Thursday, May 5, 2011

भाग -२

कभी सोचती हूँ की भगवान को मैथ नहीं बनाना चाहिए था . फिर सोचती हूँ की साइंस नहीं बानाने थी और फाइनल में इसी नतीजे पर पहुंचती हूँ की अगर ये न होते तो दुनिया का स्व्र्रूप क्या होता ? साथ में ये भी ख़याल आता है की दू निया के स्वरूप चाहे जैसा होता यानी की मैथ और साइंस भी नहीं होते तो दुसरे कोई सब्जेक्ट होते और निश्चित रूप से भी हार्ड होते.

जुनैब- आपकी विचारधारा बहुत खूबसूरत है. जी चाहता है की तुम्हारे हाथ चूम्लू. आप बुरा तो नहीं मानेंगी अगर मैं आपका मुख चूम लेता हूँ तो ?

सलमा- यहाँ सबके सामने ? सब लोग देखेंगे और बात का बतंगड बना देंगे .हटो पीछे शरारती कहींके. चेहरे से तो शरीफ लगते हैं.

जुनैब - लेकिन यहाँ तो कोई भी नहीं है. सिवाय मेरे और तुम्हारे . वैसे भी मैं चुम्बन की बात कर रहा हूँ, सेक्स की नहीं जो की मुझे शर्म आयेगी . जब लोग आयेंगे तब की तब देखी जायेगी . फिलहाल तो सिर्फ हम तुम दोनों ही यहाँ पर है. अच्छा छोडिये , एक गिलास पानी पी लेता हूँ. फिर बैठकर तुमसे बातचीत करूँगा .

सलमा- पानी ये लीजिए , इधर है. अच्छा ये बताओ तुम पीतमपुरा में किस तरफ रहते हो ? मेरी एक सहली की शादी वहीं के मैरिज होम में हुई थी . तब मैं वहाँ पर गई हुई थी . बहुत बधिया जगह है.

जुनैब - पानी के लिए धन्यवाद . ये बताओ , सिर्फ सहेलिया ही रखती हो की कोई बॉय फ्रेंड भी है ?

सलमा - जी नहीं, अभी तक तो कोई मिला नहीं, हो सकता है. जल्दी ही मिल जाए . आजकल के बॉय फ्रेंड्स पर मुझे कंम भरोसा है , हाँ अगर कोई भरोसेमंद लड़का मिला तो सोचूंगी .वैसे तो मैंने अभी तक ऐसे किसी लड़के को देखा नहीं है.

जुनैब- किस तरह का दोस्त चाहिए तुम्हें ? गोरा हो या काला , लंबा या बौना ? उसके बारे में डिटेल बताइये तो मैं तलाश करता हूँ. जिस तरह की पसंद बताओगी उसी तरह का दोस्त तलाश कर लूंगी.

सलमा- मैं दोस्त के बारे में बात कर रही हूँ, हसबेंड के बारे में नहीं . समझे ? कैसा भी चलेगा बस झूठा और स्वार्थी न हो . मैंने सूना है की आजकल के बॉय फ्रेंड्स की नजर सिर्फ लड़कियों के शरीर पर होती है. वे किसी भी तरीके से बस जिस्म को हासिल करना चाहते हैं. ऐसे लोगों से भगवान बचाए , कोई सीधा लड़का रहे जो मुझे समझ सके. उसके विचार भले ही अलग रहें, कुछ फर्क नहीं पड़ता . बस वह मेरी भावनाओं को सम्जहने वाला लड़का चाहिए .

जुनैब-मेरे बारे में क्या ख़याल है. मैं सीधा सादा लड़का ह्जून. मेरे किसीके साथ कोई अफेयर भी नहीं है. मैं ज़रा भी स्वार्थी नहीं हूँ, अपने विचार भी तुम्हारे विचारों से मिला लूंगा .जो कहोगी मानूंगा और मैं सिर्फ तुम्हारे जिस्म से नहीं बल्कि आत्मा से दोस्ती रखूंगा .

सलमा- बस - बस रहने भी दीजिए , अभी हमें सोचने का मौक़ा दीजिए . सोचने के बाद बताउंगी . एक अच्छी दोस्त में क्या -क्या खूबियां होनी चाहिए , वो मैं अच्छी तरह से जानती हूँ. शादी नहीं की बरात तो बहुत की हैं.

जुनैब- मंजूर है. लेकिन इतनी प्रार्थना है की मेरे साथ न्याय करना, अन्याय मत करना . पहले अच्छी तरह से मेरी जांच कर लीजिए , मेरे घर पर आइये . घूमने -फिरने मेरे साथ चलिए . अगर गलत लगे तो दोस्ती ठुकरा देना , कोई दिक्कत नहीं. तब तक के लिए हम लोग एक साथ बैठ तो सकते हैं. दोस्त न सही मगर दोस्तों की तरह रह तो सकते हैं.

सलमा- बहुत चालाक और घाघ किस्म के नजर आते हो, जितने सादा तुम दिख रहे हो उतने हो नहीं. आज पहली बार मिले हो औअर पहली ही बार में दोस्ती का ऑफर रख दिया . अब मेरे करीब आना चाहते हो . कल को न जाने क्या -क्या करने की सोचोगे . समझ में आ रही है कहानी .

सलमा- करते -करते आखिर मैं क्या कर लूंगा . सिवाय प्यार के . इस जवानी का और होता भी क्या है. जो सब लोग करते हैं, मैं भी वही करूँगा . हाँ, ये वादा रहा की मैं जो भी करूँगा वह तुम्हारी सहमति से करूँगा . तुम्हारी मर्जी के बिना कभी कुछ नहीं करूँगा . अगर तुम्हारा मन बदलता है और तुम मेरे साथ अकेले में प्यार का खेल खेलना चाहती हो तो मैं सहयोग जरूर करूँगा .


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