लवगुरु-८४
अब केशव तो रानी के पैरों की तरह से चूम रहा था और रमन उसके मुख की तरफ से. बेहद कामुक द्रश्य ठा. केशव की उंगलियां इस समय
रानी के यौवन द्वार पर गर्दिश कर रही थीं, और रमन के हाथ रानी के यौवन उभारों पर थे. रानी खुश थी , रही -सही कसर चम्पा ने पूरी करदी. वह रानी के पेट से अपने यौवन उभारों को स्पर्श कर उसको और भी ज्यादा
उत्तेजित करने का प्रयास करने लगी. इसका सकारात्मक असर भी देखने को मिला. कुछ ही समय में रानी के जिस्म में कामोत्तेजना का ज्वालामुखी फटने को तैयार हो गया .यही हाल केशव, चम्पा और रमन का भी था .
रमन का गुप्तांग इस समय काले नाग की तरह फडफडा रहा था. रानी उसे सहला-सहलाकर और भी ज्यादा कामोत्तेजित कर रही थी. चम्पा इस तरह का व्यवहार कर रही थी , मानो वह अपनी अनिच्छा से देवर रमन के साथ
रोमांस कर रही हो, जैसे कि रानी के आदेश का पालन करने के लिए वह बहुत बड़ी कुर्बानी दे रही हो. हांलाकि उसका पति केशव भी जानता था कि उसकी पत्नी उसकी गैर मौजूदगी में रमन के साथ बिस्तर पर रंगीन खेल
खेलती है. मगर चम्पा को इस बात का इल्म नहीं था. हांलाकि जब रानी ने उससे रमन के बारे में सवाल किये तब उसे थोड़ा सा संदेह जरूर हुआ था. मगर वह संदेह इतना ज्यादा नहीं ठा कि उसके दिलो -दिमाग पर ही
हावी हो जाए. वैसे जब इंसान किसी मुसीबत में नहीं होता तो यही सोचता है कि वह कभी भी मुसीबत का शिकार नहीं होगा . काफी देर तक वे लोग रोमांस करते रहे , उअर जब काम वासना की आंधी जोर पकड़ने लगी और
रानी को ऐसा एहसास होने लगा कि अब तन पर ज्यादा देर तक काबू नहीं रखा जा सकता तो बोली-
-आज तुम तीनों ने ,मुझे जिस आनंद से परिचय कराया है, वह लाजवाब है. मैं पूरी दुनिया में घूम चुकी हूँ लेकिन कभी भी ऐसा मजा नहीं आया.
केशव- ऐसे तो हम कहने वाले थी. आप हमारी अन्नदाता हैं. आपकी वजह से हमारा परिवार पलता है. अगर हम आपकी इतनी भी सेवा नहीं कर पायें तो क्या फायदा ?
चम्पा- हां, मैंने तो यहाँ तक सूना है कि जों अन्नदाता होता है , उसका स्थान देवताओं से भी बड़ा होता है. हम भी आपका उतना ही मान करते हैं.
रमन- और फिर यहाँ तो गिव एंड टेक वाला मामला है. आप सिर्फ अकेली ही तो मजा नहीं ले रही हैं. हम खुद भी तो इस आनंद सागर में गोते लगा रहे हैं.
रानी- तुम लोग भी न, बहुत बातुनी हो. ऐसा करो , अब पहले मेरे ऊपर केशव आये , जब वो मुझे अपनी बांहों में उठा लेगा तो चम्पा का काम होगा कि वह केशव के अंग को आहिस्ता-आहिस्ता मेरे अंग में प्रवेश करने की
कोशिश करे और रमन का कम पीछे से शुरू होगा. धीरे- धीरे रमन मेरे पिछले द्वार से अपने अंग को प्रवेश करेगा.
चंपा- समजह गयी मालकिन, और जब कहीं कोई दिक्कत होगी तो मैं उसे दूर करूंगी .
रानी- इन दोनों की हेल्प करने के बाद तुम अपने होठ मेरे होठों से सटाना , और पीछे से केशव आहिस्ता-आहिस्ता मेरे सीने की गोलाइयों को दबाएगा . एक उंगली से केशव क्या करेगा मालूम है ? अरे चम्पा के यौवन द्वार
को सहलायेगा. इसके बाद आहिस्ता-आहिस्ता सहते -सहते उँगलियों की संख्या भी बढ़ती रहनी चाहिए .
केशव- मैं भी समझ गया. हर बात मेरे दिमाग में घुस चुकी है.
रमन- खेल के रूल मैं भी जान गया हूँ अब स्टार्ट करते हैं, किया जाए क्या ?
रानी- हाँ , और एक बात ये भी ध्यान रहे कि आज तुम दोनों भाइयों के इम्तिहान की घड़ी है. तुममे से जों कोई ज्यादा ताकतवर होगा वह पहले मुझे संतुष्ट करेगा और खुद असुन्तुष्ट ही रहेगा . मेरे बाद उसे चम्पा को भी
सम्पूर्ण सुख देना है. हांलाकि लास्ट में उसे ज्यादा ताकत की जरूरत नहीं होगी . क्योंकि तब तक तो चम्पा भी काम वासना की तूफ़ान में घिर चुकी होगी और उसे ज़रा से सहारे की जरूरत ही रह जाएगा .
केशव- ठीक है. आज यह काम मैं ही करके दिखाउंगा, भरोसा है मुझे अपने आप पर .
रानी- क्यों , डर गया क्या ? ये तो नहीं सोच रहा कि अगर ऐसा हुआ तो रमन को चम्पा को सुख देने का मौक़ा मिल जाएगा ?
केशव- मैं क्यों डरने लगा ? क्या यह पहले से इसके साथ रंगरेलियां नहीं बनाता ? मेरे सामने भी कर लेगा तो क्या घिस जाएगा ?
रानी- उस दिन तो बड़ा गुस्से में था , आज क्यों नरम रुख अपना रहा है ?
केशव- उस दिन मैं नादान था, आपने वह नादानी का कीड़ा निकाल दिया है.
रमन- मुझे माफ कर दीजिए .
चम्पा- और मुझे भी. बिना पूछे मुझे कुछ नहीं करना चाहिए था.
रानी- राईट, जब तू प्यार से अपनी समस्या केशव के सामने रखती और उसे सब उंच-नीच समझाती तो शायद वह राजी हो जाता , मगर तुम्हें धोखा नहीं देना चाहिए . उदाहरण सामने है. जब केशव से आज की मौज मस्ती के बारे में
बताया तो यह तुरंत राजी हो गया न. अब बिंदास मौज लों. कुछ नहीं बिगडता है.
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