Monday, May 9, 2011

भाग-६
सुकून पा सकें और सन्तान की उत्पत्ती कर सकें . स्राजन्कर्ता तभी बना जाता है. समझीं आप. अगर दोस्ती में हम एक दुसरे को स्पर्श नहीं करेंगे , प्यार नहीं करेंगे तो आखिर क्या करेंगे ? तुम्हें यह सोने सा जिस्म मिला है मगर जब कोई इसका उपभोग करने वाला ही न हो तो इसका सोने का होकर भी क्या फायदा यहाँ तक की हीरे के होकर भी क्या फायदा . उधर देखो, वो लड़की , उधर सामने नहीं , साइड वाली, जो ग्रीन रंग के सूट में है, देखो तुमसे भी उम्र में छोटी होगी . उसका साथी ठंडा है मगर वह कितनी गरम है. देखो अपने साथी का पेंट खुद ही खोल रही है. और एक तुम हो की .
सलमा- साफ़- साफ़ क्यों नहीं कह देते की तुम अपना पेंट खुलवाने के लिए ही यहाँ पर आये हो . मैं इस तरह के मिजाज की लड़की नहीं हूँ. मैं तो अपने काम से काम रखती हूँ.
जुनैब- ठीक है मान लिया बाबा. मगर ' काम ' से काम रखने को तुमसे मना किसने किया है . अगर 'काम' है तो सृजन है और सृजन है तो स्रष्टि है. देखो न सामने जो प्रेमी -प्रेमिका हैं वे इसी 'काम ' में तो लगे हुए हैं. प्रेंमी नीचे है और प्रेमिका उसके ऊपर है. दोनों ' काम' की नदी में गोते लगा रहे हैं. अबी तक तुमने तस्बीर का सिर्फ एक पहलू ही देखा है. तस्बीर का दूसरा पहलू तुम्हारी आँखों के सामने के सामने है. ये दुनिया बड़ी विशाल है. इसमें से ज्यादा बनहिं तो थोड़ी बहुत तो देखनी ही चाहिए .
सलमा- यहाँ पर मेरा मन बहक रहा है. मुझे यहाँ से कहीं दूर ले चलो , अब मैं यहाँ पर एक पल भी नहीं रह पाउंगी.
जुनैब- आओ मेरे साथ , वहाँ चलकर बैठते हैं. देखो उस तरफ. वहाँ ऊंचाई से सारा नजर साफ़ नजर आता है. वहीं बैठकर डिसीजन लेना की तुम अपना जीवन किस तरह जीना चाहती हो .
जुनैब ने इस बार भी उसका हाथ थामकर उसे लगभग खींचते हुए ऊपर ले गया . सलमा ने इस बार भी विरोध नहीं किया . यह एक ऐसी जगह थी जहां से पूरे लव गार्डन की हरकतों को देखा जा सकता था. सलमा ने देखा की एक प्रेमी जोड़ा अपनी मोहब्बत की दुनिया में मगन था . उसे किसीका कुछ ख़याल नहीं था. प्रेमी के होठ प्रेमिका के होठों से सटे हुए थे. प्रेमी अपने हाथ की उँगलियों से उसके यौवन दद्वार पर दस्द्तक दे रहा था. वह उसकी यौवन घाटी को सहलाते हुए आनंद ले रहा था, उसकी प्रेमिका भी खुशियों के पालने में झूल रही थी, उसने अपने प्रेमी के गुप्त अंग को अपने हाथ में ले रखा था और उसे आहिस्ता-आहिस्ता सहला रही थी. उन दोनों के पास से एक काला विषधर चुपचाप गुजर गया मगर उनको इस बात की खबर भी नहीं लगी. सलमा सोचने लगी की ऐसा कौन सा सुख है जिसे भोगने पर सांप के आने का भी एहसास नहीं होता . उसने देखा की जुनैब ने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया . सलमा ने इसे नजरअंदाज कर दिया, उसने महसूस किया जैसे वह भटक रही थी. अपने आप से उसका नियंत्रण हटता जा रहा था.उसने हैरानी होने लगी की वह इतनी कमजोर क्यों होती जा रही है . जुनैब ने उसके इस मूक समर्थन का पूरा फायदा उठाया, अपने हाथ का दवाब उसके हाथ पर बढ़ा दिया . अब वह चौंकन्नी हो गयी . वह कुछ कह पाती उससे पहले ही जुनैब पूछने लगा-
- कैसा महसूस कर रही हो मेरी सलमा ? यूँ गम सुम होकर क्या सोच रही हो ?
सलमा- सोचती हूँ की मर्द बड़े जालिम होते हैं, अपना काम निकालने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं . जबसे मेरी जवानी पर तुम्हारी नजर पडी है तभी मुझे पाने के लिए तुम मेरे पीछे पड़े हुए हो. और अगर तुम अपने मकसद में कामयाब हो भी गए तो बाद में पीछे मुड़कर देखने वाले भी नहीं की सलमा ज़िंदा है या मुर्दा . दूसरी कोई पैसे वाली लड़की देखकर निकाह कर लोगे .
जुनैब- नहीं रे सलमा , मैं ऐसा नहीं हूँ. मैं भरपूर प्यार करूँगा तुमसे . मैं सिर्फ तुम्हारे शरीर को नहीं पाना चाहता बल्कि तुम्हारे मन और आत्मा पर भी कब्जा करना चाहता हूँ, यह सच है. लेकिन इससे भी बड़ा सच ये है की मैं भी अपना दिल, अपना तन अपनी आत्मा तुम्हें समर्पित करना चाहता हूँ. ये सच अहि की तुम्हारे सीने की इन गोलाइयों ने मुझे रात-रात भर सोने नहीं दिया . मगर इस सबको पाने के लिए नहीं बल्कि तुम्हे हमेशा के लिए अपनाने के लिए मैं दृढ संकल्पित हूँ. मेरा प्यार छिछोरा नहीं है. यह सच्चा प्रेम है .यहाँ अगर प्यार नहीं तो कुछ भी नहीं होता. सामने जो तुम देख रही हो यह फिल्म नहीं सच्चाई है. ययहं कितने ही लोग प्यार में , कितने ही रोमांस में और कितने ही सेक्स के समुन्दर में डूबे हुए हैं.

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