Wednesday, May 4, 2011

दिलजले आशिक
सलमा के उभार कुछ ज्यादा ही अच्छे थे, ऊपर की और तने हुए , सख्त और घने . यूँ तो जवानी में हर तरह की गोलाईयां मर्दों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं मगर सलमा की बात ही अलग ठी, अगर उसकी उन्नत गोलाइयों पर किसीकी नजर पड़ जाती तो वह टकटकी लगाए देखता रह जाता था. सलमा को भी इस बात का इल्म था तभी तो वह मर्दों को अपने सामने आता देखकर बार -बार दुपट्टे को ऊपर-नीचे खिसकाती रहती थी. ताकि सामने वाला उसे देखे और ठंडी आह भरकर रह जाये , उसकी उम्र १८ से ज्यादा नहीं थी, मगर जिस्म पूरी तरह से भर गया था. उसके यौवन उभार उसकी चोली से बगावत कर बाहर निकलने के लिए बेताब रहते थे. उसकी आँखें और भी गज़ब की थी. आँखों का रंग झकाझक नीला था. अगर किसीने उनमे डूबकर एक बार देख लिया तो वह अपनी निगाहें हटाने के लिए जल्दी से राजी नहीं होता था. उसका फिगर तो कटरीना कैफ पर भी हावी था. इतना कसा हुआ बदन भारत की सैकड़ों अभिनेत्रियों के पास भी मौजूद नहीं है. वह साधारण परिवार की लड़की थी. मगर उसे चाहने वाले लखपति और करोड़पति थे. वह आम लड़की होते हुए भी खास -खास लोगों की चहेती थी. कभी उसने अपना सीना नपवाया तो नहीं था मगर देखने वाले कहते थे की सीना ३६ कमर १८ और हिप ३६ की रही होगी . यानी सौंदर्य प्रेमियों ने एक आदर्श हसीना का जो फिगर तय किया है , सलमा उससे भी कहीं बढ़कर थी . जब वह एक हाथ से अपने दुसरे हाथ पर ताली देकर खिलखिलाती तो हजारों रंग के फूल झड़ने लगते थे. उसके मोती जैसे सफ़ेद दांत हर किसीका मन मोह लेते थे. जुल्फों का तो कहना ही क्या . ऐसी बल खाती जुल्फें जो सामने वाले इंसान को दीवाना बनादें . जुनैब के साथ भी यही हुआ . वह जब कंप्यूटर क्लास में एडमीशन लेने आया तो पहले ही दिन उसकी नजर जुनैब पर पडी. जुनैब अपने इलाके के सांसद का लड़का था. व्यायाम करने वाले बच्चों का शरीर अपने आप दिख जाता है. जुनैब का कसा हुआ बदन इस बात की गवाही दे रहा था की वह जिम में जाकर सुबह शाम कई -कई घंटे जरूर पसीना बहता होगा. उसका व्यक्तित्व आकर्षक था. ऊपर से पिता का रूतबा . इस सबके बावजूद वह विनम्र लड़का था . घमंड नाम की चिड़िया अभी तक उसके जेहन में नहीं बैठ पाई थी. यही कारण था की जुनैब और सलमा पहली मिलाकात में ठीक ठाक घुल -मिल गए . सलमा को बाद में पता चला की जुनैब इतने बड़े घर का लड़का है. उसकी सादगी उसे भा गयी थे. कोलेज की छुट्टियाँ हो चुकी थी और सलमा ने कंप्यूटर सीखने के लिए क्लासेस में एडमीशन ले लिया था. उसी क्लासेस में जुनैब ने भी एडमीशन लिया था. दोनों के विचार मिलते थे . दोनों में पहले दिन कुछ ज्यादा बातें तो नहीं हुईं मगर जो भी बातें हुई वे सब रात को सलमा को याद आने लगीं, उसने हाथ बढाते हुए अपना परिचय दिया था -
- हाय , मैं जुनैब हूँ. इस क्लासेस में नया स्टूडेंट हूँ. मिलकर साथ रहेंगे तो पढाई भी होती रहेगी और ठीक तरह से टाइम पास भी हो जाएगा . बहुत से लोग ऐसे उलझे हुए होते हैं की वे अपनी समस्याओं में ही उलझकर रह जाते हैं. सारा समय उनका इसी मगजमारी में खत्म हो जाता है. वे न तो जी पाते हैं और ना ही जीने के बारे में सोच पाते हैं. ऐसे लोगों का जीवन व्यर्थ चला जाता है. मैं ऐसे लोगों से नफरत तो नहीं करता, लेकिन ऐसे लोग मुझे ज़रा भी पसंद नहीं है.
सलमा- वाव्व्व्व्व .... क्या बात कही है. पूरा वाक्य मुझे मुंह ज़ुबानी याद हो गया . क्या डायलोग है, क्या डायलोग डिलीवरी है. खूब जमेगी , जब मिल बैठेंगे .......फिर आगे कैसे है, वही समझ लो .
जुनैब- क्या आप अपने बारे में कुछ नहीं बताएंगी . आज हमारा पहला दिन है. एडमीशन का काम हो गया है, अब सर आने वाले ही होंगे. जब तक आते हैं, तभी तक गप्पे मारेंगे , उसके बाद पढ़ना शुरू , समझे गुरु ?
सलमा- मेरा नाम सलमा है, बहुत छोटा सा नाम है. पीतमपुरा में रहती हूँ. मेरे पिताजी पोस्टमैन हैं. इसलिए शायद उन्हें आप जानते होंगे . उनका काम रोजाना लोगों के घर आने जाने का है, इसलिए उनको सब जानते हैं. कई साल जो हो गए हैं. मैं उन्हींकी इकलौती बेटी हूँ. छोटा सा परिवार है. हम दोनों और एक हमारी बेटी .
जुनैब- वाह. क्या बात है., कौन -कौन से सब्जेक्ट आपको पसंद हैं ?
सलमा- वही जो इस उम्र में ज्यादा बच्च्जों में होते हैं, यानी मैथ , साइंस छोड़कर सब कुछ पसंद है. कभी-कभी सोचती हूँ तो सोचती ही रहती हूँ, कभी सोचती हूँ की भगवान को मैथ नहीं बनाना चाहिए था . फिर सोचती हूँ की साइंस नहीं बानाने थी और फाइनल में इसी नतीजे पर पहुंचती हूँ की अगर ये न होते तो दुनिया का स्व्र्रूप क्या होता ? साथ में ये भी ख़याल आता है की सुनिया के स्वरूप चाहे जैसा होता यानी की मैथ और साइंस भी नहीं होते तो दुसरे कोई सब्जेक्ट होते और निश्चित रूप से भी हार्ड होते.
जुनैब- आपकी विचारधारा बहुत खूबसूरत है. जी चाहता है की तुम्हारे हाथ चूम्लू. आप बुरा तो नहीं मानेंगी अगर मैं आपका मुख चूम लेता हूँ तो ?
सलमा- यहाँ सबके सामने ? सब लोग देखेंगे और बात का बतंगड बना देंगे .

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