवान विचार अंगडाइयां लेने लगे . मगर वह अपने विचारो को एक साथ कैसे त्याग सकती थी . इसलिए बोली-
- यह सब क्या है जुनैब ? क्या तुम इस बेहयाई को प्यार कहते हो ? ये तो सरासर बेशर्मी है. कुछ बिगड़े हुए लोग अपनी वासना को शांत करने के लिए यहाँ पर इकठ्ठा हो गए हैं और आप लोग इसे लव गार्डन कहते हैं. अगर मुझे यही दिखाना चाहते थे तो मैं अब ये देख चुकी हूँ. अब चलें ?
जुनैब- ये फालतू लोग नहीं है सलमा. इनमे से एक भी बुरे चरित्र वाला नहीं है. ये सब के सब अच्छे खानदान से ताल्लुक रखते हैं. जीवन की भागदौड और काम की आपाधापी में लोग इतने पिस जाते हैं की अपने जीवन का उद्देश्य ही भूल जाते हैं. ऐसे में कुछ पलों को यादगार बनाने , कुछ पलों का सुख लूटने के लिए ये लोग अपने साथियों के साथ यहाँ पर आते हैं. शादी क्यों की जाती है. ज्कभी सोचा है तुमने ? ताकि सामाजिक तरीके से , कानूनी तरीके से लड़के-लड़कियां अपने जिस्म की प्यास को बुझा सकें . सुकून पा सकें और सन्तान की उत्पत्ती कर सकें . स्राजन्कर्ता तभी बना जाता है. समझीं आप. अगर दोस्ती में हम एक दुसरे को स्पर्श नहीं करेंगे , प्यार नहीं करेंगे तो आखिर क्या करेंगे ? तुम्हें यह सोने सा जिस्म मिला है मगर जब कोई इसका उपभोग करने वाला ही न हो तो इसका सोने का होकर भी क्या फायदा यहाँ तक की हीरे के होकर भी क्या फायदा . उधर देखो, वो लड़की , उधर सामने नहीं , साइड वाली, जो ग्रीन रंग के सूट में है, देखो तुमसे भी उम्र में छोटी होगी . उसका साथी ठंडा है मगर वह कितनी गरम है. देखो अपने साथी का पेंट खुद ही खोल रही है. और एक तुम हो की .
सलमा- साफ़- साफ़ क्यों नहीं कह देते की तुम अपना पेंट खुलवाने के लिए ही यहाँ पर आये हो ?

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