Tuesday, January 18, 2011

भाग-26
चांदनी- लेकिन आप इतने पर्सनल क्यों हो रहे हैं ? क्या आप भी पत्रकार हैं ? आप तो ऐसे दलील दे रहे हैं जैसे कि आप मेरा स्टिंग करने आये हुए हैं ?
चंद्र- जी नहीं, मैं इसलिए यहाँ नहीं आया हूँ.
चांदनी- तो किस काम के लिए आये हैं ? रात रंगीन करने के लिए ?
चंद्र- जी नहीं, इसलिए भी नहीं. बल्कि इसलिए क्योंकि आप लोगों के लिए मेरे दिल में सोफ्ट कोर्नर है. मैं आपसे मिलकर आपके कुछ दुःख कुछ सुख शेयर करना चाहता था.
चांदनी- तो करिये न , कौन इनकार करता है . मेरे गले में बहुत दुःख हो रहा है. अगर एक हीरों का हर इसमें डाल दोगे तो यह दुःख भी दूर हो जाएगा , करोगे ऐसा ?आप तो कर भी सकते हैं. मेरे गले का दुःख भला कैसे देख पाओगे ?
चन्द्र- मैं नहीं समझता कि तुम मेरे हार के लिए मोहताज हो सकती हो, मेरे जैसे न जाने कितने लोग यहाँ पर आते होंगे और इस तरह की पेशकश करते होंगे.
चांदनी- हाँ , मगर आप सबसे स्पेशल हैं. हम लोग यहाँ हैं, इसके लिए हम अकेले नहीं बल्कि आप जैसे लोग ही जिम्मेदार हैं. अगर खरीदार न हों तो बाजार का अपना कोई महत्त्व नहीं होता. बाजार का अस्तित्व ही नहीं होता . आप जैसे
कद्रदान यहाँ आते हैं, बाजार को रौनक देते हैं. अपनी अलग-अलग तरह की डिमांड रखते हैं और फिर मजबूरन दलालों को भी दायरा बढ़ाना पड़ता है. अगर ग्राहक को माल पसंद नहीं आता तो वह नए माल की चाहत रखता है. उसके पास में
दौलत होती है, वह दौलत फेंककर तमाशा देखने की कोशिश करता है . और इसी प्रक्रिया में एक कली फूल बना दी जाती है/ किसी बेबस की अस्मत लूट ली जाती है. वे लोग आप जैसे ही होते हैं. आपने अब तक कितनी मजबूर कलियों
को अपने पैरों तले कुचला है, लहूलुहान किया है. खुद आपको भी मालूम नहीं होगा, क्योंकि आप जैसे लोगों को नशा करने के बाद कुछ पता ही नहीं चल पाता है कि किसकी आबरू से खेल रहे हो. फिर चाहे वो कोई भी क्यों न हो
चंद्र- ये क्या कह रही हो चांदनी, तुम आरोप लगा रही हो मुझ पर , मेरे चरित्र पर.
चांदनी- चरित्र ? कैसा चरित्र ? जों इंसान किसी मजबूर लड़की को पैसों का लालच देकर होटल में लेकर आता है, उसकी इज्जत का सौदा करता है. हर कोई उसकी औकात समझता है. जिस तरह कोई बेवड़ा शराब की बोतल हाथ में लहराकर
लोगों को उपदेश देता फिरता है और लोग उसकी हंसी उड़ाते हैं , वही हाल हो जाता है .
चंद्र- आप हद से आगे बढ़ रही हैं.
चांदनी- और आप क्या कर रहे हैं ? आपने उस दिन क्या किया था, जब जबरदस्ती मेरी इज्जत लूट ली थी.
चंद्र- मैं कहता हूँ, सोच -समझकर आरोप लगाओ. तुम नहीं जानती , किस्से बात कर रही हो.
चांदनी- कौन हो. बराक ओबामा तो नहीं न .
चंद्र- मैं तुम्हारे अड्डे को तहस-नहस करवा दूंगा, तुम्हारे पूरे गिरोह को जेल की चक्की पिसवा दूंगा, जानती नहीं हो मेरे को.
चांदनी- अच्छी तरह से जानती हूँ. तुम्हारा असली धंधा क्या है, वह भी पहचानती हूँ, तुम लड़कियों को फंसाकर उन्हें गलत रास्ते पर डालते हो, फिर चोरी से उसकी उल्टी-सीधी फिल्म तैयार करते हो और मनगढंत कहानी तैयार करके फिर
उसे टी वी चैनल पर दिखा देते हो. तुम्हारे सीनियर और टीवी के मालिक समझते होंगे कि बहुत बढ़िया कहानी दी है. वाह -वाह हो जाती है तुम्हारी . मगर ....
चंद्र- और क्या अगर , मगर ?
चादंनी -मगर आपकी असलियत तो हम समझते हैं न .
चंद्र- अब अगर एक शब्द भी बोला तो मैं ये भूल जाउंगा कि एक लड़की से बात कर रहा हूँ. तुम्हारा जों गिरोह चलाता है , वह भी सलाम मारता है हमें.
चांदनी- सलाम क्यों नहीं मारेगा, जब वह आपको हर महीने हफ्ता भी पहुंचाता है तो सलाम कौन सी बड़ी बात है ?
चंद्र- एक पत्रकार के साथ तुम इस तरह की वाहियात बातें करके आखिर सिद्ध क्या करना चाहती हो ? सती सावित्री बनने की आखिर कौन सी वजह है ? तुम्हें डर नहीं लगता ?
चांदनी- एक लड़की की इज्जत लूटने का षड्यंत्र रचकर आप भी क्या साबित करने पर तुले हैं ? क्या इससे मर्दानगी झलकती है ?
चंद्र- मैं तुम सबकी पोल खोल दूंगा. जिस्मफरोशी के गिरोह का भंडाफोड कर , तुम्हारी टीम को नेस्तनाबूद कर दूंगा.
चांदनी- उससे पहले तुम कहींके नहीं रहोगे, तुम यहाँ से निकल भी नहीं पाओगे , तब तक तुम्हारी नई नवेली बीवी के पास यह फिल्म पहुँच चुकी होगी. तुम्हारे सीनियर के पास और यहाँ तक कि मालिक के पास भी सबूतों के साथ
यह सूचना पहुँच जायेगी. तुम्हारे कईसाथी चाहते हैं कि तुम्हें चैनल में नहीं बल्कि जेल में होना चाहिए. उसका भी इंतजाम कर लिया गया है. कच्चा नहीं बड़ा पक्का इंतजाम है . जहां तक मेरा अपना ख़याल है , ६ माह से
पहले तो जमानत भी नहीं हो पायेगी. फिर कहीं पत्रकारिता करने लायक भी नहीं रहोगे.

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