भाग-८
सलमा- इस जगह पर मेरी जी घबरा रहा है. हमको यहाँ से चलाना चाहिए. किसी दिन फुर्सत मिली तो फिर यहाँ आयेंगे , उसके बाद इस टोपिक पर बात करेंगे . इस बार के लिए इतना ही काफी है.
जुनैब - तुम घबराती बहुत हो, इतना घबराने से कभी काम नहीं बनता . हमें हमेशा पोजीटिव रहना चाहिए . मैं जानता हूँ इस समय तुम झूठ बोल रही हो. इंसान दुसरे किसी से भी झूठ बोल सकता है लेकिन अपने आप से झूठ बोलना बड़ा कठिन होता है. ऐसा करते समय न तो उसकी जुबान ही साथ दे पाती है और ना ही उसके चेहरे के हाव -भाव- दिल अंदर से कचोटता रहता है इसलिए ऐसा होता है. जब दिल कहीं होता है और जिस्म कहीं और तो ऐसी स्थितियां बन जाती हैं. अगर अपने दिल की आवाज सुनोगी तो तुम भी इन्हीं प्रेमी जोड़ों की तरह मौज मस्ती करना चाहोगी , प्यार लेना और देना चाहोगी . अगर सिर्फ दिमाग की सुनोगी तो तुम्हारा जी घबराया सा लगेगा .
सलमा- तुम कोई जादूगर हो, मुझ पर वशीकरण मन्त्र चलाकर मुझे कब्जाना चाहते हो. तुम्हें मेरा जिस्म प्यारा लग रहा है न, इसीको पाने के लिए इतनी मेहनत कर रहे हो. जानती हूँ. मगर शायद आप नहीं जानते की यह जिस्म हमेशा चमकीला नहीं रहता है. वक्त आने पर स्किन सिकुड़ने लगती है. चेहरे का तेज कम होने लगता है. जब मेरे साथ भी ऐसा हो जाएगा तब क्या करोगे ? क्या तब भी तुम मुझसे उतना ही प्यार कर पाओगे ? नहीं, जब मेरे शरीर का आकर्षण कम होने लगेगा तो दूसरी ऐसी लड़की की तलाश करने लगोगे जो मुझसे भी ज्यादा सुन्दर होगी . मुझे छोड़कर फिर उसके पीछे पड़ने लगोगे .
जुनैब- ऐसी कोई बात ना तो है और ना कभी होगी , तुम जो भी कह रही हो ये सब मनगढंत बातें हैं,
सलमा- अगर मैं गलत कहती हूँ तो तुम एक बात सच बताओ, बोलो मेरे अंदर तुम्हें ऐसी क्या चीज अच्छी लगी जिस पर तुम दिलो जान से लट्टू हो गए, जबकि तुम तो बड़े बाप की औलाद हो. तुम्हें किसी चीज की कमी नहीं है, मेरे जैसी न जाने कितनी लड़की खुद ही तुम्हारे आगे -पीछे घूमती होंगी .फिर मैं ही क्यों ? मुझे इस क्यों का जवाब चाहिए .
जुनैब- अब मैं क्या कहूँ. तुम अपनी मुख से कहती हो की तुमसे अच्छी और भी लाखों हैं, जबकि मैं कहता हूँ की सारी कायनात में तुम जैसी न कोई है और न होगी . तुम्हारे अंदर मुझे कोई एक चीज अच्छी नहीं लगती बल्कि तुम समूची मुझे भा गयी . मेरे मन को तुम तो इतना भा गए हो, प्यार बनकर यार दिल पर छा गए हो. तुम्हारी हर अदा आहिस्ता-आहिस्ता मेरे जीने का मकसद बनती जा रही है.
सलमा- मैं तुम्हारे काबिल नहीं. तुम्हारी बराबरी की नहीं हूँ./ कहते हैं की रिश्ता बराबरी वालों से जोड़ा जाए तो बेहतर होता है. आप अपनी हैसियत वाली लड़की तलाश लीजिए . मैं तो आपके क़दमों की धुल के बराबर भी नहीं हूँ. और अगर पल दो पल दिल बहलाने की बात हो तो बाजार चले जाइए . आपको एक से एक सुन्दर और अदाओं वाली मिल जायेंगे . वहाँ न उनका कोई नुक्सान होगा और ना आपका. जिस्म बेचना उनका धंधा होता है , पैसा खर्च करना आपका शौक. जिसको जो चाहिए उसे वही मिल जाएगा . मगर हमारी आबरू का मोती अगर एक बार लुट गया तो फिर दुनिया के किसी बाजार में नहीं मिल पायेगा . इसलिए आप हमें माफ करें.
जुनैब- दुनिया में कोई छोटा -बड़ा नहीं होता. मालिक सबको सामान भेजता है. मेरे सामने तुम्हें इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए. जैसे ये लोग अपनी वासनाओं की पूर्ती कर रहे हैं, अपनी जिस्मानी प्युआस बुझा रहे हैं. मैं सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहना चाहता . इस प्यार की गाड़ी को मैं आगे भी बढ़ाना चाहता हूँ. तुमने ठीक कहा सलमा, अगर मुझे सिर्फ जिस्मानी सुख भोगना होता तो बाजार में एक से बढ़कर एक माल मिलता है. मैं वहाँ जा सकता था. लेकिन मेरा ये शौक नहीं है. मैं इस तरह के कामों को अच्छा नहीं समझता . मैंने तुमसे प्यार किया है और अगर मेरा प्यार सच्चा है तो एक न एक दिन मैं तुम्हें हासिल करके ही रहूंगा . और हाँ, तुम्हारे साथ सेक्स भी करूँगा. क्यों नहीं करूँगा ? आखिर तुम्हें देखने के लिए ही तो लेकर नहीं आऊंगा. अगर सेक्स नहीं होगा तो सृजन कैसे होगा. वंश आगे कैसे बढ़ेगा ?
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