Saturday, October 30, 2010

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ेशव- मैं अपने दोस्त के संवेदनशील अंग को सहलाता था और मेरा दोस्त मेरे खास अंग से खेलता था, यह सिलसिला तब तक चलता था , जब तक कि तन की वासना शांत न हो जाए .
रानी- क्या ऐसे जिस्मानी सुख मिल जाता ठा ?
केशव- क्या पूछोगी , बड़ा मजा आता था, और कोई साधन भी नहीं था. हम लोगों में ऐसी दोस्ती होती थी कि अगर किसी एक ने भी कोई लड़की पटाली तो अबकी के सब लोग उसके साथ कामक्रीड़ा का सुख भोगते थे
रानी- ओह, कितना मजा आता था न ? काश , मैं भी उसमे शामिल हो पाती . क्या अब ऐसा हो सकता है ?
केशव- आज भी तो हो ही रहा है. अगर आप उस समय नहीं उपस्थित रह पाईं, तो क्या हुआ ?मैं समझता हूँ कि आज वो कसर पूरी हो जायेगी. सच कहूँ तो आज हम लोग जितना सुख भोग रहे हैं.
चम्पा- और मैं भी चाहती हूँ कि आक का दिन यादगार बने, ऐसा यादगार कि फिर कभी कोई आनंद इसे कमजोर न कर सके. हमेशा हम यही ख़याल करते रहें कि इस सुख के आगे सब सुख छोटे हैं. और इसके लिए मैं अपनी तरफ
से कोई कसर नहीं छोडूंगी. मैं अपनी जान लड़ा दूंगी .
रानी खुश हो गयी , उसे अब यकीन हो गया कि आज की रात उसके लिए बहुत विशेष होने वाली है. रानी के ध्यान में अब सिर्फ यही बात थी कि अगर केशव का भाई रमन भी आ जाता तो मामला जबरदस्त जम जाता .
रानी के पास पैसा तो अथाह हे था , बस पति की तरफ से वह संतुष्ट नहीं थी. वह चाहती थी कि जब केशव उसे संतुष्ट कर रहा हो, उस समय केशव भी चम्पा को शारीरिक सुख प्रदान करे. आखिर उसकी दुविधा को केशव ने
पकड़ लिया. उसने कहा-
-आप क्या सोच रही हैं मालकिन ? अगर कोई और भी आदेश हो तो बताएं, हम लोग आपके सेवक हैं . सेवा करना ही हमारा फर्ज होता है. हमें अच्छा लगेगा अगर आप खुश हो जाएँ. हमारे लिए तो यही सब कुछ है . मतलब आप ही
सब कुछ हैं. आपके कारण ही हमारा जीवन है. हम हमेशा आपके चरणों के सेवक बनकर आपको सुख देना चाहते हैं.
रानी- अच्छा ठीक है. जब तुम लोगों की ऐसी हे इच्छा है तो कोई बात नहीं , मैं चाहती हूँ कि आज की रात को अमर बनाने के लिए इस वक्त रमन की जरूरत है. उसको भी इस महफ़िल में शामिल करो, उसे भी पिलाओ -खिलाओ
और उसे ऐसा बानादो कि उसकी शर्म-झिझक सब दूर हो जाए. वह भी यहाँ पर अपना बनकर काम कर सके. और एक बात याद रहे, बीच में अगर-मगर कोई न करे. मैं जैसा बोलती जाती हूँ , वैसे करते जाओ.
केशव- मगर यहाँ आकार रमन करेगा क्या ?
-रानी- मैंने मना किया था न अगर-मगर के लिए ? यह मगर अंतिम होना चाहिए .रमन को यहाँ आकर चम्पा से प्यार करना है. वह इसे संतुष्ट करेगा और मैं इस केशव के साथ मजा लूंगी . उस वक्त इस कमरे में दो जोड़े मिलकर
आनंद लेंगे. टीवी स्क्रीन पर अश्लील फिल्म चलेगी और कमरे की लाईट भी जलती रहेगी , ताकि हम एक दुसरे को अपनी आँखों से मस्ती करते देख सकें. अगर यहाँ पर दो महिलायें और एक पुरुष रहा तो कुछ खास मजा नहीं
आएगा. यहाँ तक कि कुछ तकलीफें भी हो सकती हैं. जैसे कि केशव जब मुझे मजा दे रहा होगा तो चम्पा की भावनाएं भी भडकने लगेंगी . वासना का तूफ़ान इसे परेशान करेगा तब क्या करोगे ? हाँ, ये बात अलग है कि
रमन के रहते ये समस्या नहीं आयेगी. अगर चम्पा और रमन अपने आप पर काबू कर लेते हैं, और आपस में सम्बन्ध नहीं बनाना चाहते तो कोई बा नहीं, और अगर काम वासना का तूफ़ान इनको अपने ध्येय से हटा देता है तब भी कोई बात
नहीं, क्योंकि विकल्प के तौर पर रमन तो मौजूद रहेगा ही .
केशव- हां, मालकिन सच कहती हैं. तुम कपडे पहनकर उसे फ़ौरन यहाँ ले आओ .
चंपा ने तुरंत आज्ञा का पालन किया , अपने कपडे पहनकर वह आंधी की तरह निकली और तूफ़ान की तरह रमन को साथ लेकर आ गयी . यह माहौल उसके लिए बिलकुल नया था. उसने गाँव में तो ऐसा सब देखा नहीं
था. गाँव का नजारा तो अलग ही होता था. वहाँ तो ज़रा -ज़रा सी बात पर लोग जान लेने और देने पर आमादा हो जाते थे. फिर भी रमन ने अपने आपको जल्द ही संभाल लिया.
रानी के बिंदास मिजाज के कारण वह उन लोगों में जल्दी ही घुल-मिल गया.केशव ने रानी के शरीर को ऊपर से नीचे तक चूमना आरम्भ कर दिया और रमन इस समय चम्पा के होठों को चूम रहा तह. प्लान के
मुताबिक़ पहले से ही एक कामुक फिल्म की डीवीडी स्टार्ट कर दी गयी . रमन को अपेक्षाकृत ज्यादा बड़े पैग दिए जा रहे थे ताकि वह जल्दी से मदहोश होकर उनके बराबरसुरूर में आ जाए . रानी की यह योजना कामयाब
भी हुई. रमन शराब के नशे में झूमने लगा . उसने अपने सारे कपडे उतारकर फेंक दिए. अब उस कमरे में चारों नग्न अवस्था में थे. चम्पा का इशारा पाकर रमन ने उसे तो छोड़ दिया और वह रानी के होठों से अपने होठ
स्पर्श करने लगा. रानी ने भी उसका हौसला बढ़ा दिया . अब केशव तो रानी के पैरों की तरह से चूम रहा था और रमन उसके मुख की तरफ से. बेहद कामुक द्रश्य ठा. केशव की उंगलियां इस समय
रानी के यौवन द्वार पर गर्दिश कर रही थीं, और रमन के हाथ रानी के यौवन उभारों पर थे. रानी खुश थी , रही -सही कसर चम्पा ने पूरी करदी. वह रानी के पेट से अपने यौवन उभारों को स्पर्श कर उसको और भी ज्यादा
उत्तेजित करने का प्रयास करने लगी. इसका सकारात्मक असर भी देखने को मिला. कुछ ही समय में रानी के जिस्म में कामोत्तेजना का ज्वालामुखी फटने को तैयार हो गया .

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