Tuesday, May 31, 2011

भाग-२८
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सलमा- इतना भी जान लो तो यह काम सिर्फ हम ही कर सकते हैं की सुहागरात के पावन अवसर पर भी समाज और देश की सेवा करने का व्रत ले रहे हैं, वरना हमारी जगह पर कोई और होता तो उसे वासना के अलावा कुछ याद ही नहीं रहता .
जुनैब- हाँ, कोई और होता तो अब तक दो बार सेक्स कर चुका होता और मुंह मोड़कर अब तक बिस्तर पर भी सो भी चुका होता. और हो सकता है वही कल किसी दूसरी हसीना की बांहों में रात गुजार रहा होता .
सलमा- मैं तो पहले ही कह चुकी हूँ की लड़के बहुत बेवफा होते हैं.
जुनैब- हा हा हा... अच्छा ... मेरा हथियार मुझ पर ही चला रही हो. कोई बात नहीं, तुम्हें सात खून माफ हैं. मगर मैं किसी एक लड़के की बात कर रहा था . सभी लड़कों के बारे में मेरा ज्यादा कुछ कहना नहीं था. ये तो तुम भी जानती हो और हम भी जानते हैं की लड़के हों या लड़कियां सभी तरह के होते हैं , उनमे से कोई बेवफा भी हो सकता है और कोई नहीं भी हो सकता. हाथ की पाँचों उँगलियाँ बराबर तो नहीं होती न, मेरे कहने का मतलब ये था की हम अपनी उम्र वालों में अन्य से काफी बेहतर हैं और उनसे ज्यादा सब्र भी रखते हैं. उन लोगों से ज्यादा मोहब्बत भी है और उन सबसे बेहतर जीवन जीने का नजरिया भी रखते हैं. हमारे लिए इतना ही काफी है की हम दोनों साथ-साथ होते हुए भी, यहाँ तक की नग्न अवस्था में दोनों एक साथ हैं, चुम्बन ले रहे हैं , प्यार कर रहे हैं मगर किसी के दिलो -दिमाग पर भी वासना का भूत अभी तक सवार नहीं है. हमारे प्यार का इम्तिहान लेने वाले इससे बड़ा और क्या इम्तिहान ले सकते हैं ?
सलमा- मेरे मन में लड़कों के प्रति जो भावनाएं थीं अब वे नहीं हैं. अब से पहले तो मेरे मन में लड़कों की फ़िल्मी छवि बसी हुई थी , यही की लड़के पहले तो लड़कियों को अपने प्रेम के जाल में फंसाते हैं और फिर उनका शारीरिक और मानसिक शोषण करते हैं. इस स्थिति में लड़की का जीना दुश्वार हो जाता है.
जुनैब- फिल्मों में दिखाई गयी हर बात ठीक नहीं होती. हाँ , कुछ चीजें हैं जो बिलकुल सही होती हैं. हम उन्हीं के चककर में आ जाते हैं. सोचते हैं की सब कुछ उसी तरह हो रहा होगा . अब जैसे तुम इस ब्लू फिल्म को देख रही हो तो ये सब सीन सच्चे तो नहीं होंगे , ये ट्रिक होती है. ट्रिक के कारण कुछ द्रश्य ऐसे दिखाए जाते हैं जो बिलकुल ओरीजनल जैसे दीखते हैं. इसे देखकर हर कोई चक्कर में पड़ जाएगा . कोई सोच भी नहीं सकता की ये द्रश्य असली नहीं है. मैंने कई फिल्मों की शूटिंग देखी है. तभी तो दावे के साथ कह सकता हूँ की असली और फ़िल्मी कहानी में बड़ा फर्क होता है.
सलमा- यह तो मेरे लिए एकदम नया अनुभव है. मैं तो समझती थी की जिस तरह परदे पर नायक और नायिका रोमांस करते हैं हैं, वे सब हकीकत में ही होते होंगे. जिस तरह नायक फिल्म में नायिका के होठों को चूमता है, उसकी जीभ के अंदर जीभ डालकर यौवन के रस का स्वाद लेता है , क्या वह सब नकली होता है ?
जुनैब- हाँ, बड़ी नायिका इतना गहरा किस सीन थोड़े ही देंगी. उनके बिहाफ पर किसी दूसरी लड़की का सीन ले लिया जाता है. यह सीन इतने नजदीक से लिया जाता है की होठों की पहचान ही नहीं हो पाती.
सलमा- और इस ब्लू फिल्म में नायक-नायिका जिस तरह से शारीरिक सम्बन्ध स्थापित कर रहे हैं और जिस तरह से इसका फिल्मांकन किया गया है, यह सब भी ट्रिक की बदौलत किया गया है क्या ?
जुनैब- हाँ , मेरा तो यही व्सिश्वाश है. क्योंकि इसमें जिस तरह से लड़का और लड़की कियो बिना कंडोम के ही सम्बन्ध बानाते हुए दिखाया गया है, उससे डाउट होना स्वभाविक है. आजकल हर आदमी समझदार हो गया है, वह अखबार पढता है, रेडियो में समाचार सुनता है या फिर टीवी - इंटरनेट पर खबर पढता है, हर जगह यही दिखाया गया है की जब भी शारीरिक सम्बन्ध बने, जब भी कोई कोई प्रणय क्रीडा करे तो उससे पहले वह सुरक्षित उपाय जरूर करले. एड्स का खौफ हर आदमी पर छाया रहता है. ऐसे में ये सवाल ही नहीं उठता की यह हीरो इस तरह से बिना सुरक्षा के सम्बन्ध स्थापित कर सकता है. मैं यह बात मानने के लिए तैयार नहीं हूँ.
सलमा- अच्छा , अगर ये बात है तो इसका मतलब ये हुआ क्या की ये जो दिखा रहे हैं ये भी ट्रिक है ? यही न ?
जुनैब- जी , बिलकुल. मेरे कहने का अर्थ वास्तब में यही है. हांलाकि ये लोग एक हद तक खास द्रश्य देते हैं. यहाँ तक की अंग प्रद्रर्शन तो सचमुच करते ही हैं. मुझे ये बात एक खास व्यक्ति ने बताई है.
सलमा- तुम भी पहुंचे हुए उस्ताद लगते हो.
जुनैब- अगर मैं तुम्हें एक और बात बताऊंगा तो तुम्हारे पैरों के नीचे से जमीन खिसक जायेगी . तुम मदहोश हो जाओगी .

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