Tuesday, October 12, 2010

भोजन के पाचन से लेकर इस द्वारा शरीर के पोषण में हमारी आंतें और यकृत सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं. रेशायुक्त भोजन हमारे इन दोनों महत्वपूर्ण अवयवों को अपना कार्य सकुशल करने में सहायता करता है. इनके कौशल से ही शरीर में रक्त प्रवाह सही रहता है जिससे मधुमेह, ह्रदयरोग, उच्च रक्त चाप, मानसिक तनाव व अवसाद, कैंसर, आतंरिक घाव (अल्सर), मोटापा, आदि व्याधियां हमसे दूर ही रहती हैं. वस्तुतः ये सभी व्याधियां भी परस्पर सम्बंधित हैं और एक दूसरे को प्रोन्नत करती हैं. अतः इनमें से कोई एक उपस्थित होने से अन्य की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है.

रेशायुक्त भोजन लेने के लिए हमें कुछ भी विशेष नहीं करना पड़ता, अपितु बहुत कुछ करने से बचना पड़ता है. रेशा प्रायः प्रत्येक प्राकृतिक खाद्य में उपस्थित होता है जिसे हम प्रायः भोजन की सफाई के बहाने निकाल कर दूर फैंक देते हैं. उदाहरण के लिए, आते को छान कर उसकी भुस्सी को दूर कर देते हैं जो वस्तुतः अनाज में प्राकृत रूप से उपस्थित रेशा होता है और उसकी हमारे भोजन में उपस्थिति अनिवार्य होती है. इसी प्रकार दालें दलकर उनके छिलके दूर कर हम प्राकृत रेशे से वंचित हो जाते हैं. कुछ दालों, जैसे अरहर, मूंग, उड़द, आदि का दलना उनके शीघ्र पकाने और पाचन में सहायक होता है किन्तु उनके छिलके हटाना हमारे लिए हानिकर सिद्ध होता है.

अधिकाँश रेशों में कुछ अपाच्य अवयव उपस्थित होते हैं जो भोजन को आँतों के अन्दर नरम तथा बिखरा हुआ बनाए रखते हैं जिससे हमारी आंतें उसके पोषक अवयवों का सरलता से अवशोषण कर लेती हैं और हमें भोजन का पूरा लाभ प्राप्त हो जाता है. यही रेशे अघुलनशील रेशे कहलाते हैं जो पाचन और पोषण में सहायक होते हैं.

दूसरी प्रकार के रेशे वसा में घुलनशील होते हैं जो वसा के साथ हमारे शरीर में समाहित हो जाते हैंऔर हमारी मांसपेशियों के निर्माण और उन्हें लचीला बनाये रखने में सहायक होते हैं. जई में ये घुलनशील रेशे पर्याप्त मात्रा में होते हैं जो शरीर को सशक्त बनाते हैं. वस्तुतः शरीर में वसा का प्रमुख उपयोग घुलनशील रेशों से मांसपेशियों का निर्माण करना ही होता है. रेशविहीन वसा शरीर में जमा होकर स्थूलता प्रदान करती है जिससे शरीर के परिचालन में मांसपेशियों पर अनावश्यक भार पड़ता है जिसे बचाने के लिए व्यक्ति आलसी हो जाता है और शारीरिक गतिविधियों के अभाव में भोजन का पाचन दुष्कर हो जाता है और वह अनावश्यक शक्कर में परिवर्तित होकर मधुमेह रोगको जन्म देता है.

The Monster Health Book: A Guide to Eating Healthy, Being Active & Feeling Great for Monsters & Kids!सभी फलों, सब्जियों और खाद्यान्नों में घुलनशील एवं अघुलनशील रेशे प्राकृत रूप से उपस्थित होते हैं. अतः आवश्यकता केवल इनके बाहरी अप-द्रव्यों को हटाने की होती है न कि इनमें समाहित प्राकृत रेशों के हटाने की. खाद्य को अत्यधिक शुद्ध करने के लिए उसके रेशों को हटाने से उसका पाचन इतनी तीव्र गति से होना संभव हो जाता है जितनी गति से शरीर उसे अवशोषित नहीं कर पाता जिससे शेष पोषक द्रव्य वसा तथा शक्कर के रूप में जमा हो जाते हैं और शरीर में मोटापाऔर मधुमेह रोग उत्पन्न हो जाते हैं.

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