Saturday, October 16, 2010

लवगुरु-६९ मैं देखना चाहती हूँ कि बिना कपड़ों के तुम करीब से कैसे लगते हो. आह ... देखो न, मेरा बदन अकिसा टूट रहा है,हड्डी,पसली सब चटक रही हैं.
केशव-कुछ ही पलों के बाद तुम्हें जवानी का असली मजा चखाउंगा, उस वक्त सब कुछ ठीक हो जाएगा. बस थोड़ी देर का ही कष्ट है. इसके बाद एक स्थिति ऐसी और आयेगी जबकि तुम्हें तकलीफ होगी, अगर वह
पड़ाव भी पार कर लिया तो जिदगी में मजे ही मजे हैं. एक बार , सिर्फ एक बार या ज्यादा से ज्यादा एक दिन तक थोड़ा सा दर्द होगा . वह दर्द तुमको सहना होगा. मैं जानता हूँ तुम बहादुर हो और आसानी से
ये सब सहन कर सकती हो . ये लीजिए मैं जाम तैयार कर चुका हूँ चीयर्स , ये थोडं सा अजीब भी है और रोमांचक भी कि मुझे अप दोनों अम बेटियों की सेवा करने का अवसर मिल रहा है .
बिजली- रोमांच का असली सुख तो तब हासिल हो जब तुम मुझे भी उसी तरह का आनंद दो जैसा कुछ देर पहले मोम को दे रहे थे. उनकी गर्म आहों से मेरा बदन जला जा रहा था , जानते हो कई बार तो मैं
ऐसा सोचती थी कि बस, अब बहुत हो गया अब हनुमान की तरह लंका में कूद जाना चाहिए . अर्थात , मैं किसी भी तरीके से उस कमरे में दाखिल होना चाहती थी जिस कमरे में तुम दोनों कामक्रीड़ा की मस्ती
में डूबे हुए थे. मैं देख रही थी कि आप लोगों को किसी और का कोई होश नहीं था. आप दोनों तो बस एक अलग ही दुनिया में थे.
केशव- हाँ बिजली, असल में जब दो जिस्म आपस में टकराते हैं तो उससे निकलने वाली तरंगें बहुत कामुक होती हैं, मादक होती हैं. इंसान अपने आपको भूल जाता है. उसे कुछ याद नहीं रहता.
बिजली- अच्छा, चलो चीयर्स , आज तो कोकटेल हो गया. कोई बात नहीं, खासकर हमें कुछ करना भी नहीं है. कल शनिवार है. पूरे दिन ही सोते रहना है.
केशव- ओके, चीयर्स ... आपको भले काम न हो मगर मुझे तो दिन भर इधर से उधर भागते रहना है. आखिर नौकर जों ठहरा.
बिजली- मझे तो पहले से ही ज्यादा जागने की आदत नहीं है. अगर रात को देर से सोयी तो सुबह देर से ही जाग पाति हूँ, लेकिन तुम्हारे साथ तो ऐसा कुछ नहीं होगा न ?
केशव- हुआ भी तो कोई फर्क नहीं पड़ता. तुम्हारी खातिर तो महीने भर भी दिन रात जाग सकता हूँ.
दो -दो पैग पीने के बाद केशव और बिजली को सुरूर छाने लगा. मष्तिष्क घूमना शुरू हो गया. केशव ने तो पहले से ही दो लार्ज पैग ले रखे थे. पीने के कारण बिजली की कामुकता और बढ़ गयी थी.
वे दोनों बिलकुलन नग्न हालत में थे. केशव अब बिजली के कोरे और खूबसूरत बदन को चूम रहा था. उसकी जीभ का स्पर्श बिजली को उतीजित कर रहा था, उतीजना को महसूस करने और उसका आनंद
उठाने के लिए बिजली ने अपनी दोनों आखें बंद करली. केशव बिजली के सीने के उभारों को आहिस्ता-आहिस्ता दबा रहा था. बिजली गर्म आहें भर रही थी. उसे अपार हर्ष की अनुभूति हो रही थी. वह चाहती
थी कि दुनिया उसी स्थान पर रुक जाए और जब भी प्राण निकलें आनंद के उसी अतिरेक में निकलें, मगर मन की इच्छा कभी पूरी नहीं होती . न कोई समय को ही रोक पाया है . वक्त तो निरंतर चलायमान रहता
है. जों होशियार लोग होते हैं वे वक्त की रफ़्तार से अपनी रफ़्तार को सेट कर लेते हैं. नादाँ लोग पीछे रह जाते हैं. उन दोनों के जवान जिस्मों से कामवासना की चिंगारियां निकलने लगी. केशव ने बिजली की जाँघों
के बीच में अंगुली डालकर सहलाना शुरू कर दिया. थोड़ी देर में ही बिजली बेचैनी की हदें पार करने लगी. उसे अपने ऊपर खींचने लगी. दोनों के बदब से कामवासना का ज्वालामुखी फूटने को बेताब होने लगा
जब दोनों बेकाबू होने लगे तो केशव ने अपनी समूची शक्तियों को समेटकर अपने लिए एक खास स्थान बनाया और प्रहार कर दिया. बिजली के मुंह से जोरदार चीख निकल पडी. जिसका डर था, वही हुआ . लेकिन वो तो अच्छा था
कि केशव पहले से ही इसके लिए तैयार था, उसने फ़ौरन बिजली के मुंह पर अपनी हथेली रखदी और जोर -जोर से धक्के मारने लगा. बिजली अपने आपको छुडाने की पूरी कोशिश में जुटी थी मगर जब कोई जवान मर्द
इस पोजीशन में हो तो महिला पार्टनर का कोई वश नहीं चल पाता है . और आखिरकार दोंनो मंजिल पर पहुंचकर ही ठन्डे हुए. जब वे दोनों पूरी तरह से सन्तुष हो गए तो बिजली के होठों को चूमकर पूछने लगा-
- कैसा लगा बिजली ? अब तो दर्द नहीं हो रहाहै ?
बिजली- नहीं, अब उतना नहीं मगर उससे पहले बहुत हो रहा था. ऐसा लगा जैसे मेरे प्राण निकल जायेंगे .
केशव- मैंने तो पहले ही समझाया था तब तो आप बहुत बहादुरी का प्रदर्शन कर रही थीं ?
बिजली- वो मेरी भूल थी, लेकिन अब क्या होगा ? अब कोई दिक्कत तो अंहिं आयेगी ? मेरा मतलब है कि डॉक्टर के पास जाने की जरूरत तो नहीं ?
केशव- बिलकुल नहीं, यह तो थोड़ी देर का ही मामला है. अगली बार खेल खेलेंगे तो ठीक हो जाएगा .
बिजली- अपने तो अपनी पत्नी के साथ भी मजा लिया है .अब से पहले भी ले रहे थे , कैसा लगा मेरे साथ ?
केशव -सच अखून तो सबसे अलग अनुभव था. तुम बिलकुल कोरी हो. सच्ची कुंवारी . तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाने का मजा ही कुछ और है .
बिजली- और थोड़ी देर पहले जिसके साथ कर रहे थे ?
केशव- जमीं आसमां का अंतर है. आप तो आप हैं. हूर की परी हैं. स्वर्ग की अप्सरा जैसी.

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