बेवफा खंडहर वाली , भाग-11
किरण- नहीं, वो तो इसका आधा भी नहीं था. उसमे इतना मजा नहीं था यार . जबकि तुम्हारे इस खास नाग को देखकर तो मेरा दिल बैठा जा रहा है. एक तरफ तो थोड़ी सी दहशत है तो और दूसरी तरफ आकर्षण भी . कैसा
लगेगा इसके साथ खेलकर ? आनंद आएगा या फिर तकलीफ होगी ?
सूरज- मैं ऐसा कोई काम नहीं करूँगा जिससे आपको परेशानी हो. मैं तो आपको सुख देने के लिए यहाँ पधारा हूँ. अचानक ही सही मगर सही इरादे से आया हूँ.
किरण- अगर आज थोड़ी सी तकलीफ भी होती है तो गम नहीं. आज तो पूरा लेने का ईरादा है.
सूरज- अगर आपने ऐसा ईरादा कर ही लिया है तो मैं भी कुर्बानी देने के लिए बेताब हूँ, चाहे मजा आये या ना आये मगर यह सत्य है कि मैं साथ दूंगा .
किरण- आ जाओ , मेरे आगोश में सिमट जाओ . मुझे ऐसे करीब लाओ कि ज़रा भी दूरी न रहे. प्यार के ऐसे रंग दिखाओ कि फिर सब रंग मुझे फीके लगने लगें. हर रंग मेरे जीवन में उतार दो सूरज .
सूरज- तुम्हें देखने के बाद मुझे सब अदने नजर आयेंगे यह तय है, मैंने कभी किसी लड़की के साथ जिस्मानी सम्बन्ध तो नहीं बनाए मगर हाँ, इतना है कि दोस्तों ने जों मुझे कुछ बताया है , उसके अनुसार मैं कोशिश पूरी करूँगा .
इसके बाद शब्द मौन हो गए . सूरज ने नग्न किरण की चिकनी जाँघों से अपने होठ सटा दिए. उसके हाथ अब ऊपर की तरफ बढ़ रहे थे. किरण का यौवन द्वार वहाँ से ज्यादा दूर नहीं था. सूरज ने हाथ बढ़ाकर उसकी यौवन घाटी
में पहले अपनी एक उंगली घुसाई और फिर दूसरी. हर बार वह आह , ऊह करके रह जाती थी, थोड़ा सा विरोध भी करती , जिसका वह खास ध्यान नहीं देता था, ज्यादा तवज्जो ही नहीं देता था. जैसे वह अगर अपनी यौवन घाटी
को सिकोडना चाहती तो सूरज थोड़ी सी जबरदस्ती कर लिया करता था , उसको तकलीफ देना अब उसने अपना धिकार समझ लिया था. अगर वह उसको आमंत्रण नहीं देती तब बात अलग थी , मगर आमंत्रण के बाद तो उसकी जैसे भय
ही खुल गयी थी. किरण भी मदमस्त हो गयी उसने सूरज के खास अंग के साथ खिलवाड करना शुरू कर दिया . उसका अंग पहले से ही सख्त था लेकिन अब उसका आकार और भी ज्यादा बढ़ गया. किरण उसको प्यार से सहलाते हुए बोली-
- इसको कब से पाल रखा है सूरज, यह बड़ा सुन्दर है .
सूरज- शुक्रिया. मुझे आपकी यह घाटी पसंद आयी. इसे चूमने को जी चाहता है.
किरण- दिल की सारी कसर पूरी कार्लो. कोई हसरत ऐसी ना रहे जिसे लेकर आप बाद में पछताओ.
सूरज- आपकी हर अदा कातिल है. और सभी पर अदा पर फ़िदा होने को जी चाहता है.
किरण- मगर जान तो एक है, इसे तो सिर्फ एक बार ही फ़िदा कर सकते हो . बाकी जान कहाँ से लाओगे ?
सूरज- मैं समझता हूँ कि जब तक दुनिया है , तब तक जान भी है, बस शरीर बदल जाते हैं, आकार बदल जाते हैं. जैसे कि इस जिस्म का भले ही एक ही जन्म हो , मगर जब हमें दूसरा जिस्म मिलेगा तो उसमे जान भी होगी ही.
किरण- जीवन और मौत के बारे में तुम्हारा क्या सोचना है ?
सूरज- जों पल मिलें उन्हें प्यार और आनंद के साथ जीना चाहिए .
किरण- अगर तुम्हें यह पता लगे कि तुम्हारी मौत हो चुकी है, तब कैसा महसूस करोगे ?
सूरज- खुशकिस्मत समझूंगा अपने आपको. क्योंकि हर किसीको को तो यह सौभाग्य भी नहीं मिलता कई मौत के बाद भी उसे कोई सूचित करे.
किरण- तुम कुछ अलग किस्म के हो सूरज, तुम्हारे जैसा इंसान बहुत कम मिलता है.
सूरज- तुमने मुझे इंसान कहकर पुकारा है, इसका मतलब है कि मैं अभी तक मृत नहीं हूँ. शायद कोई मुझे मारने की तैयारी कर रहा है.
किरण- अगर ऐसा कुछ होगा तो मैं तुम्हारे और तुम्हारी मौत के बीच आ जाउंगी , मगर तुम्हें ऐसे ही नहीं मरने दूंगी. आखिर तुमसे मोहब्बत जों हो गयी है. यह प्यार मैं ऐसे ही कम नहीं होने दूंगी . ना इसे खोने ही दूंगी .
सूरज- मौत अगर आती है, तो उसे कौन रोक सकता है ? तूफ़ान अगर आना है तो आकर ही रहता है.
किरण- जैसे इस वक्त हम दोनों के बीच में कामवासना का तूफ़ान आया हुआ है .
सूरज- हाँ, यह तूफ़ान जब गुजरता है तो बड़े आनंद की अनुभूति होती है.
किरण- तुम्हें कैसे मालूम ? जबकि तुमने तो किसी महिला के साथ शारीरिक सम्बन्ध ही नहीं बनाए हैं. अभी-अभी तो आप कह रहे थे .
सूरज- हमने ब्याह नहीं किये इसका मतलब यह तो नहीं कि बरात भी नहीं की हैं, अरे भाई अपनी मशीन है. जब जी चाहा. आनंद ले लिया. कम ज्यादा जों हुआ सो ठीक है.
किरण- बड़ी दिलचस्प बातें करते हो .
Monday, January 3, 2011
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