भाग- ४
- अगर वो फैसला इकतरफा था, ये आकर्षण , ये लगाव इकतरफा है तो रात में तुम अकली यहाँ क्या कर रही हो ?
सलमा- देश आजाद है, कोई कहीं भी आ जा सकता है, किसी पर कोई रुकावट तो नहीं. इस गार्डन में हजारों लोग घूमने -फिनर के लिये आये हैं तो क्या ये निष्कर्ष निकाला जाए की सब आपसे ही मिलने के लिए आये हैं.
जुनैब- मेरे कहने का मतलब ये तो नहीं था. मैं तो ये बताना चाहता हूँ की तुम्हारे इन्तजार में मेरी क्या हालत हो गयी है .मैं तुम्हारे इन्तजार में सूख-सूखकर काँटा हो गया हूँ. अगर आज रात भर भी नहीं आतीं तो मैं यहाँ पर रात भर बैठा रहता और तुम्हारा इन्तजार करता रहता . यह सिर्फ कहने भर की बात नहीं है बल्कि मेरे दिल की गहराइयों की आवाज है. हो सकता है तुम्हें इसका एहसास ही न हो.
सलमा- मुझे इस तरह के लोग बड़े झक्की लगते हैं. ऐसे आशिकों से डर लगता है. मैंने अपने होने वाले दोस्त में इस तरह की कोई गुंजाइश नहीं देखी .
जुनैब- तुम कहोगी तो सब कुछ छोड़ दूंगा . जो भी आदत बुरे लगेगी उस आदत को ही त्याग दूंगा . मुझे बस तुम्हारा सामीप्य चाहिए , अगर तुम्हारे करीब न रह सका तो शायद मर जाउंगा . ये मैं कह नहीं रहा हूँ. जो सत्य है उसका वर्णन कर रहा हूँ. मैं ये नहीं कहता की मैं दीवाना हूँ, ये भी नहीं की मैं आशिक हूँ. मैं जो हूँ वो तुम्हारे सामने हूँ, यह वादा करते हुए की मैं अपने आपको तुम्हारे ढाँचे में ही ढाल दूंगा .
सलमा- ऐसा क्या है मेरे में , मैं एक साधारण लड़की हूँ. ले देकर अगर मेरे अंदर कोई गुण है तो वो ये की मैं एक जवानी की दहलीज पर कदम रखती हुई मामूली लड़की हूँ. लेकिन कुछ सालों के बाद मेरे अंदर से यह खासियत जाती रहेगी . जवानी का सूरज बुझ जाएगा , उस वक्त तुम क्या करोगे ? किसी दुसरे खिलते फूल की तरफ कदम उठाओगे ?
जुनैब- जी नहीं, मैं जिस आकर्षण में शिकार हूँ वह इतना साधारण नहीं है, यह अमर है. मैं तुम्हारे व्यक्तित्व से, तुम्हारे वजूद से प्यार करने लगा हूँ.
सलमा- मैं कैसे यकीन करू? सब लड़के ऐसे ही बोलते हैं. हम लड़कियों को ऐसे जुमलों को सुनने की आदत सी हो गयी है. अब इस दुनिया में लैला-मजनूँ, रोमोयो -जूलियट , हीर -रांझा जैसे प्रेमी तो रहे नहीं हैं. अब तो ये हाल हो गया है की लड़के बस लड़कियों को अपनी जिस्मानी प्यास बुझाने के लिए पटाते हैं. जब काम निकल गया तो पहचानने से इनकार कर देते हैं.मुझे न तो दौलत का लालच है, न किसी शौहरत का , मगर दोस्त बानाते समय मैं कुछ सावधानी बरतना चाहती हूँ. इसी कारण ये सब कर रही हूँ. अब मैं चलना चाहूंगी .
जुनैब- अगर तुम्हें बार -बार अपने जिस्म की चिंता हो रही है तो यह भी जान लीजिए की एक अदद जिस्म मैं भी रखता हूँ, मैं वादा करता हूँ की कभी तुम्हारे साथ कोई जिस्मानी रिश्ता नहीं रखूंगा . तुम्हें एक उंगली से स्पर्श भी नहीं करूँगा . अब बोलिए अब तो हम आपस में दोस्त बन सकते हैं की अब भी नहीं ?
सलमा- ठीक है मैं कल बताउंगी . अब रात होने लगी है , मुझे घर जाना होगा. सुना है इस लव गार्डन के पास कुछ अपराधी किस्म के लोग घुमते रहते हैं.
जुनैब- तुम उसकी फ़िक्र मत करो. गुंडे मवालियों को मैं सब देख लूँगा .बस अपनी बात करिये , अभी-अभी आयी हो. खड़ी-कहदी बातें कर रही हो . दो घड़ी पास बैठी भी नहीं की घर जाने का फरमान भी सूना दिया . चलो , अंदर चलकर बैठते हैं .
सलमा- नहीं बाबा, मुझे डर लगता है. इसका नाम ही ऐसा अजीब है-लव गार्डन. पता नहीं अंदर किस तरह के लोग होते होंगे .
जुनैब- अनादर चलकर देखोगी तब न पता चलेगा. तभी तो जानोगी की दुनिया कहाँ से कहाँ पहुँच गयी और तुम सौ साल पहले वाली जिंदगी जीना चाह रही हो. वो देखो, उस प्रेमी जोड़े को. दोनों एक दुसरे की बांहों में समाये हैं. इनेहं दीं दुनिया की कोई सुध -बुध नहीं है. इनेहं जो अपार सुख मिलता होगा वह स्वर्ग में भी नहीं मिल सकता . यह मानव जन्म बार-बार नहीं मिलता . जब हम जैसे भाग्शाली लोगों को मिल गया है तो इसका सदुपयोग करना चाहिए
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