Tuesday, January 4, 2011

बेवफा खंडहर वाली , भाग-12
सूरज- मौत अगर आती है, तो उसे कौन रोक सकता है ? तूफ़ान अगर आना है तो आकर ही रहता है.
किरण- जैसे इस वक्त हम दोनों के बीच में कामवासना का तूफ़ान आया हुआ है .
सूरज- हाँ, यह तूफ़ान जब गुजरता है तो बड़े आनंद की अनुभूति होती है.
किरण- तुम्हें कैसे मालूम ? जबकि तुमने तो किसी महिला के साथ शारीरिक सम्बन्ध ही नहीं बनाए हैं. अभी-अभी तो आप कह रहे थे .
सूरज- हमने ब्याह नहीं किये इसका मतलब यह तो नहीं कि बरात भी नहीं की हैं, अरे भाई अपनी मशीन है. जब जी चाहा. आनंद ले लिया. कम ज्यादा जों हुआ सो ठीक है.
किरण- बड़ी दिलचस्प बातें करते हो .बातों के साथ-साथ अदाएं भी बड़ी दिलचस्प हैं. पहली ही रात में मुझ पर इतने मोहित हो गए कि मौत से भी बेख़ौफ़ हो गए . अब तुम्हें डर नहीं लगता. जबकि मौत का नाम सुनकर अच्छे -अच्छे तुर्रम खां
भी थर-थर कांपने लगते हैं. मगर तुमने तो उसे भी दुत्कार दिया. मौत के सामने तुमने मुझे ज्यादा तरजीह दी, इसका साफ़-साफ़ अर्थ ये हुआ कि तुम अपनी जिंदगी से ज्यादा मुझे महत्त्व देते हो.
सूरज- बेशक, मेरे लिए जिंदगी का अर्थ है तुम्हारे साथ बिठाये गए पल. चाहे वे किसी भी लोक में हासिल क्यों न हो. मेरा दिल सिर्फ तुम्हारे रूप पर ही मोहित नहीं हुआ है बल्कि आपकी सच्ची बातों और दिलकश अदाओं ने भी इसे अपना दीवाना
बनाया है. तुम्हारी आँखों में झांकता हूँ तो अपने लिए प्यार झलकता है. सामान झलकता है. विश्वाश झलकता है. और इतनी सब चीजों के लिए तो मैं किसी भी हद तक जा सकता हूँ. क्या तुम भी इतना ही प्रेम कर पाओगी मुझसे ?
किरण- ये भी कोई कहने की बात है. मेरा दिल जानता है, मेरा ईश्वर जानता है, मैं जानती हूँ , तुमसे कितनी मोहब्बत हो गयी है. इस मोहब्बत को तुम भी यूँ ही सलामत रखना और मैं भी इसे ऐसे ही बनाए रखूंगी .
सूरज- तुम अपने पहले प्यार अभिप्रिय के बारे में बता रही थीं, मगर बातचीत बीच में ही कट गयी . बताओ न उस दिन बंगलो में में ले जा कर आप लोगों ने क्या किया ?
किरण- पहले तो हम होटल में ही थे. वहाँ पर कोफी में धोखे से उसने कामुकता बढाने वाली दवा मिलाकर मुझे कोफी पिला दी थी. उसी के प्रभाव में आकर मैं अभिप्रिय के साथ डिस्को में नृत्य करने चली गयी. वहाँ पर पहले से ही नशे में धुत कपल
डांस का आनंद उठा रहे थे, बेफिक्र होकर एक -दूसरे के होठों का चुम्बन ले रहे थे . वह माहौल मेरे लिए नया और उकसाने वाला था. मादकता पैदा करने वाली दवा ने भी असर दिखाना शुरू कर दिया था. इसी कारण मैं अभिप्रिय की बांहों में झूलने
लगी , जैसा करने का वह निर्देश देता, मैं वैसा ही करने लगती थी. यहाँ तक कि उसके होठों को चूमने लगी. मेरी कुंवारी भावनाएं बगावत पर उतर आयीं. वह पक्का खिलाड़ी था. एक मंजे हुए नेता का बेटा. उसने सब कुछ पहले से ही तय कर रखा था .
मैं उसकी योजनायों से अनजान थी, उसने मुझसे पूछा-
-कैसा महसूस कर रही हो ? पहले तो यहाँ आने से बहुत इनकार कर रही थीं, अब देखता हूँ कि जमकर इंजॉय कर रही हो ?
किरण- हाँ, पहले मैं जानती नहीं थी कि यहाँ पर ऐसा मजा आता होगा . मेरे दिमाग में ऐसी तस्बीर थी कि यहाँ पर बहुत शोर शराबा होगा , न अजाने कैसे लोग होंगे . लेकिन यहाँ आकर जाना कि सभी लोग सुलझे हुए हैं. किसीको किसी दूसरे
से कुछ लेना -देना नहीं है. सब लोग अपनी ही दुनिया में मगन हैं.
अभिप्रिय- किसको इतनी फुर्सत है कि दूसरे के फटे में अतंग डाले . यहाँ लोग अपनी जिंदगी के गम मिटाने आते हैं, तकलीफें भुलाने आते हैं. दम लगाने आते हैं. तुमने गीत सूना है -'दम मारो दम, मिट जाए गम '
किरण- हाँ, बहुत अच्छी तरह से लेकिन दम से नफरत ही करती हूँ.
अभिप्रिय-मेरे कहने से एक बार मस्ती का जाम छलकाया है तो यह सुट्टा भी मार्के देखो, मस्ती के अथाह समुन्दर में डूब जाओगी .
किरण- ये लोग जों सिगरेट पी रहे हैं, उसमे से बड़ी अजीब तारह की स्मेल आ रही है, मैं इसका इस्तेमाल नहीं कर पाउंगी. तुम करना चाहो तो स्वागत है.
अभिप्रिय- जब मेरा इतना कहना माना है तो इतना भी मान ही लीजिए. मैं जलाता हूँ, ये लों मारो दम.
सूरज- तो क्या उसके कहने से आपने सिगरेट में भी दम मार लिया ?
अभिप्रिय- सिर्फ सिगरेट का नहीं बल्कि ड्रग्स का भी. उसमे ऐसा नशा मिलाया गया था, जों इंसान को अपना गुलाम बना लेता है. मैं तो एक सुट्टा मारते ही खुद को हवा में नाचता हुआ महसूस करने लगी , तभी उसने पूछा-
-स्वर्ग में उड़ रही हो ना ? यही है इसका मजा. दुनिया की कोई तकलीफ अब तुम याद ही नहीं रख पाओगी . सारे गम भूल जाओगी.
किरण- हाँ, सच कहते हो. मैंने तो कभी कल्पना भी नहीं की थी कि इसमें इतना मजा आता है.
अभिप्रिय- यह तो कुछ भी नहीं है असली मजा तो अभी बाकी है. जानती हो वो मजा क्या है ?
किरण- बताओ न.
अभिप्रिय- जिस्मानी सुख. एक बार अगर जवानी का यह रस चख लोगी तो बाकी के सारे रस तुम्हें फीके लगने लगेंगे.

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