Wednesday, October 13, 2010

लवगुरु-६६
क्या ऐसी बातों की भी कहीं पाठशाला होती हैं, अपने आप सीखा जाता है और अपने आप किया जाता है . अच्छा हाँ, समझ गयी. अब जान गयी कि तुम पर सरूर नहीं है. एक लार्ज पैग तैयार करो और गले से नीचे
उतार लों. जब तुम भी बराबर के हो जाओगे तो मजा आ जाएगा . पीने वाले के साथ यही परेशानी होती है कि वो तो चौथे में दौड रहा होता है और समझता है कि सामने वाला भी उसी रफ़्तार में दौड रहा होगा .
केशव- मैं ठहरा गरीब आदमी, अगर शराब का शौक पाल लूंगा तो पीने के लिए पैसे कहाँ से लाउंगा ?
रानी- जब ऊपरवाला पेट देता है तो उसे भरने के लिए दाना भी देता है. एक बार शुरू तो करो सही समय आने पर सब इंतजाम हो जाएगा . बुरा नहीं मानना , मजाक कर रही हूँ. तुम पीओ , कुछ नहीं होता . ऐसे
आदत नहीं लगती. आदमी बहुत स्ट्रोंग होता है . गवाह सब एडजस्ट कर लेता है .एक चुटकुला सुनाती हूँ. एक आदमी मरने के बाद भगवान के पास गया . उसने भगवान से प्रार्थना की कि उसे जीने का एक मौक़ा
और दिया आजाये. उसके बार -बार कहने पर भगवान ने पूछा कि क्या वह धरती पर शराब पीटा था ? जवाब मिला -नहीं. सवाल पूछा गया कि क्या वह मौज मस्ती करता था ? फिर इंसान ने नहीं में जवाब दिया.
अगले सवाल में पूछा गया कि क्या वह किसी लड़की से प्रेम वगैरह करता था ? इस बार भी जब न में जवाब मिला तो भगवान बोले -'जब तू धरती पर शराब नहीं पीता था, मौजमस्ती नहीं करता था , लड़कियों से चक्कर
भी नहीं चलाता था तो दोबारा जीकर क्या ऐसी -तैसी करेगा ? चल तू यहीं ठीक है. अब समझ गया . समजह कुछ ? बोल क्या समझा ?
केशव- यही कि अगर धरती पर जीना है तो शराब भी पीनी पड़ेगी , मौज मस्ती भी और लड़की से प्यार भी करना होगा .
रानी- हाँ, और वो लड़की भी कौन ? मैं ... सिर्फ मेरे साथ ही तुमको मौजमस्ती करनी है. एक बार नहीं, कितनी बार भी . जब तक जी रहा है . मौज लेता रह. अब अपने हाथ का पैग खत्म कर और सीधा गले में उतार .
बिजली- और तुम पी गए ? खूब मजा आया होगा ?
केशव- जी नहीं, खूब कड़वी लगी थी. ऐसा लगता था मानो किसीने नीम का रस घोलकर पिला दिया हो. थोड़ी देर के बाद गले में आग सी लगने लगी. और फिर उसके बाद जब मैंने दूसरा गिलास भी बनाकर पिया तो
कलेजे पर ठंडक सी पड़ने लगी , हांलाकि ऐसा लगता था जैसे कि सिर चकरा रहा हो. मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था. मेरी आँखों के सामने एक की जगह दो -दो रानिया थीं. मेरे हाथ हरकत में आ गए . रानी
मुस्करा रही थीं,. शायद वे मेरी स्थिति का आनंद ले रही थी. मैं उनके पांवों की मालिस करते -करते उनकी जाँघों पर भी हाथ फिराने लगा. इसके बाद मैं रुका नहीं, आगे बढ़ता गया, जब वो स्थान भी आ गया,
जिसको जवानी का इंडीकेटर समझा जाता है तो मैंने वहाँ पर हलके-हलके मालिस करनी शुरू करदी . रानी कह रही थी-
- आह केशव बहुत बढ़िया मेरे यार. तू तो खेला खाया खिलाड़ी लगता है , सिर्फ दिखावे के लिए अनाड़ी नजर आता है. इतनी अच्छी मालिस तो कभी तेरे सेठ ने भी नहीं की. मगर देख आहिस्ता-आहिस्ता ही करना
वरना मुझे दुःख होगा. अब नहीं, बाद में बड़ी तकलीफ होती है.
केशव- मैं आपको तकलीफ देने के लिए नहीं, बल्कि सुख देने आया हूँ मालकिन.इतनी आसानी से करूँगा कि आपको ज़रा भी दर्द नहीं होगा. लेकिन आप अपने कपड़ों को उतार दीजिए , क्योंकि आपको भी तो गर्मी
लग रही होगी. इजाजत हो तो मैं ही ये शुभ काम कर डालूँ.
रानी- ऐसे पूछकर औपचारिकता निभाने की क्या जरूरत है रे भोले केशव. जों मन में आये करता जा ना. तू भी पूरा मजा ले . ऐसी मालकिन तुझे कहाँ मिलेगी जों मजा भी देती हो और पगार भी.
केशव- सच कहती हो, मैंने सिर्फ फिल्म में ही ऐसा देखा था. एक फिल्म आई थी-'नौकर का कारनामा ' , उसीमे ऐसा नौकर दिखाया था जों अपनी मालकिन की जिस्मानी जरूरतों को पूरा करता है . साथ में पगार भी पाता है.
रानी- फिर , तुमने कभी ऐसा सोचा भी था कि ऐसा अवसर जिंदगी में आपको भी मिलने वाला है ?
केशव- सच कहूँ तो ख्यालों में भी नहीं सोचा था. अब जब सुबह नशा उतरेगा तो पता चलेगा कि यह सब खाब है या हकीकत ?
रानी यह सच है केशव और सदा सत्य ही बना रहेगा .
केशव- जों फिल्म मैंने देखी थी उसमे तो नौकर की ह्त्या कर दी गयी थी क्योंकि एक दिन मालिक ने अपनी पत्नी को नौकर के साथ रंगे हाथ रंगरेलियां करते हुए पकड़ लिया था , इससेमालिक नाराज हो गया और
पुलिसवाले को सुपारी देकर मरवा डाला .
रानी- ओह , बहुत बुरा हुआ . ऐसा नहीं होना चाहिए था. तू चिंता मत करना. मैं बेवफा नहीं हूँ, अगर जरूरत पडी तो मैं अपने हसबेंड को भी ये सब बता दूंगी .. मैं उनको भरोसे में ले लूंगी . लेकिन ये बात
जिस दिन लीक हुई , वो दिन तेरी जिंदगी का आखिरी दिन होगा .
केशव -तुम्हारे साथ मोहब्बत का यह राज मेरे साथ ही जाएगा. मैं मर भी गया तो किसी को कुछ बताने वाला नहीं. मैं समझता हूँ कि आपकी इज्जत कितनी मूल्यवान है. मैं आदर करता हूँ आपका . ऐसा कुछ नहीं होगा.
रानी- अब ज्यादा बोलने की जरूरत नहीं है . देख तेरा हथियार क्या बोलता है ?

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