Monday, January 10, 2011

भाग- 19
- बस भी करो, मुझे बेचैनी हो रही है. बड़ी प्यास नह्सूस हो रही है, इस प्यास को बुझादों.
ब्रिज- अभी क्या है मेरी जान अभी तो शुरुआत है. एक दिन ऐसा आएगा कि तुम हम दोनों के लिए तरसा करोगी, आहें भरा करोगी.
अभी- हाँ, यह ऐसा लड्डू है जिसे खाने पर भी पछतावा होता है और नहीं खाने पर भी.
ब्रिज- हाँ , पहले तो तुम मना कर रही थीं, अब खुद ही कह रही .
किरण- बहस मत करो. मेरी इस आग को शांत करदो प्लीज, मुझसे बड़ी भूल हुई जों पहले इनकार किया. अब दोनों आओ और आकर मेरे ऊपर छा जाओ. अब अगर तुम लोग जल्दी नहीं करते हो तब पुलिस स्टेशन जाउंगी .
कहूंगी कि पहले तो मुझे इश्क का रोग लगा दिया है और अब दवा नहीं देते. मरीज का इलाज न करना भी तो एक तरह का गुनाह ही हुआ न.
सूरज और किरण बिस्तर पर आनंद भी लूट रहे थे और किरण उसे आपबीती भी सुना रही थी. वहां का माहौल देखकर कभी-कभी सूरज को डर भी होता था और कोफ़्त भी होती थी. मन में सोचता कि काश वह रिश्ते की सालियों
के साथ मौज मस्ती करने की नहीं सोचता तो यहाँ नहीं आना पड़ता. सालियाँ किसीकी शादी में गयी हुई थीं, वह न तो उनसे ही मिल पाया और उसके चक्कर में लेट और हो गया.उससे काफी मना भी किया गया था कि सांझ ढाले
इस तरह जाना ठीक नहीं, मगर वह अपनी आदत से बाज नहीं आया. उसे तो देर-सवेर चलने में ही मजा आता था,ताकि मोटर साइकिल पर लिफ्ट देकर महिलाओं का स्पर्श पा सके. वही लालच उसे इस रहस्यमयी होटल तक खींच लाया.
यहाँ उसे अजीब सा सन्नाटा प्रतीत होता था. न कोई चहल-पहल , न कोई आवाज. अजीब सी खामोशी पसरी हुई थी. जैसे शमशान का सन्नाटा होता है. जहां सिर्फ उदासी छाई होती है. उसी माहौल में वह अपने आपको रखने के लिए मजबूर
था, उसकी बांहों की आगोश में गज़ब की खूबसूरत महिला था, जों दावा करती थी कि एक रात रंगीन करने के लिए पांच लाख रुपये लेती है , मगर उसके लिए मुफ्त में उपलब्ध थी. उसकी सेवा सत्कार भी कर रही थी. कभी-कभी उसे ख़याल आता
कि आखिरकार वह उस पर इतनी मेहरबानी क्यों कर रही है. जबकि पेशेवर लोग तो सिर्फ अपने पेशे से मतलब रखते हैं. उन्हें इंसान से नहीं सिर्फ दौलत से प्रेम होता है. यह सवाल उसके गले में ही अटककर रह जाता था. किरण उसे
अपनी बर्बादी की दास्ताँ सुना रही थी, ऐसे में सब्जेक्ट बदलकर बात करना उसे नागवार गुजर सकता था. बात बनाने के मूड से वह बोला-
-ओह, इसका मतलब वे लोग खुद ही यह चाहते थे कि तुम ही मजबूर होकर उनके सामने समर्पण करो, ताकि उनके पास कहने के लिए यह तो रहे कि तुमने ही उन्हें शारीरिक संबंधों के लिए आमंत्रित किया था , यहाँ तक कि जिद भी की.
