Wednesday, May 18, 2011

भाग-१५
अब वही हो रहा है न, तुम अपने आपको प्यासी महसूस कर रही हो. तुम्हारे तन और मन दोनों में इस समय जोर की आग लगी हुयी है, मैं तो खुद को रोकने का प्रयास करता हूँ लेकिन तुम मुझमे समाने के लिए बेताब हो. मेरे गुप्तांग को देखने उसे छूने और फिर प्यार करने के लिए भी जी मचल रहा होगा . बोलो मैं सच कहता हूँ या गलत ?
सलमा - तुम अंतर्यामी हो क्या , मन के अंदर जियो जद्दोजहद चलती है वह तुम तक कैसे पहुच जाती है ? इधर मेरे मन में ख़याल आते हैं और उधर तुम पहचान जाते हो. पहचान क्या उसे बोल भी देते हो . सच -सच बताओ ये चक्कर क्या है
जुनैब- बात बस इतनी सी है कि तुम्हें अब मुझसे प्यार हो गया है. मैं तो तुम्हें टूट-टूटकर चाहता ही था, अब तुम भी मुझे उतना ही प्यार करने लगी है, और कहते हैं कि जहां चाह , वहीं राह होती है. यही वजह है कि जब तुम कुछ भी सोचती हो तो मैं अनुमान लगाता हूँ कि अगर स्थान पर मैं होता तो क्या सोचता ? और इस तरह मुझे सही जवाब मिल जाता है.
सलमा- कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे इश्क में पागल न हो जाऊं, मुझ पर कृपा बनाए रखना . चाहे जो सजा देना लेकिन कभी मुझसे दूर ना जाना, अगर दिल तोडना हो तो अभी से दिल मत लगाना . अगर मुझे जुदाई में तद्पाने की तमन्ना हो तो दूर ही रहना मुझसे . और अगर मेरे बहुत करीब आने की इच्छा है तो ये भी याद रहे कि कभी मुझसे पल भर के लिए दूर जाने के बारे में विचार भी मंत करना. तुम नहीं जानते उस स्थिति में कितना अनर्थ हो जायेघा .
जुनैब- अरे ये तुम क्या कह रही हो और ये आंसू कैसे . तुम रो रही हो ? इस मिलना की सबसे सुन्दर बेला में इस तरह रोना तुम्हें शोभा नहीं देता. ऐसा लगता है जैसे मैंने कोई गलत काम कर दिया है.
सलमा- नहीं, यह तुम्हारी कमी नहीं है. मैं ही अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाई और ये कमबख्त आंसू निकल ही गए. न जाने क्यों मेरा दिल कमजोर होता जा रहा है. जैसे- जैसे मिलन की खास बेला नजदीक आती जा रही है, वैसे -वैसे दहशत भी बढ़ती जा रही है. कुछ अनिष्ट की आशंका हो रही है.
जुनैब- अपने दिल से हर तरह का भरम निकाल दो. सिर्फ प्यार पर ध्यान लगाओ. दिल में अगर इश्क की ज्योत जली है तो उसे बुझने मत दो. मुझ पर भरोसा रखो और भूल जाओ की कहीं कुछ गलत होने वाला है. जिससे प्यार करते हैं, उसके प्रति कभी भी मन में बुरे ख़याल नहीं लाते . नेगेटिव थिंकिंग हमेशा नुक्सान ही पहुंचाती है.
सलमा- मैं बहुत कोशिश करती हूँ लेकिन कर नहीं पाती. बुरे -बुरे ख़याल आ रहे हैं, ऐसा नहीं हुआ तो क्या होगा ? ऐसा हो गया तब क्या होगा ? बस दिल पर और दिमाग पर काबू ही नहीं है.
जुनैब समझ गया, उन दोनों को पिए हुए काफी देर हो चुकी थी. यानी कि अब सर से नशा उतरा चूका था. उसने फ़ौरन दो अलर्ज पैग बनाए और उनमे से एक सलाम के आगे पेश कर दिया . पहले तो सलमा ने इनकार में सर हिलाया , फिर जल्द ही मान गयी और तेजी के साथ शराब को हलक से नीचे उतार लिया . उसे पीने के पांच मिनट बाद उसने अपने जिस्म में कुछ गर्मी सी महसूस की , अब उसका डर न जाने कहाँ खो चुका था. अब वह जुनैब के साथ मस्ती के तैयारी करने लगी. खुद जुनैब भी थोड़ा सा घबरा रहा था मगर जब उसने भी एक लार्ग पैग पी लिया तो घबराहट न जाने कहाँ काफूर हो गयी. अब तक जुनैब ने सलमा के शरीर से सारे कपडे उतार दियी थे. वह खुद भी नग्न हो चुका तहा. सलमा ने जब उसके कहास अंग को देखा तो आँखों में गर्मी सी आ गयी . आँखों में वासना के लाल -लाल डोरे तैरने लगे .सलमा की गोलाइयां बेहद आकर्षक थीं, इतनी ज्यादा आकर्षक कि जुनैब ने ने उनको आहिस्ता-आहिस्ता दबाना शुरू कर दिया . सलमा के बदन में गर्मी का एहसास होने लगा था . जुनैब का गुप्त अंग भी सख्त होकर तनकर खडा हो गया. उसने उसे सलमा के बदन से रगड़ना शुरू कर दिया था. उन दोनों का शरीर अब पूरी तरह से गर्म होने लगा . जुनैब ने सलमा की दोनों गेंदों को बारी- बारी से अपने मुंह में लेकर चूसना जारी रखा . इससे वे दोनों ही काम क्रीडा की मंजिल पर पहुँचने के लिए बेताब होने लगे, वासना का तूफ़ान अब जोर-जोर से चलने लगी थी. वे दोनों मुक्ति पाना चाहते थे. जिस्म में जो आग लगी थी, उसे इश्ज्क की फुहारों से बुझाना चाहते थे. दो जिस्म अब एक जान बनने की दिशा में बढ़ रहे थे. वे दोनों ही युवा थे और पहली बार जिस्म का खेल खेलने वाले थे. उन दोनों मको इस काम का कोई इल्म नहीं था .

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