Saturday, October 2, 2010

लवगुरु -५५

मुंशीजी उसी टॉप नंबर की वैश्या को अपनी हमदम, अपनी हमराज , अपनी जिंदगी समझ बैठे थे. वे चाहते थे कि डोली जीवन भर के लिए सिर्फ और सिर्फ उनकी हो जाए. लवगुरु ने तो बस यही कहा था कि आज की रात वे जी भरके सपने देखें और फिर बताएं कि उन्होंने किस तरह के सपने देखे, उनके ख़्वाब में किसी लड़की आयी , उसके साथ उन्होंने क्या किया ? मगर इस बीच होटल के वेटर ने उनको बहका लिया और फ़िल्मी स्टायल में डोली को उनके हवाले कर दिया . डोली तो वैसे भी बेहद सुन्दर थी, उसकी अदाओं का कोई जवाब नहीं था, वह जब मुस्कराती तो फूल झड़ने लगते थे. जब उसे पहली बार मुंशीजी ने देखा तो दीवाने हो गए थे , पगला गए थे . उनकी समाजः में ही नहीं आया था कि वेटर से कैसे इनकार करें जबकि वे तो छबीली के आशिक थे और शिव पांडे उर्फ लवगुरु से मिलने के लिए इसीलिए आये थे ताकि वे उनकी प्रेम कहाँ को सक्सेस कर सकें, उन्हें प्रेम करने के गुण बतला सकें मगर यहाँ तो मामला बिलकुल उलटा पद चुका था , ऐसा नहीं है कि मुंशीजी ने लवगुरु से लव टिप्स नहीं सीखे, सीखे थे मगर वे सभी टिप्स को छबीली के बजाय डोली पर ही अआज्माने लगे और बेचारी डोली क्या करती ? वह ठहरी बाजार की प्रशिक्षित गर्ल. उसने फ़ौरन ताड़ लिया कि बकरा हजम करने लायक है सो फ़ौरन हलाल कर दिया. प्यार का ऐसा जाल फेंका कि सब कुछ उलटा-पुल्टा हो गया. छबीली को चाहने वाला , उस पर मर मिटने वाला आशिक अब डोली की जुल्फों में कैद होकर रह गया था . उसने लवगुरु से बिस्तर पर पार्टनर को संतुष्ट करने के जों भी तरीके सीखे थे वह उन तरीकों को चाबीली के बजाय डोली पर आजमा रहा था . डोली को उसके ग्राहक ग्रेट ब्यूटी के नाम से भी जानते थे, वह सिर्फ तन की ही नहीं , बल्कि बुद्धि की भी चालाक थी. उसको खूब सुन्दर होने के साथ-साथ बुद्धिमान होने का भी गौरव प्राप्त थी. उसकी वाकपटुता गज़ब की थी.जों कोई भी डोली से बात करता था, उसके शब्दों की मिठास का दीवाना हो जाता था. छबीली कसबेनुमा शहर की कोरी करारी और कुंवारी लड़की थी. जब वह कुछ मेहनत का काम करती और उसके माथे से पसीना टपकता तो उसकी सुंदरता और बी ही बढ़ जाया करती थी. उसका चेहरा सुर्ख लाल था. आँखें कारी, कजरारी , झील जैसी गहरी. कमर इतनी पतली और फिगर इतना आकर्षक कि करीना कपूर भी फेल हो जाए. वैसे तो वह आसपास के सभी लड़कों की आँख की किरकिरी थी, सभी उसकी कमसिन जवानी का रस चूसने को बेताब थे मगर वह बची हुई थी. अभी तक किसीके कब्जे में नहीं आयी थी. वह अपने काम से काम रखती थी. उस कसबे में भी मुंशीजी की कई बड़ी-बड़ी दुकाने थीं, जिन दुकानों पर रोजाना हजारों लाखों की आमदनी हुआ करती थी. छबीली भी उनकी दूकान पर आया करती थी और उसे देखने भर के लिए मुंशीजी अपना लंबा -चुअदा कारोबार छोड़कर यहाँ की उस दूकान पर आया करते थे , जिस पर सामान लेने के लिए छबीली आया करती थी. लोक लाज से बचने के लिए वे छबीली से न तो प्रेम का प्रस्ताव ही रख पाए थे और न ही कभी उन्होंने उसके घरवालों के सामने प्रस्ताव रखा था . उन्होंने सुन रखा था कि गरीब लोग बहुत स्वाभिमानी होते हैं, वे भले ही कम खा सकते हैं मगर कम सामान बर्दाश्त नहीं पाते, चाहे वे अपनी बेटी की शादी किसी रिक्शा चलाने वाले के साथ कर सकते हैं मगर ज्यादा उम्र के रईस के साथ नहीं कर सकते, क्योंकि उन्हें इस बात का डर रहता है कि उनके लोग उन पर अपनी बेटी बेचने का आरोप लगा सकते हैं, मुंशीजी को डर था कि कहींउनकी बात का गलत अर्हत निकालकर ,मामले को तूल न डे दिया जाए , और इस कारण हो सकता है कि छबीली उनकी दूकान पर आना -जाना भी छोड़ दे .
अभी तक मुंशीजी छबीली के बारे में ही सोच रहे थे कि डोली ने टोक दिया -
-किन ख्यालों में डूबे हो ? क्या अपनी चाहने वाली के बारे सोच रहे हो ?जरूर कोई न कोई है. मैं नहीं मान सकती.मर्द बड़े छलिया होते हैं. दस से इश्क फरमाते हैं. चार-छः को शादी का प्रस्ताव देते हैं और दो से तीन शादियाँभी करते हैं. दिखाने को एक बीवी रखती हैं मगर फिर भी दूसरी-तीसरी के साथ सेक्स करते ही हैं. अंदरूनीसम्बन्ध के बारे में मैंने सूना है कि मर्दों को एक औरत में मजा नहीं आता, इसलिए वे अन्य महिलाओं केसाथ में सम्बन्ध बनाते हैं.
मुंशीजी- यकीन मानो , मैंने सिर्फ तुम्हारे साथ सुहागरात मनाई है , किसी गैर स्त्री के साथ कभी शारीरिक सम्बन्धनहीं बनाए, हाँ, किस की बात अलग है . या फिर थोड़ा बहुत सीने को सहला लिया. मुझे भारी सीने बहुतउत्तेजित करता है. जैसा कि तुम्हारा है, इसे देखते ही मुझे नशा सा चढ जाता है. मन में आग लगने लगती है.जिस्म गर्म हो जाता है. ``












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