भाग-१५
मैं चाहता हूँ कि आप भी हमारी इस पक्की दोस्ती को एक्सेप्ट करें.
किरण- मैं समझी. आप कहना क्या चाहते हैं, स्पष्ट करें.
ब्रिज- जैसे हम साथ-प्साथ शराब का सुख उतहा रहे हैं वैसे ही अगर शारीरिक सुख भी लूटें तो कितना अच्छा रहेगा ?
अभी.- और इस कम में मेरा कोई ऐतराज नहीं है. हम मिलजुलकर प्यार बढ़ाना चाहते हैं.इसमें अलग एहे मजा आता है ?
किरण- तो उसके लिए दूसरे लड़की कहाँ हैं ? बिना पार्टनर के ये कैसा संभव है ?
सूरज- आपने बहुत सही सवाल किया, फिर ?
किरण- मेरा सवाल सुनकर दोनों ठहाका लगाकर हंस दिए बोले तुम हो न. तुम्हारे साथ दोनों ऐश करेंगे . अजी ऐश क्या करेंगे, आनंद देंगे. हम तो उलटा आपको ये सिखाएंगे कि जीवन का असली सुख क्या होता है.
ऐसे तो हर पल करोडों लोग अपने-अपने बेड पार्टनर के साथ मौज मस्ती करती हैं लेकिन उनमे से बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जों प्यार का वास्तविक सुख उठा पाते हैं. हमारी जों उम्र है इसके मुताबिक़ हमें अब मौज
मस्ती का सहारा लेना चाहिए. दिल में जों अरमान हैं, उन सभी को पूरा कर लेना चाहिए. बाद में जब बड़े हो जाते हैं तो तारह-तरह की बंदिशें हमारा रास्ता रोकती हैं. इसीलिए तो कहा गया है कि ज्यादा सयाना होना भी
ठीक नहीं होता. पहले ज़माना और था और अब क्रान्ति का युग है. इस युग में हम अगर मिल जुलकर सेक्स का आनंद उठाते हैं तो इसमें बुरा क्या हैं ?
किरण- यह क्या गज़ब कर रहे हो अभी. मैं वैश्या नहीं हूँ जों इस तरह का आचरण करूं,. हो सकता है कि कोई पेशेवर औरत भी अपने चरित्र से इतना नहीं गिरेगी जितना गिरने को तुम बोल रहे हो .
ब्रिज- ओह, ये क्या कह रही हैं आप ? ऐसी बात नहीं है जान. तुम जिस तरह से सोच रही हो वैसे सोचना बंद कर दीजिए. ऐसे हरगिज नहीं सोचा जाता. वी आर जस्ट फ्रेंड यार. फ्रेंड की तरह सलूक करोगी तो ठीक वरना
मैं यहाँ से चला जाउंगा. मेरे लिए लड़कियों की कोई कमी नहीं है. हजारों मौजूद हैं. इन्तजार करती हैं मेरा. रिक्वेस्ट करती हैं मुझसे . समझीं ? तो क्या वे सब भी बाजारू हो गयीं ?
अभिप्रिय- हाँ, डीयर. यह सच कह रहा है. हम लोग साथ में लेते हैं मजा. एक बार अगर तुम भी मजा लोगी तो बाद में बार-बार इसी तारह का सुख भोगने के लिए बोलोगी .
किरण- तो क्या फिर मैं हमेशा इसी तरह दो -दो लोगों को अपना जिस्म सौंपती रहूंगी . ?
अभी- ऐसे कौन बोलता है ? तुम अब भी आजाद हो. कोई भी काम तुम्हारी मर्जी के खिलाफ नहीं किया जा सकता. यहाँ आने के लिए भी तुम ही तैयार हुई थी, तुमने हाँ बोला तब मैंने इस फ़ार्म हाउस पर आने का फैसला
किया है. दिल पर हाथ रखकर बोलो क्या तुम्हारी भावनाएं नहीं मचल रही हैं. क्या तुम नहीं चाहती कि तुम्हारे जिस्म से जों शोले उठ रहे हैं , वे शांत किये जाएँ ?
किरण- मैं आपको जानती हूँ, आपसे प्यार करती हूँ. आपको यह जिस्म सौपकर मुझे कोई आत्मग्लानी नहीं होगी मगर ब्रिज को तो मैं नहीं पहचानती .
अभी.- ओहो, अच्छा ये बताओ कि तुम मुझे कितने सालों से जानती हो ?
किरण-आज ही तो मिले थे हम ?
अभी.- तो फिर ? धीरे-धीरे हम लोगों के बीच बातचीत हुई, एक दूसरे के विचारों का आदान -प्रदान हुआ और अब हम साथ में हैं. इसी तारह से होता है सब कुछ. कुछ देर के बाद ब्रिज को भी तुम जान ही जाओगी .
ब्रिज- हाँ, जब तुम इसकी दोस्त हो तो मेरी भी दोस्त हुई ना, अगर चाहो तो इससे पहले मैं आपको एक फिल्म दिखाता हूँ, आम भाषा में लोग इसे ब्लू फिल्म कहते हैं , मगर होती है बड़ी मजेदार , इसमें देखना
कि कैसे एक लड़की दो मजबूत मर्दों से एक साथ शारीरिक सम्बन्ध बानाने के लिए रिक्वेस्ट करती है और बाद
में वे लोग कैसे उसे चरम सुख तक पहुंचाते हैं. हम लोग दुश्मन नहीं हैं मेरी जान.
सूरज- तब क्या कहा आपने ? चुप हो गयी होंगी ?
किरण- नहीं, मैं चुप तो नहीं बैठी, थोड़ी देर तक उनकी अबतों का जवाब देती रही थी लेकिन वे समझ गए कि मैं कमजोर पद रही हूँ , और सच भी यही था. मैं कमजोर हो चुकी थी, शायद वे लोग मुझे कन्वेंस
कर चुके थे. उन्होंने दरवाजा बंद करके बड़े से स्क्रीन पर एक फिल्म स्टार्ट करदी . बड़ी नग्न फिल्म थी. उसमे स्त्री -पुरुष के अंगों को खुलेतौर पर दिखाया गाया था. कुछ ही देर में मैंने महसूस किया जैसे किसीने
मेरे जिस्म में बारूद भरकर माचिस की तीली जला दी हो. मैं कामवासना की आग में झुलसने लगी.
सूरज- उस वक्त सूरज और अभी. क्या कर रहे थे ?
किरण- अभी मेरे कपडे उतार रहा था जबकि ब्रिज उस फिल्म कोएडजस्ट करने में लगा था.
Friday, January 7, 2011
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