Saturday, January 1, 2011

बेवफा खंडहर वाली , भाग-९
अभिप्रिय- होंगी , मगर मेरी पहुँच से बाहर हैं. मैंने तो आज तक तुम जैसी खूबसूरत हसीना को नहीं देखा.
किरण- अब मैं चलना चाहूंगी , मुझे गुडगाँव छोड़ दीजिए.
अभिप्रिय- क्या सचमुच जाना चाहोगी ? या उससे पहले मेरे साथ डांस करना पसंद करोगी ? सब लोग डिस्को में थिरक रहे हैं. थोड़ी देर हम भी इंजॉय करलें तो भूख भी लगने लगेगी, नाचना तो सेहत के लिए लाभदायक रहता है .
किरण- मुझे कुछ होगा तो नहीं न ?
अभिप्रिय- कुछ क्या होगा ? हुआ तो लड़का ही होगा या फिर लड़की . इन दोनों के अलावा और कुछ नहीं.
किरण- तुम बहुत वो हो . शरारती कहींके... हटिये , मैं चली.
अभिप्रिय- ऐसे कैसे जाओगी मेरी जान. तुम खुद भी मेरे साथ मौज मस्ती करने का मन जों बना चुकी हो. ऐसे में जा नहीं पाओगी .होठों पे ना ना है , दिल में इकरार है. जानेमन , गुलबदन , एक सनम कहो न मुझसे प्यार
है , खो न मुझसे प्यार है ? कैसा लगा ये तराना ? मैंने खुद लिखा है. एकदम फ्रेश है. अभी-अभी तो उतारा गया है. ऐसा मदमस्त गाना अगर और भी सुनना चाहती हो तो रुक जाओ. यहाँ तक कि अगर दिल में रुकने की तमन्ना
बहुत कामो हो, याकि न हो तब भी रुक जाओ. बात ये है कि किसी भी तरह से सही, बस रुक जाओ. तुम क्या जानो , दिल में कितनी हसरत थीं तुम्हें देखने की. तुम्हें छूने की और तुमसे प्यार करने की.
किरण- अच्छा , आ गए औकात में ? आखिर मैं पहले ही जान गयी थी कि तुम्हारी नीयत में खोट है .
अभिप्रिय- अच्छा जी ... ये सब जानने के बावजूद भी तुम मेरे साथ आयीं, इसका अर्थ मैं क्या निकालूं, यही न कि मेरी नीयत जैसी भी है, मगर वो तुम्हें पसंद है.
किरण- तुम आज़ाद हो सोचने के लिए , कुछ भी सोच सकते हो ?
अभिप्रिय- हाँ जी, मगर हमारी कोई बात नहीं मानेंगी , चलो जी कोई बात नहीं है. कभी हमारा भी समय आएगा.
किरण- तुम उदास बहुत जल्दी हो जाते हो. निराशा को आशा में बदलने के हुनर सीख लीजिए, काम आएगा.
अभिप्रिय- आप साथ हैं तो वो भी सीख जाऊँगा. सबसे बड़ी चुनौती सिखाने की है , सीखने की नहीं. आप जों कहेंगी वो सीख लूंगा. तो अब चलें ?
सूरज- ओह, इसका मतलब सामने वाला भी उस्ताद था, कोई किसी से कम नहीं था. तब क्या हुआ ?
किरण- कुछ खास नहीं, वो चाहता था कि मैं उसके साथ डिस्को जाऊं, असली बात तो यही थी कि मेरा भी बड़ा मन था उसके साथ जाने का. दिखने में वह काफी शालीन और मृदु व्यवहार का धनी था. उसके चेहरे को एक बार देखकर
दोबारा देखने का मन चाहता था. उसका अंदाज बेहतर और आवाज मधुर थी. मैं इनकार नहीं कर पाई, उसके साथ डिस्को में जमकर डांस किया . खूब आनंद आया. मैंने महसूस किया कि हर पल मेरे जिस्म की उत्तेजना बढ़ती जा रही
थी. ऐसा लगता था जैसे किसी ने काम वासना बढाने वाली दवा खिला दी हो. हांलाकि यह सब एहसास बाद में ही हो पाया. उस समय तो मैं अभिप्रिय की बांहों में झूल रही थी. उसने मेरे होठों का चुम्बन लेते हुए कहा -
-कैसा महसूस कर रही हो जानेमन ? क्या तुम गुडगाँव में अकेली रहती हो ?
किरण- अच्छा लग रहा है. मैं वहाँ अकेली नहीं रहती , साथ में एक सहेली भी है. वह भी एअर होस्टेस है. दोनों साथ मिलकर फ्लेट में रहते हैं.
अभिप्रिय- फिर तो कोई टेंशन नहीं है. उसे फोन करके कहा जा सकता है कि तुम आज की रात किसी रिश्तेदार के यहाँ रुक गयी हो , सुबह आओगी .
किरण- हाँ , हाँ क्यों नहीं . एक एस एम एस छोडूंगी , तब भी बात खत्म हो जाओगी . क्या अब भी आपका मन नहीं भरा ? अब तो मैं आपकी बांहों में हूँ और आप मेरा चुम्बन भी ले चुके हो ?
अभिप्रिय- इश्क की आग सूना है बड़ी खतरनाक होती है. इसे जितना बुझाने जाओ यह उतनी ही ज्यादा भडकती है. अब तो इच्छा होती है कि बस तुम्हें लेकर किसी होटल चला जाऊं , रात भर आराम करने के बाद तुम्हें जहां जाना
हो वहाँ पर आराम से पहुंचा दूं, ड्यूटी जाना चाहोगी तो वहाँ छोड़ दूँगा और अगर गुडगाँव जाना चाहो तो वहाँ ले चलूँगा. वैसे एअर पोर्ट के बिलकुल करीब ही हमारा एक बँगला खाली पड़ा है , अगर तुम चाहो तो वहां पर रह सकती हो.
वहाँ नौकर रहते हैं, रसोइया है. किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं होगी, डैडी से कहकर मैं तुम्हें वहाँ शिफ्ट करवा सकता हूँ, इसके लिए तुम्हें कुछ भी पे नहीं करना होगा. खाना भी बना बनाया मिलेगा . मैं भी तुमसे मिलने वहां
पर आ सकता हूँ. अगर तुम्हारी सहेली भी तुम्हारे साथ रहना चाहे तो हमें कोई ऐतराज नहीं होगा. वैसे ये सब आपकी इच्छा पर निर्भर है, मैं तो आपकी परेशानियों की वजह से ऐसा कह रहा हूँ. आने -जाने की तकलीफ बच जायेगी .
किरण- हाँ, आने -जाने की तकलीफ तो है मगर हमें आपके बंगले में रहने से आपको भी तो परेशानी होगी ,
अभिप्रिय-क्या बात करती हो ? हमें क्यों दिक्कत होंगी , यह सौभाग्य होगा हमारे लिए.
सूरज- यानि कि आपको लंबा चौड़ा लालच दे दिया गया ?
किरण- जी हाँ, और उसी लालच में हमारी इज्जत लुट गयी.

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