Friday, January 14, 2011

भाग-22
िरण- हाँ, वह मेरी मजबूरी को समझ रही थी, मगर मेरे सामने वही थी इसलिए मैं उसको अपनी दुश्मन समझ बैठी थी. वह अगर कठोरता से बात नहीं करती तो उसे भी संदेह के गहरे में लिया जा सकता था . उसने
मुझे इशारों में थोड़ा सा समझाया और मैं ज्यादा समझ गयी. मैंने सबसे पहले वहां से निकलने की योजना बनाई. मै उससे बोली-
-अच्छा, ये बताओ कि अगर मैं अपना प्लान बदलती भी हूँ और तुम्हारी कंपनी ज्वाइन करती हूँ तो मुझे क्या मिलेगा ? महीने प् पगार बोलो ?
महिला- हर कस्टमर पर दस हजार मिलेंगे. ये पचास तो नथ उतराई थी और यह रस्म जीवन में एक बार ही अदा की जा सकती है.
किरण- दस बहुत कम हैं. २० हजार लूंगी और महीने में दस दिन से ज्यादा काम नहीं करूंगी , यानि कि दस रातों की रकम मुझे हर माह दो लाख चाहिए. सेवा भी उसी तरह करूंगी . ग्राहक को किसी तरह कि निराशा नहीं
होने दूंगी. जों वह चाहेगा, वही देने की कोशिश करूंगी. जब तक ग्राहक संतुष्ट नहीं हो जाता तब तक नहीं छोडूंगी . अब सोचलो, क्या फैसला करना है. अगर मैं बर्बाद होती हूँ तो आबाद किसीको नहीं होने दूंगी , और अगर मैं
संतुष्ट रहूंगी तो असंतुष्ट किसीको नहीं रहने दूंगी . मेरा यकीन है कि यह सौदा आपके लिए घाटे का नहीं रहेगा.
महिला- हमारे यहाँ एअर होस्टेस का जों रेट है वह आपको बता दिया गया है. इससे ज्यादा अगर कुछ लेना-देना है तो हमें मैनेजमेंट से बात करनी होगी.
किरण- मुझे भूख भी लगी है. अगर चिकन पककर तैयार हुआ हो तो बात कर लीजिए. आपके साथ खाने में मुझे खुशी होगी. और हाँ रात के उतारे का कुछ इंतजाम है कि नहीं ?
महिला- हाँ, हाँ क्यों नहीं ? इस चीज की तो यहाँ नदियाँ बहती हैं. अगर शराब नहीं तो जीवन जीने का मजा नहीं आता.
किरण- सच कहती हो. हम लोग भी ड्यूटी के दौरान इतने थक जाते हैं कि बिना दवा लिए दर्द ठीक ही नहीं हो पाता , हर हाल में इसका सहारा लेना ही पड़ता है.
महिला- लगता है अब तुम पूरी तरह तैयार हो चुकी हो. अगर चाहो तो दिन की भी एक बुकिंग आई है. फोरेन की पार्टी है. शाम को उसकी फ्लाईट है. जाने से पहले उसे नया माल चाहिए. अच्छा खासा माल देगा. मंजूर हो तो उसे
भेज देती हूँ, फिर आराम से तुम उसके साथ लंच और डिनर कर सकती हो. मौज की मौज और माल का माल.
किरण- उसके लिए जाना कहाँ होगा ? इसी फ़ार्म हाउस में काम हो जाएगा या ?
महिला- पार्टी तो अपने होटल की डिमांड करती ही है मगर कन्वेंस करने पर मान जाते हैं लोग. यानि कि इसे भी यहीं पर बुलाया जा सकता है. जब तक तुम नहा धोकर तैयार होती हो, मेकअप वगैरह करती हो तब तक मैं तुम्हारे
लिए दूसरे कपडे मंगवा देती हूँ और उसे भी यहीं बुला लेती हूँ. ५० साल से ऊपर का बुड्ढा है. एक मिनिट में फिनिश हो जाएगा. ज्यादा टाइम नहीं लगेगा. कभी -कभी तो ऐसे मर्द सिर्फ खाली फायरिंग करके ही रह आजाते हैं.
किरण- ठीक है , मुझे मंजूर है. फिर मैं खाने का ऑर्डर मेरे तरीके से दे दूंगी. पास वाले किसी फाइव स्टार से खाना मंगवा देना.
महिला- उसकी चिंता मत करो, वो सारी सुविधाएँ उपलब्ध रहेंगी, खुद मैं भी उपलब्ध रहूंगी. अपनी दुल्हन को मैं अकली थोड़े ही छोड़ सकती हूँ. जब चरम सुख का समय होगा, मैं तभी वहां से हटूंगी, थोड़ी देर के बाद मौज -मस्ती
के लिए मैं भी हाजिर हो जाउंगी. वैसे भी वह अजीब किस्म का इंसान है, उसने एक साथ दो लड़कियों की डिमांड की है. एक उसने आपका फोटो पसंद किया है और एक मेरा. तो हम दोनों उसे जल्दी ही निबटा देंगे.
बस इतना ख़याल रहे कि हमारे मेहमान का दिल नहीं टूटना चाहिए, वह जिस तरह भी और जैसे भी सुख वसूलना चाहता है, हमें उसका साथ देना होगा.
किरण- मैं शिकायत को कोई मौक़ा नहीं दूंगी, मगर ये बताओ कि मेरा फोटो उसने आखिर कहाँ देख लिया.
महिला- हमारी वेबसाईट पर भी उपलब्ध है.
किरण- इसका मतलब तुम लोगों ने हमें पक्की धंधेबाज औरत बना दिया है. जय हो.........
महिला- क्या करें , पापी पेट का सवाल हाई. मंहगाई इतनी हो गयी है कि जीने के लिए यह रास्ता भी चुनना पड़ता है. मजबूरी है. और देखा जाए तो मजा भी है. जों जिस तरीके से लेता है , ले सकता है.
किरण- मैं तो पूरे संसार में बदनाम हो जाउंगी , इस तरह का काम आपलोग क्यों कर आरहे हैं ?
महिला- जब तक तुम हमारी कंपनी की हाँ में हाँ मिलाओगी तब तक तुम्हें कोई तकलीफ होने वाली नहीं है. हमें जिसका फोटो दिखाना होता है उसे साईट ओपन करके दिकाह दिया जाता है. उस पर किसी भी लड़की
का ओरीजनल नाम नहीं लिखा होता बल्कि पेट नेम होता है. हम उसे वेबसाईट का एड्रेस भी नहीं बताते, तब तुम बदनाम कैसे हो जाओगी ,
किरण- और जों लड़की तुम्हारी बात नहीं मानती, उसके साथ क्या सलूक किया जाता है ?
महिला- उसे जग भर में बदनाम कर दिया जाता है. इतना ज्यादा बदनाम कि आत्महत्या करने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं बचता.

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