किरण- हाँ, अब तुम समझे. पहले तो उन्होंने धोखे से मुझे ऐसी दवा पिलादी , जिसे पीकर मेरी कामवासना भडकने लगी. साथ ही ऐसी फिल्म दिखादी जों तन -मन को आग लगा रही थी, इसके साथ ही शराब और सिगरेट भी पिला रहे
थे, मैं तो कामुक होनी ही थी. मेरी झिझक खत्म होने लगी थी. मैं उन संबंधों को बनाने के लिए आतुर थी, जिन्हें सभ्य समाज में निषेध समझा जाता है. यह सब उन लोगों की वजह से हो रहा था. उस समय तो मुझे कुछ ध्यान नहीं आया .
दोनों ने अपने तरीके से मेरे जिस्म का दोहन किया. यहाँ तक कि उनके प्रहार न सहने के कारण मैं बेहोश भी हो गयी. इसके बाद क्या हुआ मुझे नहीं पता. मुझे जब अगले दिन होश आया तो मैं उसी बंगलो के बिस्तर पर थी. पूरी चादर खों
से लाल हो रही थी. यह मेरा पहला सम्बन्ध था. मैंने उठने की कोशिश की मगर हिल-डुल भी नहीं पायी. मुझे भूख भी लगी थी और प्यास भी . होठ सूख रहे थे. मगर मैं कुछ बोल भी नहीं पाई. बड़ी मुश्किल से मैंने अपना हाथ पास में
रखी टेबल तक बढ़ाया, वहां पानी का भरा जग रखा था. मैंने उसमे से पानी पिया. तब जाकर चेतना लौटी. तब मैं समझ पाई कि किस तरह ड्यूटी से लौटते हुए मुझे अभिप्रिय उर्फ अभी. मिला था. कैसे वह मुझे रेस्टोरेंट ले गया. इसके बाद
डिस्को और फिर वह मुझे महरोली के इस फ़ार्म हाउस ले आया था. फ़ार्म हाउस के इसी बंगलो में उसने अपने दोस्त ब्रिज को बुलाया और मुझे उसके साथ भी सम्बन्ध बनाने के लिए मजबूर किया. मैं कुछ सोच ही रही थी कि एक अधेड महिला
हँसती हुई मेरे पास आयी. मैं नग्न अवस्था में थी. सिर्फ ऊपर चादर ढंकी हुई थी. उस महिला ने मुझे सहारा देकर बाथरूम तक पहुंचाया. मुझे नहलाने में मदद की और पहनने के लिए कपडे दिए.इसके बाद वह मुझे नाश्ते की टेबल पर ले गयी .
मैं कुछ बोलना चाहती थी, कुछ पूछना चाहती थी लेकिन उसने इशारे से मना कर दिया. वह समझाना चाहती थी कि नाश्ता करने के बाद सब कुछ बता दिया जायेगा. मुझे भूख लगी थी, इसलिए मैंने भी पहले पेट पूजा करनी ही बेहतर समझी.
जब पेट भर गया तो शरीर में थोड़ी सी ताकत आ गयी. जुबान भी हिलने लगी थी. मैं कुछ कहना ही चाहती थी कि उसने पचास हजार रुपये मेरे हाथ में थमा दिए. मैंने पूछा-
ये रुपये किसलिए ? मैं समझी नहीं ?
- ये तुम्हारा मेहनताना है. अगर नौकरी करोगी तो महीने भर में इतना कमा पाओगी , और अगर यहाँ पर सेवा देना चाहोगी तो हर रात की तुम्हें इतनी रकम मिला करेगी .
किरण- अभिप्रिय और ब्रिज कहाँ हैं ?
- वे चले गए. यह रकम उन्होंने ही दी हैं. अब तुम मुझसे संपर्क कर सकती हो. रात तुम्हारे साथ सुहागरातमनाने वाले ब्रिज ने यह कीमती हार भी तुम्हें तोहफे में दिया है. अब अगला कस्टमर ब्रिज के अलावा कोई दूसरा भी हो सकता है.
किरण- कस्टमर . क्या आपको मैं धंधेबाज लगती हूँ ? क्या कल रात मेरा सौदा किया गया था ?
-तो क्या इतनी रकम कोई ऐसे ही दे देता है ? तुम अकेली नहीं हो. हमारे साथ फिल्मों की नामचीन एक्ट्रेस, होस्टेस, कोलेज गर्ल सब जुडी हुई हैं.

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