Monday, November 1, 2010

लवगुरु- 85
चम्पा- और मुझे भी. बिना पूछे मुझे कुछ नहीं करना चाहिए था.
रानी- राईट, जब तू प्यार से अपनी समस्या केशव के सामने रखती और उसे सब उंच-नीच समझाती तो शायद वह राजी हो जाता , मगर तुम्हें धोखा नहीं देना चाहिए . उदाहरण सामने है. जब केशव से आज की मौज मस्ती के बारे में
बताया तो यह तुरंत राजी हो गया न. अब बिंदास मौग लों. कुछ नहीं बिगडता है. खैर, जों होना था हो गया . अब तो सब कुछ ठीक ठाक है न , मजे लों.. अब केशव को भी ऐतराज नहीं, रमन को भी नहीं . तुम तो करोगी भी क्यों ?
केशव- मैडम जी ठीक कहती हैं. मुझे भी चम्पा से ओब्जेक्शन नहीं है, बशर्ते कि इसके सम्बन्ध सिर्फ मौज मस्ती तक ही सीमित रहें . अगर इससे आगे बढ़ी तो दिक्कत होगी .
चम्पा- मैं तो गुलाम हूँ आपकी, वो तो रमन ने जब घर की मान मर्यादा की बात काही तो मैं मान गयी थी.
रमन- और मैं भी तो गलत नहीं था. ये आपके लिए तरसती थीं और मैं आवारा घूमता रहता ठा. इससे अच्छा मैंने इनको सुख दे दिया और अपनी बेचैनी भी दूर कर ली. अब इनको मैंने आपके सुपुर्द कर दिया है.
ये तो अब भी तेरी ही बांहों में है , क्यों आँखों के सामने ही झूठ बोल रहा है ?
रानी- तेरी बात पकड़ी गयी रमन, अब बात छोड़कर काम करना शुरू कर दो.
माहोल बेहद उत्तेजक हो चूका था . रानी जैसी सेक्सी औरत को दो मर्द संतुष्ट करने का प्रयास कर रहे थे, चम्पा भी इसमें भरपूर सहयोग कर रही थी. रमन तो कुछ देर में ही निढाल हो गया. बिन मौसम बरसात की तरह बरसकर
रह गया मगर केशव ने हिम्मत नहीं हारी , उसने एक बार तो रानी को सम्पूर्ण सुख संतुष्टि दी साथ ही चम्पा पर भी टूट पड़ा. उसका उत्साह गज़ब का था , वह कामोत्तेजना बढाने वाली दवा परफेक्स खाता था , इसी कारण एक नहीं बल्कि
दो महिलाओं को संतुष्ट कर पाया , हालाकि ऐसा बहुत कम ही हो पाता है. केशव दुबला-पतला था , फिर भी उसका कार्य गबरू जवान जैसा ठा. रानी तो उसकी शक्ति के सामने नतमस्तक होकर रह गयी . उसने कहा भी-
- तू तो गज़ब का जवान है केशव. सिर्फ तेरा जिस्म ही टूटा-फूटा लगता है, मगर तू है बड़ा सख्त जान. आज तो मजा बुला रहा है. मगर देख , बीच में ही मत हार जाना , चम्पा को भी पूरा-पूरा मजा देना. कहीं ऐसा तो नहीं कि
तुझे इस बात का डर सता रहा था कि अगर तू मेरे पर ही हार गया तो तेरी पत्नी चम्पा के साथ रमन रंगरेलियां मनाएगा ? इसीलिए तो तूने ये सब नहीं किया /
केशव- नहीं मालकिन, आप तो जानती ही हैं, मैं आराम से इतनी देर रुक जाता हूँ. आप बताओ कभी ऐसा हुआ है कि आपसे पहले मैंने हिम्मत हारी हो ?
रानी- बात सच है, तू बिस्तर पर तो हमेशा ही जीतता है. पक्का खिलाड़ी है. इसीलिए तो मैं तुझे इतना चाहने लगी हूँ कि तेरे भाई और पत्नी को भी यहाँ बुलाकर काम पर रख दिया .
चम्पा- अच्छा, इसका मतलब आप पहले से ही मालकिन की सेवा करते रहे हो, और मेरे सामने ऐसे दिखा रहे थे जैसे कि आज यह पहला मामला हो.
केशव- हाँ, चम्पा, तुझसे क्या छिपाना, मैं तो जबसे यहाँ नौकरी पर लगा हूँ तभी से मालकिन की सेवा कर आरहा हूँ.
चम्पा- अच्छी बात है, मैं कोई ऐतराज करने वाली नहीं हूँ. भले ही तुम मेरा ध्यान न रखना लेकिन मैडम का पूरा ध्यान रखना .
रानी- थेंक यू चम्पा, तुम सब लोग बहुत भले हो. मैं बाथरूम जाकर फ्रेश होकर आती हूँ. तब तक तुम काम क्रीडा चालु रखो.
केशव- ठीक है मालकिन, केशव आपके साथ चला जाएगा. आपको बाथरूम में मदद कर देगा. आज इसका पहला दिन है न, इसलिए जल्दी फेल हो गया है.
चम्पा- हाँ, वरना यह भी खूब मजे देता है. मुझे तो एक -एक रात में तीन-तीन बार घसीटा है. मना करती हूँ तब भी नहीं मानता था , आज न जाने क्या हो गया ?
केशव- मैं बहुत देर से उत्तेजित हो रहा था, ऐसा माहौल पहले कभी तो देखा नहीं, इसलिए अचानक हो गया. एक कारण यह भी रहा कि मैंने कभी पिछले दरवाजे से तो सुख भोगा नहीं , आज ही किया है.
रानी -आगे भी तुझे पिछले दरवाजे का इस्तेमाल करना होगा , क्योंकि मुझे ऐसा करना बहुत पसंद है , शायद तू नहीं जानता होगा फोर्नर इस क्रिया को खूब पसंद करते हैं .
केशव- अच्छा, तब तो मुझे भी कभी चांस दीजिए , मैं भी यह आनंद उठाना चाहता हूँ.
रानी- नहीं रे , तू तो मार डालेगा. बहुत खतरनाक है तू.
केशव- ऐसी कोई बात नहीं है मैडम, जैसे आप कहेंगी, आहिस्ता -आहिस्ता करूँगा , पक्का वादा है.
रानी- ठीक है तो अभी आ ही रही हूँ. इस बार तुम आगे से नहीं पीछे से करना , रमन को आगे से चांस दिया जाएगा .
चम्पा- आह. आगिस्ता-आहिस्ता करिये वरना-.....
केशव- वरना क्या मेरी जान. आज बड़ी नाजुक बन रही हो. भूल गयी वो दिन जब ...

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