लवगुरु , भाग-७१
ेशव- ऐसा ही होगा, मगर वो कर्ज ? जों मैंने बताया था , याद है न. सुबह उसका इंतजाम हो जाए तो मैं सुबह ही गांव चला जाऊं और रात को फिर वापस आजाऊं ?
बिजली- ठीक है, सुबह जल्दी गाँव मीकल जाना, पैसे मैं अभी दिए देती हूँ. हमेशा एक बात रखना, कभी मुझसे चालाकी करने की कोशिश मत करना. मेरी जरूरत तुम हो और तुम्हारी जरूरत है पैसा . पहली ही
मुलाक़ात में इतना तो मैं भी समझ ही गयी हूँ, वरना किसी खूबसूरत और कुंवारी लड़की की सेज पर बैठकर कोई मर्द दौलत की बात नहीं करेगा . हो सकता है यह मजबूरी भी हो . लेकिन देखा जाए तो हर इंसान
किसी न किसी तरह से मजबूर होता ही है . सबको कोई न कोई जरूरतें लगी रहती हैं. और ऐसे अवसरों पर ही पता चलता है कि किसकी जरूरत कितनी ज्यादा है ?
केशव- जी बिलकुल . आप बेफिक्र रहें , मैं आप दोनों माँ बेटियों की बहुत सेवा करूँगा , और अगर इस सेवा के बदले मैं अपनी दरिद्रता भी दूर कर लेता हूँ तो आपको कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए .
बिजली- क्या कोई ऐसा रास्ता नहीं है, जिससे कि तुम सिर्फ मेरा ही एंटरटेन कर सको. आज के अलावा ऐसा कुछ करो कि तुम्हें मोम के पास जाना ही न पड़े. उनके लिए कोई विकल्प तलाश कर लीजिए .अरे हाँ, मैंने
तुम्हें ये कहते सुना था कि तुम्हारा कोई भाई भी है, जों शायद गाँव में तुम्हारी बीवी के साथ रंगरेलियाँ भी मनाता है. क्या तुम उसको यहाँ नहीं बुला सकते ? जब सुबह गांव जा ही रहे हो तो उसे भी साथ लेते आना.
केशव- ठीक है, जब आप कहती हैं तो ले आउंगा , मगर आपकी मदर से इस तरह पीछा छुड़ाना आसान नहीं हैं, सच तो ये है कि वे बहुत कामुक हैं. अकेली आदमी से उनकी भूख शांत होने वाली नहीं है. वे उसके साथ
भी मस्ती करेंगी और मेरे साथ भी. कह भी रही थीं. मुझे ऐसे नहीं छोडेंगी . जानती हो, अभी एक अबर और बुलाया है. एक बार तो मैं उनको संतुष्टि दे ही चुका हूँ, अब और बुला लिया है . मैं भी इंसान हूँ यार ,
मशीन तो नहीं हूँ जिसे जब चाहा स्टार्ट कर दिया और अपना काम निकाल लिया . यार वे बहुत कामुक हैं. बुरा ना मानो तो कहूँ कि अपने जमाने में उन्होंने न जाने क्या-क्या गज़ब ढाए होंगे .
बिजली- अब शैतानी पर मत उतरो, जाओ अपनी ड्यूटी पूरी करो. मर्द होकर बात -बात पर रोने बैठ जाते हो.
केशव- ठीक है , अब आराम से सो जाओ, मीठे-मीठे सपने देखो, अब हमारी मुलाक़ात कल रात को ही होगी, मुझे गाँव जाना होगा. भाई को भी लाने की कोशिश करता हूँ. उसको यहाँ काम भी मिल जाएगा और उसकी
काम वासना की पूर्ती भी होती रहेगी. हांलाकि एक दिक्कत आ सकती है .
बिजली- डराते क्यों हो ? अब कौनसी दिक्कत टपक पडी ?
केशव- जब मेरा छोटा भाई , रमन यहाँ आएगा तो मेरी पत्नी भी आने की जिद करेगी , और उसके रहते तो कुछ हो नहीं सकता . इसलिए उसको भी संभालना होगा. पहली बात तो रमन ही नहीं चाहेगा कि वह मेरे
साथ यहाँ पर आये , क्योंकि उसे तो वहीं -पर सारा आनंद मिल जाता है. खाने के लिए खेत में अनाज हो जता है , खर्चे के लिए मैं पैसे भेज देता हूँ और मौज मस्ती के लिए तो मेरी पत्नी है ही.
बिजली- उसे थोड़ा सा हिंट दे देना , बता देना कि शहर में नया -नया माल मिलेगा, लार टपकने लगेगी , अपने आप भागकर आ जाएगा . वैसे भी वह आपकी बीवी के साथ कामक्रीड़ा करते-करते ऊब गया होगा .
केशव- कोशिश करना मेरा काम है. आशा करता हूँ कि सब कुछ ठीक ठाक तरीके से ही हो जाए, जैसा सोच रहे हैं, वैसा ही.
फिल्म में आनंद आ रहा था .मुंशीजी और डोली उस फिल्म के प्रत्येक द्रश्य को बड़े ध्यान से देख रहे थे . यह एक धनाढ्य परिवार की बहू रानी , उसकी बेटी बिजली और नौकर केशव के बीच की रोमांटिक
कहानी थी. उसमे दिकहया गया था कि जब महिलायें शारीरिक रूप से संतुष्ट नहीं हो पातीं, और जिनके पति कमजोर होते हैं , उनमे से कुछ अतृप्त महिलायें किस तारह से अपनी कामेच्छाओं की पूर्ती करने के लिए
चरित्र से गिरकर कुलटा बन जाती हैं. डोली ने पहली टिप्पणी की-
-वाह, फिल्म का तो जवाब नहीं, फिल्माने का तरीका बेहद सुन्दर है. कलाकार भी मंजे हुए लगते हैं . मगर प्रोब्लम ये है कि आवाज कुछ क्लियर नहीं है. शायद ये पायरेटिड कोपी है.
मुंशीजी- हाँ, मगर सब कुछ समझा जा सकता है. ऐसा भी नहीं है कि आवाज बिलकुल अस्पष्ट ही हो .
डोली - हाँ , सो तो है. बहुत सही दिखाया गया है. एक बार जब इंसान अपने चरित्र से गिर जाता है तो फिर वह गिरता ही रहता है. जैसे रानी का हाल हुआ है. रानी ने केशव को नौकर तो इसलिए रखा था ताकि
वह उसके साथ रंगरेलियां मना सके. अपनी हवस की पूर्ती कर सके, मगर हुआ उसका उलटा ही . उसकी बेटी ने उन दोनों को कामक्रीड़ा करते हुए अपनी आँखों से देख लिया और वह नौकर केशव के साथ जिस्मानी
सम्बन्ध बना बैठी. इसलिए बुजुर्ग कहते हैं कि जब बच्चे बड़े हो जाएँ तो बहुत सोच समझकर काम करने पड़ते हैं.
मुंशीजी- हाँ अभी आगे देखना भी महत्वपूर्ण होगा , यह जानना जरूरी है कि केशव अपने भाई को गाँव से शहर लेकर आया कि नहीं ?
डोली- कहीं ऐसा तो नहीं कि वह बिजली से २५ हजार निकालकर भाग गया हो ? कुछ भी हो सकता है.
डोली- मेरे ख़याल से ऐसा नहीं हुआ होगा. आजकल के लड़के इतने मूर्ख नहीं हैं कि सोने के अंडे देने वाली मुर्गी को छोड़कर इस तरह से चले जाएँ . उसको दौलत भी मिलती है और दो-दो हसीनाओं के साथ
आनंद भी निलता है तब वह ऐसे आनंद को किसे छोडेगा ?
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